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Guru Purnima 2019: जानिए क्यों आषाढ़ मास में ही मनाया जाता है गुरु पूर्णिमा का पर्व
Tue, 16 Jul 2019 12:42 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा/मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा/मथुरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Tue, 16 Jul 2019 12:42 AM IST
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guru purnima
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आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा पर गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है। गुरु और शिष्य के रिश्ते का यह पर्व देशभर में धूमधाम से मनाया जाता है। शिष्य अपने गुरुजनों की पूजा कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। इस अवसर पर गोवर्धन के मुड़िया पूर्णिमा मेला में तो लाखों भक्त आते हैं।
गुरु पूर्णिमा को लेकर कई मान्यताएं हैं। सबसे खास यह कि गुरु पूर्णिमा का पर्व आषाढ़ मास में ही क्यों मनाया जाता है? गोवर्धन धाम के चैतन्य हरि चरत के अनुसार गुरु पूर्णिमा के चंद्रमा की तरह है, जो पूर्व प्रकाशमान है और शिष्य आषाढ़ के बादलों की तरह है।
उन्होंने बताया कि आषाढ़ में चंद्रमा बादलों से घिरा रहता है। वैसे बादल रूपी शिष्यों से गुरु घिरे हैं। शिष्य अंधेरे बादल की तरह ही है। उस अंधेरे वातावरण में जो ज्ञान रूपी प्रकाश जगाता है, वो ही गुरु होता है। इसलिए आषाढ़ की पूर्णिमा का महत्व है।
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गुरु पूर्णिमा को लेकर कई मान्यताएं हैं। सबसे खास यह कि गुरु पूर्णिमा का पर्व आषाढ़ मास में ही क्यों मनाया जाता है? गोवर्धन धाम के चैतन्य हरि चरत के अनुसार गुरु पूर्णिमा के चंद्रमा की तरह है, जो पूर्व प्रकाशमान है और शिष्य आषाढ़ के बादलों की तरह है।
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उन्होंने बताया कि आषाढ़ में चंद्रमा बादलों से घिरा रहता है। वैसे बादल रूपी शिष्यों से गुरु घिरे हैं। शिष्य अंधेरे बादल की तरह ही है। उस अंधेरे वातावरण में जो ज्ञान रूपी प्रकाश जगाता है, वो ही गुरु होता है। इसलिए आषाढ़ की पूर्णिमा का महत्व है।
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मुड़िया पूनो का नामकरण
इसी तरह की मान्यता मुड़िया पूर्णिमा मेले की है। गोवर्धन में मानसी गंगा स्थित चकलेश्वर महादेव मंदिर में बंगाल के संत सनातन गोस्वामी रहा करते थे। वो हमेशा सिर का मुंडन कराकर भगवान की भक्ति में लीन रहते थे। सिर का मुंडन होने की वजह से उन्हें लोग मुड़िया बाबा कहते थे।
गुरु पूर्णिमा के दिन उन्होंने ब्रह्मलोक की प्राप्ति की थी। तभी से उनके शिष्य अपना सिर का मुंडन कराकर मृदंग और झांझ बजाते हुए हरि कीर्तन करते हुए मानसी गंगा की परिक्रमा करते हैं। तभी से गोवर्धन में गुरु पूर्णिमा को मुड़िया पूनो कहना शुरू कर दिया।
चैतन्य हरि चरत के अनुसार जीवन में गुरु और शिक्षक के महत्व को आने वाली पीढ़ी को बताने के लिए यह पर्व आदर्श है। गुरु पूर्णिमा समर्पण और सम्मान का पर्व है। इसे व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन वेद व्यास का जन्म हुआ था।
गुरु पूर्णिमा के दिन उन्होंने ब्रह्मलोक की प्राप्ति की थी। तभी से उनके शिष्य अपना सिर का मुंडन कराकर मृदंग और झांझ बजाते हुए हरि कीर्तन करते हुए मानसी गंगा की परिक्रमा करते हैं। तभी से गोवर्धन में गुरु पूर्णिमा को मुड़िया पूनो कहना शुरू कर दिया।
चैतन्य हरि चरत के अनुसार जीवन में गुरु और शिक्षक के महत्व को आने वाली पीढ़ी को बताने के लिए यह पर्व आदर्श है। गुरु पूर्णिमा समर्पण और सम्मान का पर्व है। इसे व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन वेद व्यास का जन्म हुआ था।