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प्रदूषण की मार: धूल-धुएं से गर्भस्थ शिशु को नुकसान, गर्भपात का भी खतरा, बरतें ये सावधानियां
Thu, 11 Nov 2021 02:10 PM IST
Abhishek Saxena
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Thu, 11 Nov 2021 02:10 PM IST
सार
बुधवार को आगरा की हवा दिल्ली और फरीदाबाद जैसे शहरों से ज्यादा जहरीली रही। देश में प्रदूषित शहरों की टॉप 10 सूची में फिरोजाबाद 8 वें और आगरा 9 वें नंबर पर रहा।
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आगरा: चिकित्सक को दिखाने पहुंचीं गर्भवती महिलाएं
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हवा में मौजूद धूल-धुआं और कार्बन तत्व गर्भस्थ शिशु को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं। एसएन मेडिकल कॉलेज और महिला जिला अस्पताल में आने वाले 15 फीसदी गर्भवती महिलाओं के अल्ट्रासाउंड से यह पता चला। प्रदूषण के चलते दिवाली बाद स्त्री रोग विभाग में डेढ़ गुना मरीज भी बढ़ गए हैं।
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एसएन की स्त्री रोग विभागाध्यक्ष डॉ. सरोज सिंह ने बताया कि दिवाली से पहले 50 से 70 मरीज ओपीडी में आ रहे थे, लेकिन बीते चार-पांच दिन से संख्या 70 से 90 हो गई है। इन बढ़े हुए मरीजों में 12 से 15 गर्भवती महिलाएं (पांच से नौ माह की गर्भवती) हैं, जिन्होंने धूल-धुआं और बढ़ते प्रदूषण से सांस लेने में परेशानी, गर्भस्थ शिशु के मूवमेंट कम होना बताया। अल्ट्रासाउंड कराया तो दो-तीन गर्भवती महिलाओं के गर्भस्थ शिशु तक पर्याप्त ऑक्सीजन की कमी मिली। पूछताछ में यह गर्भवती महिलाएं सड़क किनारे-टूटी-खोदी सड़क किनारे रहने वालीं और प्रदूषित क्षेत्र की रहीं। इनके आसपास धूल-धुएं का स्तर भी अधिक है। शुरूआती महीनों में गर्भपात का खतरा भी है।
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समय पूर्व प्रसव और भ्रूण विकृत होने का खतरा
महिला जिला अस्पताल की प्रमुख अधीक्षक डॉ. रेखा गुप्ता ने बताया कि अभी ओपीडी में 380 से 400 तक गर्भवती महिलाएं आ रही हैं। दिवाली से पहले इनकी संख्या 320 से 350 थी। बढ़े मरीजों में प्रदूषित क्षेत्रों में रहने वाली दमा- सांस रोगी और एनमिक गर्भवती महिलाओं में परेशानी बढ़ी हुई मिल रही है। अल्ट्रासाउंड कराने पर प्रदूषण से गर्भस्थ शिशु का विकास प्रभावित मिला। इनमें समय पूर्व प्रसव और गर्भस्थ शिशु के विकृत होने का भी खतरे को देखते हुए दवाएं देने के साथ विशेष सावधानी बरतने को भी कहा है।
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मां को परेशानी तो गर्भस्थ शिशु के लिए भी दिक्कत
वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुपमा शर्मा ने बताया कि गर्भवती महिला को सांस लेने में परेशानी से ऑक्सीजन पूरी नहीं मिलती, तो गर्भस्थ शिशु भी प्रभावित होगा। ओपीडी में प्रदूषण से दिक्कत वाली महिलाओं की एहतियातन अल्ट्रासाउंड कर रहे हैं। लंबे समय तक प्रदूषित क्षेत्र में रहने से शिशु का वजन कम होने और ऑटिज्म बीमारी का भी खतरा है।
ये बरतें सावधानियां
- गर्भवती महिलाएं घर से बाहर जाने से बचें।
- घर में एयर प्यूरीफायर का उपयोग करें।
- प्रदूषण रोकने के लिए पौधे लगाएं।
- घर से बाहर जाते वक्त ट्रिपल लेयर का मास्क लगाएं।
- कैसी भी परेशानी होने पर चिकित्सक को दिखाएं।
जैसा कि ऑब्सट्रेटिकल एंड गायनाकोलॉजिकल सोसाइटी की अध्यक्ष डॉ. आरती गुप्ता ने बताया
सांसों का संकट: दिल्ली से ज्यादा जहरीली रही आगरा की हवा, ताजमहल पर सबसे अधिक प्रदूषण
वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुपमा शर्मा ने बताया कि गर्भवती महिला को सांस लेने में परेशानी से ऑक्सीजन पूरी नहीं मिलती, तो गर्भस्थ शिशु भी प्रभावित होगा। ओपीडी में प्रदूषण से दिक्कत वाली महिलाओं की एहतियातन अल्ट्रासाउंड कर रहे हैं। लंबे समय तक प्रदूषित क्षेत्र में रहने से शिशु का वजन कम होने और ऑटिज्म बीमारी का भी खतरा है।
ये बरतें सावधानियां
- गर्भवती महिलाएं घर से बाहर जाने से बचें।
- घर में एयर प्यूरीफायर का उपयोग करें।
- प्रदूषण रोकने के लिए पौधे लगाएं।
- घर से बाहर जाते वक्त ट्रिपल लेयर का मास्क लगाएं।
- कैसी भी परेशानी होने पर चिकित्सक को दिखाएं।
जैसा कि ऑब्सट्रेटिकल एंड गायनाकोलॉजिकल सोसाइटी की अध्यक्ष डॉ. आरती गुप्ता ने बताया
सांसों का संकट: दिल्ली से ज्यादा जहरीली रही आगरा की हवा, ताजमहल पर सबसे अधिक प्रदूषण