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भ्रष्ट पुलिसकर्मियों का खेल: आगरा कमिश्नरेट में बढ़ गई दरोगा से लेकर सिपाहियों तक की कमाई, ये भी आरोप

Fri, 14 Jun 2024 04:06 PM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Fri, 14 Jun 2024 04:06 PM IST
सार

आगरा कमिश्नरेट में पुलिसकर्मियों पर जुआरी, सट्टेबाज, हिस्ट्रीशीटर, गैंगस्टर, मादक पदार्थ तस्करों को संरक्षण देने जैसे गंभीर आरोप भी हैं। इस मामले में अभी तक 12 दरोगा सहित 56 पुलिसकर्मियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई हो चुकी है। 
 

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Game of corrupt policemen: Earnings from sub-inspector to constable increased in Agra Commissionerate
पुलिस आयुक्त, agra police, police commissioner - फोटो : संवाद

विस्तार

आगरा में कमिश्नरेट प्रणाली लागू होने के बाद पुलिस कर्मी निरंकुश हो गए हैं। दरोगा, मुंशी व सिपाहियों की कमाई अवैध वसूली से बढ़ गई। आचार संहिता में तो भ्रष्टाचार और मनमानी की हद ही पार हो गई। पुलिस कमिश्नर के पास शिकायतों की झड़ी लगी तो जांच में 30 पुलिसकर्मी भ्रष्ट और लापरवाह मिले।
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कमिश्नरेट पुलिस व्यवस्था लागू हुए आगरा में 19 महीने बीत गए। जिला पुलिस से कमिश्नरेट पुलिस प्रणाली लागू होने से लोगों को राहत और कार्यशैली में बदलाव की उम्मीद थी। लेकिन, न्यायिक शक्तियां मिलने से जहां एक तरफ मुकदमों और जमानत में वसूली बढ़ी। दूसरी तरफ फर्जी मुकदमे लिखे गए।
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जगदीशपुरा थानाध्यक्ष जितेंद्र वर्मा को फर्जी मुकदमे में जेल जाना पड़ा। पुलिस सूत्रों ने बताया कि जो काम पहले 500 रुपये में होता था, वह 5000 रुपये में हो रहा है। सराफा व्यवसायियों से धोखाधड़ी के मामलों में दरोगा से लेकर इंस्पेक्टर तक ने चांदी काटी। नतीजा ये हुआ कि पुलिस की छवि सुधरने के बजाय बिगड़ती गई।

 
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मार्च में आचार संहिता लागू हो गई। जून के पहले सप्ताह तक पुलिस कमिश्नर के पास पासपोर्ट सत्यापन, विवेचना में फर्जीवाड़ा, मुकदमों की धाराओं में हेरफेर से लेकर सट्टेबाज, जुआरी, हिस्टीशीटर और गैंगस्टर को संरक्षण देने जैसी शिकायतों का अंबार लग गया। पुलिस कमिश्नर जे रविन्दर गौड ने डीसीपी सिटी को जांच के आदेश दिए। जांच में सात दरोगा, 6 मुंशी सहित 30 पुलिस कर्मी अनैतिक कार्यों में संलिप्त मिले। जिन्हें निलंबित किया गया।

 
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एसीपी के निर्देश भी नहीं मानते विवेचक
 पुलिस सूत्रों के अनुसार धन लोलुपता में कई थानों में विवेचक सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) के निर्देशों को भी हवा में उड़ा देते थे। डीसीपी सिटी और पुलिस कमिश्नर तक पीड़ितों को पेश होकर दरोगाओं की शिकायत करनी पड़ी। बिना आदेश गिरफ्तारी, दबिश और जेल का डर दिखाकर भी दरोगा और बीट पुलिस अधिकारियों ने पीड़ितों को धमकाना शुरू कर दिया था।

 

भ्रष्टाचार नहीं बर्दाश्त
आगरा के  पुलिस कमिश्नर जे रविन्दर गौड ने बताया कि आचार संहिता में पुलिस कर्मियों की शिकायतें अधिक आईं। जांच के बाद कार्रवाई की गई है। जनता से गलत व्यवहार और भ्रष्टाचार कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। शिकायत मिलने पर सख्त कार्रवाई होगी। 
 
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