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Govardhan Puja 2023: गोवर्धन पूजा 14 नवंबर को होगी, भाई दूज की भी बदली तारीख; जानें पूजा विधि और पूरी कथा
Mon, 13 Nov 2023 08:12 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Mon, 13 Nov 2023 08:12 AM IST
सार
Govardhan Puja, Bhai Dooj 2023 Date: तिथियों में भुगत भोग्य यानी घटने-बढ़ने के कारण दीपोत्सव पर्व छह दिनों तक का है, जिसकी शुरुआत 10 नवंबर को धनतेरस से हो गई। 11 को रूप चतुर्दशी, 12 को दिवाली मनाई गई। वहीं अब 14 को गोवर्धन पूजा और 15 को भाई दूज मनाया जाएगा।
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गोवर्धन पूजा
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
Govardhan Puja 2023 Date Puja Vidhi And Shubh Muhurat: दीपावली से ठीक एक दिन बाद कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा के दिन गोवर्धन पूजा या अन्नकूट का पर्व मनाया जाता है। लेकिन इस बार गोवर्धन पूजा 13 नवंबर के बजाए 14 नवंबर को की जाएगी। इस दिन श्रीकृष्ण के स्वरूप गोवर्धन पर्वत (गिरिराज जी) और गाय की पूजा का विशेष महत्व होता है। गोवर्धन, वृंदावन और मथुरा सहित पूरे बृज में इस दिन जोर-शोर से अन्नकूट महोत्सव मनाया जाता है। मंदिरों में अन्नकूट महोत्सव कार्तिक प्रतिपदा से लेकर कार्तिक पूर्णिमा तक चलता है।
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गोवर्धन पूजा (14 नवंबर)
गोवर्धन पूजा हर साल कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को मनाते हैं। इस दिन गोवर्धन पर्वत, भगवान श्रीकृष्ण और गोमाता की पूजा करने का विधान है। इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने देवताओं के राजा इंद्र के अहंकार को नष्ट किया था। इस दिन मंदिरों के अलावा कॉलोनी आदि में गाय के गोबर से गोवर्धन भगवान के बड़े सुंदर प्रतिरूप बनाकर पूजा की जाती है।
गोवर्धन पूजा हर साल कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को मनाते हैं। इस दिन गोवर्धन पर्वत, भगवान श्रीकृष्ण और गोमाता की पूजा करने का विधान है। इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने देवताओं के राजा इंद्र के अहंकार को नष्ट किया था। इस दिन मंदिरों के अलावा कॉलोनी आदि में गाय के गोबर से गोवर्धन भगवान के बड़े सुंदर प्रतिरूप बनाकर पूजा की जाती है।
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क्या है कथा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार द्वापर युग में इंद्र ने कुपित होकर जब मूसलाधार बारिश की तो श्री कृष्ण ने गोकुलवासियों व गायों की रक्षार्थ और इंद्र का घमंड तोड़ने के लिए गोवर्धन पर्वत, छोटी अंगुली पर उठा लिया था। उनके सुदर्शन चक्र के प्रभाव से ब्रजवासियों पर जल की एक बूंद भी नहीं पड़ी, सभी गोप-गोपिकाएं उसकी छाया में सुरक्षित रहे। तब ब्रह्माजी ने इन्द्र को बताया कि पृथ्वी पर श्रीकृष्ण ने जन्म ले लिया है,उनसे बैर लेना उचित नहीं है। तब श्रीकृष्ण अवतार की बात जानकर इन्द्रदेव अपने इस कार्य पर बहुत लज्जित हुए और भगवान श्रीकृष्ण से क्षमा-याचना की।