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योग से दी जानलेवा बीमारियों को मात
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पतंजलि महिला योग समिति की जिला प्रभारी दाखश्री योग करती हुईं
- फोटो : MAINPURI
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मैनपुरी। योग से शरीर निरोगी बनता है। इसका जीता जागता उदाहरण देवी रोड निवासी 74 वर्षीय दाखश्री यादव हैं। उन्होंने योग कर अपनी बीमारियों को मात दिया। साथ ही दूसरों को भी रोगों से छुटकारा दिलाया। आज न केवल वे खुद स्वस्थ हैं, बल्कि दूसरों को भी स्वस्थ बना रही हैं। साथ ही लोगों को योग के लिए प्रेरित भी कर रही हैं।
15 वर्ष पहले दाखश्री राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में हिंदी की प्रवक्ता थीं। एक दिन उन्हें माइग्रेन, सर्वाइकल और क्षीण दृष्टि जैसे लाइलाज रोगों ने चपेट में ले लिया। एक दिन उन्होंने टीवी पर बाब रामदेव को योगासन के बारे में बताते हुए देखा। इसके बाद उन्होंने निरंतर एक माह तक योगाभ्यास किया तो बीमारियों से कुछ राहत मिली। इसके बाद उन्होंने जब छह महीने तक योगाभ्यास किया तो उन्हें रोगों से निजात मिल गई। कभी चश्मे से भी देख पाना मुश्किल था, लेकिन आज वे बिना चश्मे के किताबें पढ़ती हैं।
वर्ष 2007 में सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने पतंजलि योगपीठ से योग शिक्षक का प्रशिक्षण लिया। इसके बाद उन्हें जिला प्रभारी की कमान सौंपी गई। उन्होंने अपना पूरा जीवन योग के लिए समर्पित कर दिया। योग से बीमारियों को मात देने वाली वे अकेली नहीं हैं। इसकी फेहरिस्त बहुत लंबी है, लेकिन देवी रोड निवासी उर्मिला यादव और राजा का बाग निवासी शशिप्रभा इसका एक उदाहरण हैं। शशिप्रभा जहां माइग्रेन पेन से जूझ रही थीं तो वहीं उर्मिला आंतों में संक्रमण से, लेकिन योग के कारण आज दोनों ही स्वस्थ हैं।
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15 वर्ष पहले दाखश्री राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में हिंदी की प्रवक्ता थीं। एक दिन उन्हें माइग्रेन, सर्वाइकल और क्षीण दृष्टि जैसे लाइलाज रोगों ने चपेट में ले लिया। एक दिन उन्होंने टीवी पर बाब रामदेव को योगासन के बारे में बताते हुए देखा। इसके बाद उन्होंने निरंतर एक माह तक योगाभ्यास किया तो बीमारियों से कुछ राहत मिली। इसके बाद उन्होंने जब छह महीने तक योगाभ्यास किया तो उन्हें रोगों से निजात मिल गई। कभी चश्मे से भी देख पाना मुश्किल था, लेकिन आज वे बिना चश्मे के किताबें पढ़ती हैं।
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वर्ष 2007 में सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने पतंजलि योगपीठ से योग शिक्षक का प्रशिक्षण लिया। इसके बाद उन्हें जिला प्रभारी की कमान सौंपी गई। उन्होंने अपना पूरा जीवन योग के लिए समर्पित कर दिया। योग से बीमारियों को मात देने वाली वे अकेली नहीं हैं। इसकी फेहरिस्त बहुत लंबी है, लेकिन देवी रोड निवासी उर्मिला यादव और राजा का बाग निवासी शशिप्रभा इसका एक उदाहरण हैं। शशिप्रभा जहां माइग्रेन पेन से जूझ रही थीं तो वहीं उर्मिला आंतों में संक्रमण से, लेकिन योग के कारण आज दोनों ही स्वस्थ हैं।
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