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#हिंदीहैंहम: 'घर-घर में बने हिंदी का माहौल, मातृभाषा बोलने में करें गौरव का अनुभव'

Mon, 14 Sep 2020 12:03 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Mon, 14 Sep 2020 12:03 AM IST
सार

  • अमर उजाला के ‘हिंदी हैं हम’ अभियान के तहत वेबिनार में हिंदी के विद्वान, शोधार्थियों व विद्यार्थियों ने कहा, उज्ज्वल है हिंदी का भविष्य

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Hindi Diwas 2020 amar ujala webinar on hindi hain hum campaign
हिंदी हैं हम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाना है तो इसके लिए घर-घर में माहौल बनाना होगा। बच्चों को सिखाना होगा कि वे गुड मार्निंग नहीं, राम-राम करें। ट्विंकल-ट्विंकल लिटिल स्टार भले ही पढ़ें लेकिन मां मुझे बंदूक दिला दे, मैं भी लड़ने जाऊंगा और उठो लाल अब आंखें खोलो... को कंठस्थ करें ताकि जब बड़े हों तो मातृभाषा बोलने में गौरव का अनुभव करें... ये बातें हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर रविवार को आयोजित अमर उजाला के वेबिनार में वक्ताओं ने कहीं।

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हिदी हैं हम अभियान के तहत हिंदी हमारा गौरव विषय पर आयोजित वेबिनार में शोधार्थियों, साहित्यकारों और शिक्षकों ने एक सुर में कहा कि हिंदी दुनियाभर में लोकप्रिय हो रही है। इसको सम्मान मिल रहा है। विश्व के 260 विश्वविद्यालयों में हिंदी पढ़ाई जा रही है। इसमें रोजगार के अवसर बढ़ने के साथ युवाओं का रुझान बढ़ रहा है। हमारी जिम्मेदारी है कि हम घर-घर में हिंदी का माहौल बनाएं ताकि अंग्रेजियत के चक्कर में बच्चे हिंदी से विमुख न हों।
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'हिंदी हमारी संस्कृति में बसी हुई है'
हिंदी विषय की शोधार्थी सारिका उपाध्याय ने कहा कि हिंदी हमारी संस्कृति और सभ्यता में बसी हुई है। इसमें तमाम बोली और भाषाएं समाहित हैं। यह सभी को साथ लेकर चलने वाली है। हिंदी बोलने पर हमें गर्व होना चाहिए। इंटरनेट पर भी हिंदी में कामकाज तेजी से बढ़ रहा है। 

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'भारतीयता की पहचान है हिंदी'
हिंदी विषय की शोधार्थी पूनम ने कहा कि विश्व स्तर पर हिंदी का प्रभाव बढ़ रहा है। इस पर हमें गर्व होना चाहिए। हिंदी भारतीयता की पहचान है। हिंदी को वैश्विक स्तर पर बढ़ाने में हिंदी सिनेमा और प्रवासी साहित्य ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हिंदी में रोजगार के अवसर बढ़ना अच्छा संकेत है।

'मुझे एक अलग पहचान दिलाई'
एमकॉम के छात्र अखिलेश चौधरी ने कहा कि मैंने बारहवीं तक की पढ़ाई की। सेंट जोंस से बीकॉम किया और अब केंद्रीय विश्वविद्यालय, राजस्थान से एमकॉम कर रहा हूं। हिंदी की वाद-विवाद, भाषण प्रतियोगिताओं में विजेता बनने पर राष्ट्रपति तक से पुरस्कार मिला। हिंदी ने अलग पहचान दिलाई। 

'सोशल मीडिया पर छा गई है हिंदी'
गणित विषय के शोधार्थी गौरव ने कहा कि इन दिनों सोशल मीडिया पर हिंदी में खूब लिखा और पढ़ा जा रहा है। इसे देखकर खुशी होती है। मैं अपने शोध कार्य में भी हिंदी को शामिल करने का प्रयास करूंगा। हिंदी को बढ़ावा देने में शिक्षण संस्थान महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। 

'हिंदी विश्व की सर्वाधिक वैज्ञानिक लिपि'
आगरा कॉलेज व नागरी प्रचारिणी सभा के मंत्री एवं हिंदी के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. चंद्रशेकर शर्मा ने कहा कि हिंदी विश्व की सर्वाधिक वैज्ञानिक लिपि है। यह जैसी लिखी जाती है, वैसी पढ़ी भी जाती है। विश्व के 260 से अधिक विश्वविद्यालयों में हिंदी पढ़ाई जा रही है। यह संख्या आने वाले दिनों में और भी बढ़ेगी। इसमें रोजगार के अवसर लगातार बढ़ रहे हैं। हिंदी भाषा में संगीत जैसा माधुर्य और तलवार जैसा पैनापन भी है। 

'राष्ट्रभाषा बनाने तक मुहिम जारी रखें'
आरबीएस कॉलेज के हिंदी विभागााध्यक्ष डॉ. युवराज सिंह ने कहा कि देश का गौरव और स्वाभिमान हिंदी से जुड़ा हुआ है। अमर उजाला के ‘हिंदी है हम’ मुहिम को हिंदी के राष्ट्रभाषा बनने तक जारी रखना होगा। देश के सर्वाधिक भूभाग पर हिंदी बोली जाती है। हिंदी की विश्वभाषा के रूप में अमिट पहचान बन चुकी है। विश्व की हर चौथी फिल्म हिंदी भाषा में बन रही है। नई शिक्षा नीति में मातृभाषा को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है।

'विदेशों में हिंदी व संस्कृत को पढ़ा जाता है'
साहित्यकार डॉ. शैलबाला अग्रवाल ने कहा कि देश में अधिकतर लोग मानसिक रूप से अंग्रेजियत के गुलाम हैं, जबकि विदेशों में हिंदी और संस्कृत को पढ़ा जाता है। मैं वर्ष 2011 में मॉरीशस गई थी, वहां के लोगों का हिंदी व संस्कृत के प्रति प्रेम देखकर चौंक गई थी। हमारे बच्चे हिंदी की गिनती नहीं जानते। यह दु:ख की बात है। इस पर विचार करना होगा। हमें हिंदी में बोलने और कामकाज करने का संकल्प लेना होगा। घर में हिंदी का माहौल बनाना होगा। 

'एक नहीं 365 दिन हिंदी के होने चाहिए'
कवयित्री व साहित्यकार डॉ. शशि तिवारी ने कहा कि वर्ष में एक नहीं बल्कि 365 दिन हिंदी के होने चाहिए। हमें घरों में हिंदी का माहौल बनाना चाहिए। हिंदी पूरे देश को एकता के सूत्र में बांधती है। विदेशों में लोग हिंदी के लिए बहुत समर्पित हैं। जापान व श्रीलंका के विश्वविद्यालयों में मेरी कविताएं पढ़ाई जा रही हैं। हिंदी को लिखना-पढ़ना आसान है। यह जैसी लिखी जाती है, वैसी ही बोली जाती है। हिंदी अंतरराष्ट्रीय पटल पर सम्मान पा रही है। विदेशों में हिंदी के उत्थान के लिए साहित्य रचा जा रहा है। 

 
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