इन्द्र के अभिमान को चूर करने के बाद भगवान श्रीकृष्ण ने सभी गोकुल वासियों सहित कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा के दिन 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग बनाकर गोवर्धन पर्वत की पूजा की थी।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार द्वापर युग में इंद्र ने कुपित होकर जब मूसलाधार बारिश की तो श्री कृष्ण ने गोकुलवासियों व गायों की रक्षार्थ और इंद्र का घमंड तोड़ने के लिए गोवर्धन पर्वत, छोटी अंगुली पर उठा लिया था। उनके सुदर्शन चक्र के प्रभाव से ब्रजवासियों पर जल की एक बूंद भी नहीं पड़ी, सभी गोप-गोपिकाएं उसकी छाया में सुरक्षित रहे। तब ब्रह्माजी ने इन्द्र को बताया कि पृथ्वी पर श्रीकृष्ण ने जन्म ले लिया है,उनसे बैर लेना उचित नहीं है। तब श्रीकृष्ण अवतार की बात जानकर इन्द्रदेव अपने इस कार्य पर बहुत लज्जित हुए और भगवान श्रीकृष्ण से क्षमा-याचना की।इन्द्र के अभिमान को चूर करने के बाद भगवान श्रीकृष्ण ने सभी गोकुल वासियों सहित कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा के दिन 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग बनाकर गोवर्धन पर्वत की पूजा की थी।
गोवर्धन पूजा की विधि
गोवर्धन पूजा करने के लिए आप सबसे पहले घर के आंगन में गाय के गोबर से गोवर्धन की आकृति बनाएं। इसके बाद रोली, चावल, खीर, बताशे, जल, दूध, पान, केसर, फूल और दीपक जलाकर गोवर्धन भगवान की पूजा करें।इसके बाद अपने परिवार सहित श्रीकृष्ण स्वरुप गोवर्धन की सात प्रदक्षिणा करें। मान्यता है कि इस दिन विधि विधान से सच्चे दिल से गोवर्धन भगवान की पूजा करने से एवं गायों को गुड़ व चावल खिलाने से भगवान श्री कृष्ण की कृपा बनी रहती है। इस दिन गाय की पूजा करने से सभी पाप उतर जाते हैं और मोक्ष प्राप्त होता है।
गोवर्धन पूजा करने के लिए आप सबसे पहले घर के आंगन में गाय के गोबर से गोवर्धन की आकृति बनाएं। इसके बाद रोली, चावल, खीर, बताशे, जल, दूध, पान, केसर, फूल और दीपक जलाकर गोवर्धन भगवान की पूजा करें।इसके बाद अपने परिवार सहित श्रीकृष्ण स्वरुप गोवर्धन की सात प्रदक्षिणा करें। मान्यता है कि इस दिन विधि विधान से सच्चे दिल से गोवर्धन भगवान की पूजा करने से एवं गायों को गुड़ व चावल खिलाने से भगवान श्री कृष्ण की कृपा बनी रहती है। इस दिन गाय की पूजा करने से सभी पाप उतर जाते हैं और मोक्ष प्राप्त होता है।
भाई दूज (15 नवंबर)
कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को हर वर्ष भाई दूज के रूप में मानते हैं। इस पर्व को सबसे पहले यमुना जी ने अपने भाई यमराज को तिलक किया था इससे प्रसन्न होकर यमराज ने यमुना को उपहार स्वरूप यह वचन दिया था कि वर्ष में एक बार मैं आपके पास अवश्य आऊंगा। जो भाई अपनी बहन से इस दिन तिलक करवाएगा, साथ में यमुना नदी में स्नान करेंगे उनको अकाल मृत्यु का भय नहीं रहेगा।
कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को हर वर्ष भाई दूज के रूप में मानते हैं। इस पर्व को सबसे पहले यमुना जी ने अपने भाई यमराज को तिलक किया था इससे प्रसन्न होकर यमराज ने यमुना को उपहार स्वरूप यह वचन दिया था कि वर्ष में एक बार मैं आपके पास अवश्य आऊंगा। जो भाई अपनी बहन से इस दिन तिलक करवाएगा, साथ में यमुना नदी में स्नान करेंगे उनको अकाल मृत्यु का भय नहीं रहेगा।