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बेरोजगार युवकों से ढाई करोड़ की ठगी का मामला: युवाओं का डाटा लेकर नौकरी का झांसा देता था 'दिल्ली गैंग'
Fri, 19 Mar 2021 12:09 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Fri, 19 Mar 2021 12:09 AM IST
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ठगी के आरोपी
- फोटो : अमर उजाला
आगरा में थाना सदर पुलिस और साइबर क्राइम सेल ने बेरोजगार युवाओं से ठगी करने वाले दिल्ली के गैंग के सरगना और दो सदस्यों को गिरफ्तार किया था। पुलिस की पूछताछ में एक और जानकारी सामने आई है। गैंग युवाओं से पंजीकरण शुल्क, ऑफर लेटर भेजने के नाम पर और सिक्योरिटी मनी के रूप में 25 से 50 हजार रुपये खाते में जमा कराता था। नौकरी नहीं लगने पर यह धनराशि वापस करने का झांसा देकर भी ठगी करते थे। इसके लिए ई-वॉलेट का क्यूआर कोड और लिंक भेजकर खाते में रकम ट्रांसफर का झांसा देकर रकम अपने खातों में ट्रांसफर करा लेते थे, जब तक पीड़ित को पता चलता था, देर हो चुकी होती है।
पुलिस ने बुधवार को दिल्ली के मनोज कुमार, नीरज और सदर के उखर्रा निवासी मनोज को गिरफ्तार किया था। गैंग का सरगना दिल्ली का मनोज था। उसने ऑनलाइन जॉब पोर्टल पर लागिन आईडी ले रखी थी। इससे युवाओं का डाटा लेने के बाद कॉल करके नौकरी दिलाने के नाम पर रकम जमा कराते थे।
आगरा: बेरोजगार युवकों से दो साल में ढाई करोड़ रुपये ठगे, गिरोह के सरगना सहित तीन गिरफ्तार
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एसएसपी बबलू कुमार ने बताया कि गैंग के सदस्य ली गई धनराशि वापस करने के नाम पर पीड़ितों के खाते से रकम ट्रांसफर करते थे। जिन लोगों की नौकरी नहीं लगती थी, वह अपनी दी हुई रकम वापस मांगते थे। इस पर आरोपी उन्हें रकम वापस करने का झांसा देते थे। उनकी बात कंपनी के मैनेजर से कराने कहते थे। इसके बाद कॉल करके मोबाइल पर ई-वॉलेट का क्यूआर कोड और लिंक भेजते थे। कहते थे क्यूआर कोड स्कैन करने और लिंक पर क्लिक करने पर खाते में रकम आ जाएगी।
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पुलिस ने बुधवार को दिल्ली के मनोज कुमार, नीरज और सदर के उखर्रा निवासी मनोज को गिरफ्तार किया था। गैंग का सरगना दिल्ली का मनोज था। उसने ऑनलाइन जॉब पोर्टल पर लागिन आईडी ले रखी थी। इससे युवाओं का डाटा लेने के बाद कॉल करके नौकरी दिलाने के नाम पर रकम जमा कराते थे।
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एसएसपी बबलू कुमार ने बताया कि गैंग के सदस्य ली गई धनराशि वापस करने के नाम पर पीड़ितों के खाते से रकम ट्रांसफर करते थे। जिन लोगों की नौकरी नहीं लगती थी, वह अपनी दी हुई रकम वापस मांगते थे। इस पर आरोपी उन्हें रकम वापस करने का झांसा देते थे। उनकी बात कंपनी के मैनेजर से कराने कहते थे। इसके बाद कॉल करके मोबाइल पर ई-वॉलेट का क्यूआर कोड और लिंक भेजते थे। कहते थे क्यूआर कोड स्कैन करने और लिंक पर क्लिक करने पर खाते में रकम आ जाएगी।
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मगर, ऐसा होता नहीं था। क्योंकि यह लिंक रकम खाते में भेजने के लिए नहीं, बल्कि पीड़ितों के खाते से आरोपियों के खाते में ट्रांसफर होने का होता था। कई बार लोग नहीं समझ पाते थे। क्यूआर कोड स्कैन करने और लिंक पर क्लिक करने से उनके खाते से और रकम निकल जाती थी। अभी गैंग के तीन और सदस्यों के नाम सामने आए हैं। पुलिस उनकी तलाश कर रही है। आरोपियों के खातों की भी डिटेल निकलवाई जा रही है।