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आल्हा गायन से जीवंत होगा बटेश्वर से जुड़ा इतिहास
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बाह। बटेश्वर मेले में जिला पंचायत आल्हा का आयोजन कर रहा है। बृहस्पतिवार को होने वाले इस आयोजन से बटेश्वर से जुड़ा आल्हा ऊदल और पृथ्वीराज चौहान का इतिहास भी जीवंत होगा। आल्हा गायन की लोक परंपरा को पुनर्जीवित करने की पहल की सभी ने सराहना की है।
आल्हा के आयोजन के साथ जीवंत हो रहे इतिहास पर जरार के जोधाराम, धनियापुरा के जयराम सिंह, पुरा कन्हैरा के सोनपाल सिंह, बेसंगपुरा के राजवीर सिंह उत्साहित हैं। उन्होंने बातचीत के दौरान कहा कि दो दशक में गांव की चौपालों से आल्हा गुम हो गई थी। जिला पंचायत की पहल से गांव में आल्हा का दौर लौटने की उम्मीद है।
1176 में जसराज ने महोबा में कराया था निर्माण, परमर्दिदेव ने बनवाया था मंदिर
बाह। बटेश्वर के प्राचीन जैन मंदिर में विराजमान भगवान अजितनाथ की पहचान आल्हा ऊदल के इष्टदेव (मनियादेव) के रूप में है। बटेश्वर में परमर्दिदेव ने सफेद संगमरमर से मंदिर का निर्माण कराया था। महोबा से लाकर मनियादेव की प्रतिमा यहां पर स्थापित की गई थी।
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इतिहासकार डॉ. शिव शंकर कटारे कहते हैं कि परमाल रासो में बटेश्वर की विरासत से जुड़ी रचनाएं ऐतिहासिक तथ्यों की पुष्टि करती हैं। आल्हा ऊदल की वीरता से जुड़े साक्ष्य बटेश्वर में आज भी मौजूद हैं। शौरीपुर जैन सिद्ध क्षेत्र तीर्थ कमेटी के उपमंत्री विनोद जैन कहते हैं कि भगवान अजितनाथ आल्हा ऊदल के इष्टदेव थे। यह प्रतिमा महोबा से लाई गई थी।
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आल्हा के आयोजन के साथ जीवंत हो रहे इतिहास पर जरार के जोधाराम, धनियापुरा के जयराम सिंह, पुरा कन्हैरा के सोनपाल सिंह, बेसंगपुरा के राजवीर सिंह उत्साहित हैं। उन्होंने बातचीत के दौरान कहा कि दो दशक में गांव की चौपालों से आल्हा गुम हो गई थी। जिला पंचायत की पहल से गांव में आल्हा का दौर लौटने की उम्मीद है।
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1176 में जसराज ने महोबा में कराया था निर्माण, परमर्दिदेव ने बनवाया था मंदिर
बाह। बटेश्वर के प्राचीन जैन मंदिर में विराजमान भगवान अजितनाथ की पहचान आल्हा ऊदल के इष्टदेव (मनियादेव) के रूप में है। बटेश्वर में परमर्दिदेव ने सफेद संगमरमर से मंदिर का निर्माण कराया था। महोबा से लाकर मनियादेव की प्रतिमा यहां पर स्थापित की गई थी।
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इतिहासकार डॉ. शिव शंकर कटारे कहते हैं कि परमाल रासो में बटेश्वर की विरासत से जुड़ी रचनाएं ऐतिहासिक तथ्यों की पुष्टि करती हैं। आल्हा ऊदल की वीरता से जुड़े साक्ष्य बटेश्वर में आज भी मौजूद हैं। शौरीपुर जैन सिद्ध क्षेत्र तीर्थ कमेटी के उपमंत्री विनोद जैन कहते हैं कि भगवान अजितनाथ आल्हा ऊदल के इष्टदेव थे। यह प्रतिमा महोबा से लाई गई थी।