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UP: आगरा के क्रांतिकारियों ने अंग्रेज कलेक्टर पर फेंका था बम, ऐसा धमाका हुआ...हिल गई थी ब्रिटिश हुकूमत

Thu, 07 Aug 2025 09:04 AM IST
धीरेन्द्र सिंह तरुण सिंह, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
तरुण सिंह, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Thu, 07 Aug 2025 09:04 AM IST
सार

उत्तर भारत की प्रसिद्ध रामबरात तब पूरे देश में चर्चा का विषय बन गई थी, जब 82 साल पहले 27 सितंबर 1940 को तत्कालीन अंग्रेज कलेक्टर हार्डी पर आगरा के तीन क्रांतिकारियों ने बम फेंका था।

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hardy bomb kand in 1940 story in hindi  bomb was thrown Ram Barat
hardy bomb kand - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

अंग्रेजी हुकूमत और उस पर निरंकुश तानाशाही का वह गुलामी का दाैर आज भी लोगों को झकझोर देता है। उन लम्हों को याद कर लोग सिहर जाते हैं। ऐसे में क्रांतिकारियों ने गुलामी की इन जंजीरों को तोड़ने के लिए प्राणों की आहुतियां दे दीं। उनकी तानाशाहों को सबक सिखाने की तरकीब ने अंग्रेजी साम्राज्य की मजबूत जड़ों को हिलाकर रख दिया। ऐसी ही एक घटना 27 सितंबर 1940 को बेलनगंज चाैराहे की बराैलिया बिल्डिंग पर हुई। यहां राम बरात देखने आए क्रूर तानाशाह कलेक्टर हार्डी पर तीन क्रांतिकारियों के त्रिकंटक दल ने बम से ऐसा धमाका किया कि हुकूमत भी हिल गई थी।
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कलेक्टर हार्डी की निरंकुश तानाशाही से शहर व जिले की जनता बहुत भयभीत थी। घोड़े पर सवार जब यह कलेक्टर हंटर चलाते हुए बाजार से निकलता था तो दुकानदार तक भयभीत हो जाते थे। राहगीरों को जान बचाना मुश्किल होता था। क्रांतिकारियों के दल ने हार्डी को अत्याचार न करने की चेतावनी देते हुए पोस्टर लगाए तो हार्डी और बाैखला गया था।
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उसने पुलिस को पोस्टर प्रकाशित करने वाली प्रेस की तलाशी लेने और गिरफ्तारी के आदेश जारी कर दिए थे। पुलिस ने एक प्रेस कर्मचारी को इतनी यातनाएं दीं कि उसकी माैत हो गई। इसके बाद तो क्रांतिकारियों ने हार्डी से बदला लेने की ठान ली। पुराने केसों में षड्यंत्र होने के कारण केवल 3 सदस्यीय त्रिकंटल दल ही गठित किया जा सका। इसमें पत्रकार और क्रांतिकारी रोशनलाल गुप्त ‘करुणेश’, वासुदेव गुप्त और रामप्रसाद भारतीय थे। रामप्रसाद भारतीय अनेक स्थानों पर पहले भी बम विस्फोट कर अंग्रेजी हुकूमत को दहला चुके थे।
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चमकती चांदी की कुर्सी पर अभिमान से बैठा था हार्डी
27 सितंबर 1940 को बेलनगंज स्थित बराैलिया बिल्डिंग पर राम बरात देखने के लिए हार्डी को बुलाया गया था। उसके लिए विशाल मंच बना था। चांदी की चमचमाती कुर्सी थी। हार्डी उस चांदी की कुर्सी पर अभिमान और निर्भीकता से बैठा हुआ था। जैसे ही भगवान राम का हाथी बेलनगंज चाैराहे पर रेलवे पुल पार कर निकाला, समूचा क्षेत्र बम के धमाकों से गूंज उठा। इसमें हार्डी सहित 32 लोग घायल हुए। खून से लथपथ हार्डी को कार से उसकी कोठी पर पहुंचाया गया। इसके बाद घटनास्थल को घेरकर रातभर बिल्डिंग की तलाशी ली गई। इस कांड के बाद दर्जनभर क्रांतिकारियों पर केस चलाया गया। यातनाएं दी गईं, लेकिन वासुदेव गुप्त के अलावा भारतीय व करुणेश को नहीं पकड़ा जा सका। बाद में हार्डी को वायसराय के विशेष निर्देश पर ब्रिटेन जाना पड़ा।
 
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