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Agra News: गुरु का ताल गुरुद्वारे का दो करोड़ से होगा विकास
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गुरुद्वागा गुरु का ताल
आगरा। गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी वर्ष पर प्रदेश सरकार ने सिख विरासत को सम्मान देते हुए आगरा स्थित गुरु का ताल गुरुद्वारा के पर्यटन विकास को गति देने का निर्णय लिया है। इसके तहत मुख्यमंत्री पर्यटन स्थलों के विकास की योजना के तहत दो करोड़ रुपये से पर्यटन विकास से जुड़े काम किए जाएंगे।
पर्यटन व संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि पर्यटन के लिहाज से आगरा उत्तर प्रदेश का प्रमुख केंद्र रहा है। 2024 में आगरा आने वाले पर्यटकों की संख्या करीब 1.78 करोड़ रही है, जो 2025 के जनवरी से जून तक 77,09,078 पहुंच गई है। सालभर देश ही नहीं दुनियाभर से बड़ी संख्या में पर्यटक आगरा आते हैं, इससे न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है, बल्कि रोजगार के भी रास्ते खुले हैं।
इसे देखते हुए विभाग ने यहां पर और सुविधाएं बढ़ाने के लिए यह परियोजना स्वीकृत की है। वर्तमान आगरा में जिस जगह पर गुरुद्वारा है, उसी स्थान पर गुरु तेग बहादुर जी के चरण पड़े थे। गुरु तेगबहादुर ने गुरुद्वारा गुरु ताल में करीब नौ दिन प्रवास किया। इसके धार्मिक महत्व को देखते हुए यहां सभी आवश्यक सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
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माईथान से भी रहा है नाता
गुरु तेग बहादुर पर भी धर्म परिवर्तन का दबाव डाला गया था। हालांकि यातनाओं को सहने के बाद गुरु तेग बहादुर ने 1675 में दिल्ली में शहादत प्राप्त की। बताया जाता है कि गुरु तेग बहादुर जब आगरा आए तो माता जस्सी ने उन्हें कपड़े का थान भेंट किया, जिस कारण क्षेत्र का नाम माईथान पड़ा। गुरु के बताए स्थान पर जब श्रद्धालुओं ने कुआं खुदवाया तो वहां मीठा पानी निकला। वह कुआं आज भी वहां हैं। आगरा आने वाले पर्यटक विशेषकर सिख समुदाय के लोग आज भी गुरु तेग बहादुर से जुड़े इन स्थलों के दर्शन के लिए आते हैं।
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पर्यटन व संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि पर्यटन के लिहाज से आगरा उत्तर प्रदेश का प्रमुख केंद्र रहा है। 2024 में आगरा आने वाले पर्यटकों की संख्या करीब 1.78 करोड़ रही है, जो 2025 के जनवरी से जून तक 77,09,078 पहुंच गई है। सालभर देश ही नहीं दुनियाभर से बड़ी संख्या में पर्यटक आगरा आते हैं, इससे न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है, बल्कि रोजगार के भी रास्ते खुले हैं।
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इसे देखते हुए विभाग ने यहां पर और सुविधाएं बढ़ाने के लिए यह परियोजना स्वीकृत की है। वर्तमान आगरा में जिस जगह पर गुरुद्वारा है, उसी स्थान पर गुरु तेग बहादुर जी के चरण पड़े थे। गुरु तेगबहादुर ने गुरुद्वारा गुरु ताल में करीब नौ दिन प्रवास किया। इसके धार्मिक महत्व को देखते हुए यहां सभी आवश्यक सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
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माईथान से भी रहा है नाता
गुरु तेग बहादुर पर भी धर्म परिवर्तन का दबाव डाला गया था। हालांकि यातनाओं को सहने के बाद गुरु तेग बहादुर ने 1675 में दिल्ली में शहादत प्राप्त की। बताया जाता है कि गुरु तेग बहादुर जब आगरा आए तो माता जस्सी ने उन्हें कपड़े का थान भेंट किया, जिस कारण क्षेत्र का नाम माईथान पड़ा। गुरु के बताए स्थान पर जब श्रद्धालुओं ने कुआं खुदवाया तो वहां मीठा पानी निकला। वह कुआं आज भी वहां हैं। आगरा आने वाले पर्यटक विशेषकर सिख समुदाय के लोग आज भी गुरु तेग बहादुर से जुड़े इन स्थलों के दर्शन के लिए आते हैं।