विश्वविद्यालय: स्नातक के छात्रों को प्रत्येक सेमेस्टर में एक रोजगारपरक पाठ्यक्रम लेना होगा
स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश और विषयों के चुनाव के संबंध में शासन स्तर से दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इसे शैक्षणिक सत्र 2021-22 से ही लागू किया जाना है। छात्रों को चार सेमेस्टर तक प्रत्येक सेमेस्टर में एक रोजगार पाठ्यक्रम लेना होगा।
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प्रवेश के समय छात्रों को सबसे पहले अपना संकाय (विज्ञान, कला, वाणिज्य, प्रबंधन आदि ) चुनना होगा। विश्वविद्यालय व कॉलेज में उपलब्ध सीट और नियमों के आधार पर छात्रों को संबंधित संकाय में प्रवेश देगा। छात्रों तीन मुख्य विषयों का चुनाव करना होगा। दो मुख्य विषय उसके चुने हुए संकाय से लेना अनिवार्य होगा और तीसरा मुख्य विषय वह अपने संकाय या फिर दूसरे संकाय से ले सकता है।
आगरा के डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलसचिव प्रो. पीके सिंह के मुताबिक शासन की ओर से राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत जारी दिशा-निर्देशों के मुताबिक छात्रों को प्रथम चार सेमेस्टर के लिए एक माइनर विषय किसी दूसरे संकाय से लेना अनिवार्य होगा। विश्वविद्यालय और कॉलेजों की ओर से उपलब्ध सीटों के आधार पर माइनर विषय आवंटित किया जाएगा।
एक वर्ष और दो वर्ष पर निकास की व्यवस्था
छात्रों को एक वर्ष (दो सेमेस्टर) पूरा करने पर सर्टिफिकेट के साथ निकास और दो वर्ष (चार सेमेस्टर) पूरा होने पर डिप्लोमा के साथ निकास की व्यवस्था होगी। तीन वर्ष (छह सेमेस्टर) पूरा करने पर ही डिग्री प्रदान की जाएगी। छात्रों को निकास के बाद अगले स्तर में फिर से प्रवेश ले सकेगा। छात्रों को द्वितीय-तृतीय वर्ष में विषय परिवर्तन की सशर्त सुविधा उपलब्ध होगी।
छात्रों को ये सुविधाएं भी मिलेंगी
छात्र मान्यता प्राप्त संस्थाओं से 20 फीसदी तक यूजीसी/शिक्षा मंत्रालय, केंद्र सरकार की ओर से अनुमन्य सीमा तक क्रेडिट ऑनलाइन कोर्स के माध्यम से प्राप्त कर सकेंगे। उसके अनुपात में कोर्स/विषय छोड़ सकेंगे। यूजीसी के नियमों के अनुसार ऑनलाइन कोर्स के क्रेडिट सभी विश्वविद्यालयों व कॉलेजों के जोड़ने होंगे।
- छात्रों को जरूरत के अनुसार पास के अन्य शिक्षण संस्थान से किसी विशेष विषय को अध्ययन की सुविधा विश्वविद्यालय की ओर से प्रदान की जा सकती है।
- यदि कोई योग्य छात्र कम समय में डिग्री के लिए जरूरी क्रेडिट प्राप्त कर लेगा तो न्यूनतम क्रेडिट प्राप्त करने पर अंतराल की सुविधा होगी, पर डिग्री तीन वर्ष के बाद ही मिलेगी। अंतराल के दौरान वह किसी भी काम को करने के लिए स्वतंत्र होगा।
- छात्रों को कोर्स आधार पर पंजीकरण की सुविधा प्राप्त होगी, जिस आधार पर वे किसी एक कोर्स का अध्ययन कर सकेंगे।
- जुटाए गए क्रेडिट का उपयोग छात्र सिर्फ एक उपाधि के लिए कर सकेगा। एक बार किसी क्रेडिट का उपयोग करने के बाद वह दूसरी उपाधि के लिए उसका प्रयोग नहीं कर सकेगा।