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मुंहमांगे रुपये मिले तो दरकिनार कर दिए मानक
ब्यूरो, अमर उजाला
Updated Fri, 10 Apr 2015 02:04 AM IST
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जब रुपयों की ‘बारिश‘ देखी तो अफसरों ने चयन के मानकों को दरकिनार कर दिया। अब चयन समिति में शामिल अफसरों के फंसने पर आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं को अपनी सेवाएं छिनने का डर सता रहा है। इस फर्जीवाड़े की जांच में बिजलेंस को कई वर्ष लग गए। अब मुकदमा दर्ज होने के बाद अफसर गिरफ्तारी से बचने के लिए हाथ-पांव मारने शुरू कर दिए हैं।
बता दें, बाल विकास परियोजना एत्मादपुर के लिए 112-112 आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों-सहायिकाओं की वर्ष 2004 में भर्ती की गई थी। इसमें फर्जीवाड़े का खुलासा वर्ष 2015 में हुआ। बिजलेंस टीम को जांच से जुड़े दस्तावेज हासिल करने में वक्त अधिक लग गया। कई दस्तावेज छिपा लिए गए थे। जिन्हें दबाव के बाद बिजलेंस को सौंपना पड़ा था। तत्कालीन सीडीपीओ कुसुम द्विवेदी की कार्यप्रणाली इस तरह की थी कि शासन को निलंबित भी करना पड़ा था। हालांकि अब वो सेवानिवृत्त हो चुकी हैं।
अब चयन समिति में शामिल सभी अफसरों पर मुकदमा दर्ज होने के बाद आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं में हड़कंप है। चूंकि बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा हुआ, इसलिए उन्हें भर्ती रद होने का डर सता रहा है। कई आंगनबाड़ी कार्यालय में जानकारी करने पहुंचीं। उन्होंने बताया कि हमारी क्या गलती है, कागज सही लग रहे हैं। जितने रुपये मांगे गए उतने अफसरों को दे दिए गए थे।
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एक आंगनबाड़ी कार्यकत्री ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि भर्ती के दौरान चयन करने के लिए आंगनबाड़ी कार्यकत्री के लिए 20-30 हजार और सहायिकाओं के लिए 10-15 हजार रुपये लिए गए थे। जिनके फर्जी कागज लगाए गए थे उनसे पांच हजार रुपये अधिक लिए गए थे। इतने वर्ष सेवाएं दी। किसी की कारगुजारी का खामियाजा पात्र आंगनबाड़ी कार्यकत्री और सहायिकाएं क्यों उठाएंगी। इधर एत्मादपुर थाना इंस्पेक्टर ने बताया कि मामले में नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी टीम बनाई जा रही है।
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बता दें, बाल विकास परियोजना एत्मादपुर के लिए 112-112 आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों-सहायिकाओं की वर्ष 2004 में भर्ती की गई थी। इसमें फर्जीवाड़े का खुलासा वर्ष 2015 में हुआ। बिजलेंस टीम को जांच से जुड़े दस्तावेज हासिल करने में वक्त अधिक लग गया। कई दस्तावेज छिपा लिए गए थे। जिन्हें दबाव के बाद बिजलेंस को सौंपना पड़ा था। तत्कालीन सीडीपीओ कुसुम द्विवेदी की कार्यप्रणाली इस तरह की थी कि शासन को निलंबित भी करना पड़ा था। हालांकि अब वो सेवानिवृत्त हो चुकी हैं।
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अब चयन समिति में शामिल सभी अफसरों पर मुकदमा दर्ज होने के बाद आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं में हड़कंप है। चूंकि बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा हुआ, इसलिए उन्हें भर्ती रद होने का डर सता रहा है। कई आंगनबाड़ी कार्यालय में जानकारी करने पहुंचीं। उन्होंने बताया कि हमारी क्या गलती है, कागज सही लग रहे हैं। जितने रुपये मांगे गए उतने अफसरों को दे दिए गए थे।
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एक आंगनबाड़ी कार्यकत्री ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि भर्ती के दौरान चयन करने के लिए आंगनबाड़ी कार्यकत्री के लिए 20-30 हजार और सहायिकाओं के लिए 10-15 हजार रुपये लिए गए थे। जिनके फर्जी कागज लगाए गए थे उनसे पांच हजार रुपये अधिक लिए गए थे। इतने वर्ष सेवाएं दी। किसी की कारगुजारी का खामियाजा पात्र आंगनबाड़ी कार्यकत्री और सहायिकाएं क्यों उठाएंगी। इधर एत्मादपुर थाना इंस्पेक्टर ने बताया कि मामले में नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी टीम बनाई जा रही है।