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आखिरी सफर में भी मुसीबत: कीचड़ से गुजरी अर्थी, तिरपाल लगाकर जलानी पड़ी चिता; विकास कार्यों में धांधली का आरोप
Sun, 06 Sep 2026 01:48 PM IST
Arun Parashar
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Published by: Arun Parashar
Updated Sun, 06 Sep 2026 01:48 PM IST
सार
अंतिम संस्कार की प्रक्रिया के दाैरान बार-बार बारिश हो रही थी। ऐसे में ग्रामीण प्लास्टिक का तिरपाल को चिता के ऊपर तानकर खड़े रहे। काफी मशक्कत के बाद जैसे-तैसे अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी हो सकी। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में श्मशान घाट बने हैं। जिम्मेदार अधिकारियों की अनदेखी के चलते वर्षों से इसका विकास अटका पड़ा है।
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तिरपाल लगाकर जलानी पड़ी चिता।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
आगरा की ग्राम पंचायत दिगनेर में प्रशासनिक दावों की पोल खोलती एक तस्वीर सामने आई है। गांव में बुनियादी सुविधाओं की उपेक्षा के कारण लोगों को जहां पानी से होकर अर्थी ले जानी पड़ी, वहीं तिरपाल लगाकर चिता को मुखाग्नि देनी पड़ी। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
बरौली अहीर के गांव दिगनेर निवासी सीमा देवी पत्नी भीमसेन का बीमारी के बाद निधन हो गया था। परिजन और ग्रामीण शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाने लगे, तो श्मशान घाट जाने वाले मार्ग पर पानी भरा मिला। जलकुंभी व कंटीली झाड़ियां भी खड़ी थीं।
ग्रामीणों को महिला की अर्थी को खेतों के कीचड़ भरे रास्ते से होकर ले जाना पड़ा। श्मशान घाट पर टिनशेड भी नहीं था। बार-बार बारिश हो रही थी। ऐसे में ग्रामीण प्लास्टिक का तिरपाल को चिता के ऊपर तानकर खड़े रहे। काफी मशक्कत के बाद जैसे-तैसे अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी हो सकी। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में श्मशान घाट बने हैं। जिम्मेदार अधिकारियों की अनदेखी के चलते वर्षों से इसका विकास अटका पड़ा है।
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ग्रामीण जगदीश कर्दम ने बताया कि ग्रामसभा की खुली बैठकों में कई बार प्रस्ताव देने और उच्च अधिकारियों को अवगत कराने के बाद भी कोई समाधान नहीं हुआ। ग्रामीणों ने विकास कार्यों में बड़े पैमाने पर धांधली का आरोप लगाते हुए पक्के रास्ते व टिनशेड निर्माण की मांग की है।
दिगनेर में तीन श्मशान घाट है। विगत वर्ष एक श्मशान घाट पर टिनशेड लगवाया गया था। वह सभी जाति धर्म के लिए है। अन्य श्मशान घाट पर भी जल्द टिनशेड लगवाया जाएगा। -प्रेम पाल सिंह, खंड विकास अधिकारी बरौली अहीर
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बरौली अहीर के गांव दिगनेर निवासी सीमा देवी पत्नी भीमसेन का बीमारी के बाद निधन हो गया था। परिजन और ग्रामीण शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाने लगे, तो श्मशान घाट जाने वाले मार्ग पर पानी भरा मिला। जलकुंभी व कंटीली झाड़ियां भी खड़ी थीं।
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ग्रामीणों को महिला की अर्थी को खेतों के कीचड़ भरे रास्ते से होकर ले जाना पड़ा। श्मशान घाट पर टिनशेड भी नहीं था। बार-बार बारिश हो रही थी। ऐसे में ग्रामीण प्लास्टिक का तिरपाल को चिता के ऊपर तानकर खड़े रहे। काफी मशक्कत के बाद जैसे-तैसे अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी हो सकी। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में श्मशान घाट बने हैं। जिम्मेदार अधिकारियों की अनदेखी के चलते वर्षों से इसका विकास अटका पड़ा है।
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ग्रामीण जगदीश कर्दम ने बताया कि ग्रामसभा की खुली बैठकों में कई बार प्रस्ताव देने और उच्च अधिकारियों को अवगत कराने के बाद भी कोई समाधान नहीं हुआ। ग्रामीणों ने विकास कार्यों में बड़े पैमाने पर धांधली का आरोप लगाते हुए पक्के रास्ते व टिनशेड निर्माण की मांग की है।
दिगनेर में तीन श्मशान घाट है। विगत वर्ष एक श्मशान घाट पर टिनशेड लगवाया गया था। वह सभी जाति धर्म के लिए है। अन्य श्मशान घाट पर भी जल्द टिनशेड लगवाया जाएगा। -प्रेम पाल सिंह, खंड विकास अधिकारी बरौली अहीर