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पूरे साल अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाई की, परीक्षा में छात्रों को मिला हिंदी में प्रश्नपत्र
Mon, 18 Mar 2019 06:45 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फिरोजाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फिरोजाबाद
Published by: मुकेश कुमार
Updated Mon, 18 Mar 2019 06:45 PM IST
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सरकारी स्कूल में परीक्षा देते छात्र
- फोटो : अमर उजाला
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परिषदीय स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम में शिक्षा देने की सरकार की मंशा पूरी नहीं हो पा रही है। पूरे साल अंग्रेजी मीडियम की किताबों से छात्र-छात्राओं ने पढ़ाई की, मगर सोमवार को गणित का पेपर हिंदी भाषा में मिला। इससे छात्र-छात्राओं को परेशानी का सामना करना पड़ा।
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फिरोजाबाद जिले में 55 परिषदीय स्कूलों को अंग्रेजी माध्यम का दर्जा दिया था। सरकार ने इन स्कूलों में अलग से किताबी भेजी, जो अंग्रेजी माध्यम में थी। शिक्षकों ने भी कॉन्वेंट स्कूलों की तरह शिक्षा दिलाई। बच्चे अंग्रेजी माध्यम में ही पढ़ाई करते थे।
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परीक्षा की तैयारियां भी पाठ्यक्रम के अनुसार छात्र-छात्राओं ने की। मगर पेपर में सब कुछ हिंदी में लिखा था। जो स्थानीय स्तर पर ही बनाए गए हैं। अंग्रेजी मीडियम का पेपर अलग से बनवाना न पड़े, इसलिए शिक्षाधिकारियों ने हिंदी मीडियम का ही पेपर हल करा लिया।
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परीक्षा में बच्चों को हुई दिक्कत
शिक्षिका नीतू सिंह ने बताया कि किताब में पढ़े गिनती या अन्य प्रश्नों को अंग्रेजी में पढ़ते थे। अचानक हिंदी भाषा पेपर में देखा तो बच्चे समझ ही नहीं पा रहे थे। बच्चों को काफी दिक्कतें हुई। अब क्या रिजल्ट होगा, यह बाद में ही पता चलेगा।
शिक्षक संजय यादव ने बताया कि पूरे साल बच्चे किताब अंग्रेजी माध्यम की पढ़ते रहे। गिनती और पहाड़ा भी अंग्रेजी में ही याद कराया गया। पेपर की तैयारियां भी उसी हिसाब से कराई। किंतु पेपर हिंदी मीडियम वाला आ गया। पूरे साल सिखाया हुआ, पेपर में नहीं आया।
नगर शिक्षाधिकारी श्रीकांत पटेल ने कहा कि पेपर बनवाने की जिम्मेदारी जिला स्तरीय अधिकारियों की थी। सभी पेपर एक ही स्थान से आए हैं। पेपर अंग्रेजी स्कूलों के लिए अलग से क्यों नहीं हैं। इसकी जानकारी हम भी लेंगे।
शिक्षक संजय यादव ने बताया कि पूरे साल बच्चे किताब अंग्रेजी माध्यम की पढ़ते रहे। गिनती और पहाड़ा भी अंग्रेजी में ही याद कराया गया। पेपर की तैयारियां भी उसी हिसाब से कराई। किंतु पेपर हिंदी मीडियम वाला आ गया। पूरे साल सिखाया हुआ, पेपर में नहीं आया।
नगर शिक्षाधिकारी श्रीकांत पटेल ने कहा कि पेपर बनवाने की जिम्मेदारी जिला स्तरीय अधिकारियों की थी। सभी पेपर एक ही स्थान से आए हैं। पेपर अंग्रेजी स्कूलों के लिए अलग से क्यों नहीं हैं। इसकी जानकारी हम भी लेंगे।