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ग्लेडियोलस की खेती से महक रहे गांव
ब्यूरो, अमर उजाला आगरा
Updated Fri, 18 Dec 2015 02:25 AM IST
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पहले बारिश और ओलावृष्टि, फिर सूखे की मार के चलते मायूस किसानों के चेहरों पर ग्लेडियोलस के फूलों ने मुस्कान बिखेर दी है। उम्दा फसल और अच्छी कीमत मिलने से किसानों के परिवारों में खुशी का माहौल है। आर्थिक तंगी की स्थिति से जूझ रहे किसान परिवार फूलों की खेती से खुश हैं।
बता दें कि बाह तहसील के 60 गांवों में ग्लेडियोलस के फूलो की खेती की जाती है। बर का पुरा, खेड़ा देवीदास, पहाड़पुरा, सीतापुर, रूपपुरा, रीछापुरा, क्यारी, समौखी पुरा, साहवराय का पुरा, रानी का बाग, खेड़ा राठौर, हिंगोट खेड़ा, पारना, मंझटीला, सामरमऊ, पुरा कनैरा, रजपुरा आदि गांवों के किसान इसे बडे़ पैमाने पर अपना रहे हैं। पिछले साल कंदीय सड़न के चलते कम फूल खिले थे। बाजार में भी फूलों की बेकदरी हुई थी लेकिन इस बार हालात बदले हैं। मौसम की मार से परेशान किसान ग्लेडियोलस की खेती से घाटे की भरपाई करने की उम्मीद बांधे हैं। फूल भी खेतोें में खूब खिले हैं। मुंबई, जयपुर, कानपुर ,दिल्ली और आगरा की मंडियों में फूलों की मांग भी खूब है और कीमत भी अच्छी मिल रही है। वर का पुरा के रामप्रकाश कुशवाह ने बताया कि एक बीघा रकबे में आठ से बारह हजार रुपये की लागत आती है। जबकि 20, 22 पार्सल की पैदावार होती है। दीपावली और सहालग के दिनों में ढाई हजार रुपये प्रति पार्सल की बिक्री हो रही है। खेड़ा देवीदास के जंगजीत, पहाड़ पुरा के रामगोपाल ने बताया कि इस साल ग्लेडियोलस की खेती से आर्थिक तंगी दूर होने की उम्मीद है। समौखी पुरा के रामकिशन भी फूलो की खेती को अच्छा बता रहे हैं।
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ऐसे बनता है फूलों का पार्सल
बाह। फूलों की 24 डंडी का एक बंडल होता है। एक पार्सल में 50-60 बंडल होते हैं। इन बंडलों के आधार पर ही इनकी कीमत तय होती है। कुछ शहरों में 50 बंडल का तो कुछ शहरों में 60 बंडल का पार्सल होता है।
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पशुओं का चारा भी
बाह। फूलों को चुनने के बाद उसके पत्ते और डंठल बचते हैं। खेड़ा देवीदास के जंगजीत सिंह ने बताया कि बकरी भैंस आदि इन्हें खा लेते हैं। यही वजह है कि चारे के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
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बता दें कि बाह तहसील के 60 गांवों में ग्लेडियोलस के फूलो की खेती की जाती है। बर का पुरा, खेड़ा देवीदास, पहाड़पुरा, सीतापुर, रूपपुरा, रीछापुरा, क्यारी, समौखी पुरा, साहवराय का पुरा, रानी का बाग, खेड़ा राठौर, हिंगोट खेड़ा, पारना, मंझटीला, सामरमऊ, पुरा कनैरा, रजपुरा आदि गांवों के किसान इसे बडे़ पैमाने पर अपना रहे हैं। पिछले साल कंदीय सड़न के चलते कम फूल खिले थे। बाजार में भी फूलों की बेकदरी हुई थी लेकिन इस बार हालात बदले हैं। मौसम की मार से परेशान किसान ग्लेडियोलस की खेती से घाटे की भरपाई करने की उम्मीद बांधे हैं। फूल भी खेतोें में खूब खिले हैं। मुंबई, जयपुर, कानपुर ,दिल्ली और आगरा की मंडियों में फूलों की मांग भी खूब है और कीमत भी अच्छी मिल रही है। वर का पुरा के रामप्रकाश कुशवाह ने बताया कि एक बीघा रकबे में आठ से बारह हजार रुपये की लागत आती है। जबकि 20, 22 पार्सल की पैदावार होती है। दीपावली और सहालग के दिनों में ढाई हजार रुपये प्रति पार्सल की बिक्री हो रही है। खेड़ा देवीदास के जंगजीत, पहाड़ पुरा के रामगोपाल ने बताया कि इस साल ग्लेडियोलस की खेती से आर्थिक तंगी दूर होने की उम्मीद है। समौखी पुरा के रामकिशन भी फूलो की खेती को अच्छा बता रहे हैं।
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ऐसे बनता है फूलों का पार्सल
बाह। फूलों की 24 डंडी का एक बंडल होता है। एक पार्सल में 50-60 बंडल होते हैं। इन बंडलों के आधार पर ही इनकी कीमत तय होती है। कुछ शहरों में 50 बंडल का तो कुछ शहरों में 60 बंडल का पार्सल होता है।
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पशुओं का चारा भी
बाह। फूलों को चुनने के बाद उसके पत्ते और डंठल बचते हैं। खेड़ा देवीदास के जंगजीत सिंह ने बताया कि बकरी भैंस आदि इन्हें खा लेते हैं। यही वजह है कि चारे के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।