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#हिंदीहैंहमः राष्ट्रीय एकता और स्थायित्व के लिए राष्ट्रभाषा अनिवार्य हो

Mon, 31 Aug 2020 06:43 PM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा Published by: Abhishek Saxena Updated Mon, 31 Aug 2020 06:43 PM IST
सार

व्यवहार में हिंदी भाषा का प्रयोग हीनता नहीं, बल्कि गौरव का प्रतीक है। जो लोग अपनी संकीर्ण पृथकवादी भावनाओं का प्रदर्शन कर हिंदी का विरोध करते हैं उन्हें राष्ट्रीय सम्मान के लिए अपने दृष्टिकोण में परिवर्तन कर संकुचित मनोवृत्ति को छोड़कर हिंदी को अपनाना चाहिए। 

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Hindi Hai Hum National Language Should Be Mandatory
डॉ. सांवरिया, बाबामहंत, श्रीराधा दामोदर सेवाश्रम गोवर्धन,आचार्य सोमदत्त दीक्षित ठाकुर भागवताचार्य, गोवर्धन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

किसी भी स्वतंत्र राष्ट्र की एक अपनी भाषा होती है जो कि उसका गौरव होती है। राष्ट्रीय एकता और राष्ट्र के स्थायित्व के लिए राष्ट्रभाषा अनिवार्य होनी चाहिए। हिंदी हमारे राष्ट्र के लिए अति महत्वपूर्ण है। आज हिंदी देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी बोली जाती है।
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व्यक्ति के व्यक्तित्व का विकास अपनी भाषा के पठन-पाठन से होता है और हमारी भाषा हिंदी है। किसी भी भाषा को राष्ट्र भाषा बनने के लिए उसमें सर्वव्यापकता, प्रचुर साहित्य, रचना, बनावट की दृष्टि से सरलता और वैज्ञानिकता जैसे आदि सब प्रकार के भावों को प्रकट करने की सामर्थ्य के गुण हिंदी भाषा में हैं। 
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व्वहार में हिंदी का प्रयोग गौरव का प्रतीक
हम सबका कर्तव्य है कि हिंदी का सम्मान करें हम सबका कर्तव्य है कि हम हिंदी को राष्ट्रभाषा के पद पर आसीन करने के लिए हर संभव प्रयास करें। व्यवहार में हिंदी भाषा का प्रयोग हीनता नहीं, बल्कि गौरव का प्रतीक है। जो लोग अपनी संकीर्ण पृथकवादी भावनाओं का प्रदर्शन कर हिंदी का विरोध करते हैं उन्हें राष्ट्रीय सम्मान के लिए अपने दृष्टिकोण में परिवर्तन कर संकुचित मनोवृत्ति को छोड़कर हिंदी को अपनाना चाहिए।  - महामंडलेश्वर डॉ. सांवरिया, बाबामहंत, श्रीराधा दामोदर सेवाश्रम गोवर्धन 
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Hindi Hai Hum National Language Should Be Mandatory
#हिंदीहैंहमः रमाकांत गोस्वामी, मधुसूदन शर्मा - फोटो : अमर उजाला
शब्दों का भंडार है हिंदी
शब्दों का भंडार है हिंदी। अमरकोष से लेकर आमजन मानस द्वारा विभिन्न प्रदेशों व गांवों में असंख्य शब्दों का प्रयोग अलग-अलग तरीके से किया जाता है। पर्यायवाची शब्द, विलोम शब्द, अलंकारों का प्रयोग आदि से गद्य-पद्य रचनाओं के सृजन में बहुत ही रोचकता पैदा हो जाती है। सवेरा, सुबह, प्रात: काल, पौ फटना आदि अनेक शब्द एक ही समय के लिए हैं। शब्दों के सागर अति अनुरूप अपने आगर को सजाने में वरदान है हिंदी। - रमाकांत गोस्वामी, रिसीवर, गिर्राज मुकुट मुखारविंद मंदिर मानसी गंगा, गोवर्धन 

समाज में हिंदी का प्रचार-प्रसार भरपूर करना चाहिए 
हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा व मातृभाषा ही नहीं, बल्कि हिंदुस्तान की अलग पहचान है। हम सभी को अपने समाज में हिंदी का प्रचलन व प्रचार-प्रसार भरपूर करना चाहिए। इससे हमारी आने वाली पीढ़ी इस पवित्र भाषा को सम्मान और प्रेम दे सके। हिंदी भाषा विश्व में सबसे ज्यादा बोले जानी वाली भाषाओं में से एक है। हिंदी का महत्व सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व में काफी है। इसे आगे बढ़ाने में हिंदी मीडिया का बड़ा योगदान है। - आचार्य सोमदत्त दीक्षित ठाकुर भागवताचार्य, गोवर्धन 

हिंदी को देश के लोगों की मानसिकता में बसाने की आवश्यकता है। हिंदी सरल व सुबोध है। ये लिपि बोध गम्य है। देवनागरी लिपि पूर्णत: वैज्ञानिक है। भाषा का प्रसार नारों से नहीं होता, वह निरंतर परिश्रम और धैर्य से होता है। राष्ट्र के सभी कार्य राष्ट्रभाषा हिंदी में हों। हिंदी व अहिंदी भाषा के अनेक विद्वानों ने राष्ट्रभाषा के रूप में हिंदी का समर्थन किया है। फिर भी आज हिंदी को उसका गौरवपूर्ण स्थान प्राप्त नहीं हुआ है। - मधुसूदन शर्मा, पूर्व प्रवक्ता, आदर्श कामिनी शिक्षा निकेतन बालिका इंटर कॉलेज, गोवर्धन
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