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Booker Prize 2022: गीतांजलि श्री की उपलब्धि से बढ़ा ब्रज का मान, जानें क्या बोले  साहित्यकार

Sat, 28 May 2022 10:17 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Sat, 28 May 2022 10:17 AM IST
सार

गीतांजलि श्री के उपन्यास 'टॉम्ब ऑफ सैंड' को अंतरराष्ट्रीय बुकर प्राइज मिला है। इसे डेजी रॉकवेल ने ट्रांसलेट किया है।  यह दुनिया की उन 13 पुस्तकों में शामिल थी, जिसे अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार के लिए लिस्ट में शामिल किया गया।
 

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Geetanjali Shree wins International Booker Prize translated by Daisy Rockwell novel tomb of sand Know what the litterateur said
गीतांजलि श्री को मिला अंतर्राष्ट्रीय बुकर पुरस्कार - फोटो : ANI

विस्तार

मैनपुरी में जन्मी साहित्यकार गीतांजलि श्री को उनके लेखन पर बुकर पुरस्कार दिए जाने से ब्रज के साहित्यकार भी प्रफुल्लित हैं। उनका मानना है कि गीतांजलिश्री की इस उपलब्धि से ब्रज का मान बढ़ा है।  यह किसी क्षेत्र विशेष के लिए नहीं बल्कि भारत के लिए खुशी और गौरव की बात है। उनकी यह उपलब्धि युवा साहित्यकारों को प्रेरित करेगी। 

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हिंदी का गौरव बढ़ा है

साहित्यकार पद्मश्री ऊषा यादव ने बताया कि गीतांजलि को बुकर पुरस्कार मिलना देश के लिए गौरव की बात है। यह सम्मान हिंदी भाषा और हिंदी के साहित्यकारों के लिए गौरव की बात है। एक-एक करके उन्होंने सारी सीढ़ियां पार कीं और आखिर में इस सम्मान की हकदार बनीं, यह बहुत अच्छी बात है। उन्होंने एक इतिहास लिखा है।

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सम्मान से उत्साह बढ़ा

साहित्यकार डॉ. शशि तिवारी ने कहा कि बहुत अच्छी बात है हमारे देश का नाम हो रहा है। साहित्य के क्षेत्र में अब पुरुष ही नहीं महिलाएं भी खूब कामयाबी हासिल कर रही हैं। साहित्यकारों के साथ यह पूरे नारी समाज के लिए गौरव की बात है। यह किसी क्षेत्र विशेष के लिए नहीं बल्कि भारत के लिए खुशी की बात है। 

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भारत के लिए गर्व का दिन

कवि एवं साहित्यकार अशोक रावत ने कहा कि समाज में कवि और लेखक की भूमिका बहुत जरूरी और साइलेंट होती है। ऐसे में अगर साहित्य के क्षेत्र में ब्रज से नाता रखने वाली गीतांजलि श्री को यह सम्मान मिला है तो गौरव और सौभाग्य की बात है। भारत के लिए हिंदी और साहित्य पर गर्व करने का दिन है। इससे भावी साहित्यकारों को प्रेरणा मिलेगी।

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