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UP: चंबल के बीहड़ का वो गांव, जहां कभी जलती थीं 14 होलियां; दस्यु हमले के बाद उजड़ गया पूरा गांव
Mon, 02 Mar 2026 12:10 PM IST
आगरा ब्यूरो
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: आगरा ब्यूरो
Updated Mon, 02 Mar 2026 12:10 PM IST
सार
हथकांत गांव में 1909 तक 14 होलियां जलाई जाती थीं और किले में भव्य आयोजन होता था। दस्यु हमले के बाद गांव उजड़ गया, लेकिन इसकी होली और क्रांति की कहानियां आज भी चौपालों पर जिंदा हैं।
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वीरान पड़ा हथकांत एवं किले के अवशेष
विस्तार
चंबल के बीहड़ में बसे बाह के हथकांत गांव में 1909 तक 14 होलियां जलती थीं। 29 हजार की आबादी वाले गांव के किले में होली की महफिल सजती थी। उन्हीं दिनों दस्यु पंचम सिंह ने हथकांत थाने पर धावा बोला था। 21 सिपाहियों की हत्या कर उनके हथियार लूटे थे। अपने ब्लाॅग में सरोखीपुरा के जगदेव सिंह भदौरिया ने इतिहास के तथ्यों के साथ हाथकांत में जलने वाली होलियों के बारे में लिखा है।
लूट की इस घटना के बाद हथकांत का थाना जैतपुर में सिफ्ट हुआ था। धीरे-धीरे उजड़ा हथकांत गांव आज वीरान पड़ा है। खंडहर में तब्दील हुए ऐतिहासिक किले के साथ हथकांत गांव के अवशेष ही बचे हैं। खंडहर प्राचीन वैभव और संपन्नता की गवाही दे रहे हैं। इन अवशेषों के साथ होली से जुड़ी हुई यादें गांव की चौपालों पर आज भी सुनी जाती हैं।
गीतों में होता है बखान
जरार निवासी होली गायक जोधाराम ने बताया कि हथकांत के उजड़ने के बाद बीहड़ क्षेत्र के आसपास के गांव आबाद हुए थे। इन गांवों में आज भी हथकांत की होली जलाने और गायन की परंपरा का निर्वहन होता है। खयाल गायक सुखई ने भी हथकांत की होली का बखान किया था। 14 होली जलने की परंपरा को जानकर वर्तमान पीढ़ी आश्चर्य में पड़ जाती है।
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क्रांति की गवाह रही हैं ये होलियां
कमतरी निवासी होली गायक राजबहादुर शर्मा ने बताया कि हथकांत की होलियों की कहानी बीहड़ के गांव की चौपालों पर आज भी सुनी जाती हैं। ऐतिहासिक गांव की होली आजादी के आंदोलन से भी जुड़ी रही हैं। कभी क्रांति का अचूक हथियार बनी थी यह होली। उन दिनों की यादें युवकों में देश भक्ति का जोश भर देती है।
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लूट की इस घटना के बाद हथकांत का थाना जैतपुर में सिफ्ट हुआ था। धीरे-धीरे उजड़ा हथकांत गांव आज वीरान पड़ा है। खंडहर में तब्दील हुए ऐतिहासिक किले के साथ हथकांत गांव के अवशेष ही बचे हैं। खंडहर प्राचीन वैभव और संपन्नता की गवाही दे रहे हैं। इन अवशेषों के साथ होली से जुड़ी हुई यादें गांव की चौपालों पर आज भी सुनी जाती हैं।
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गीतों में होता है बखान
जरार निवासी होली गायक जोधाराम ने बताया कि हथकांत के उजड़ने के बाद बीहड़ क्षेत्र के आसपास के गांव आबाद हुए थे। इन गांवों में आज भी हथकांत की होली जलाने और गायन की परंपरा का निर्वहन होता है। खयाल गायक सुखई ने भी हथकांत की होली का बखान किया था। 14 होली जलने की परंपरा को जानकर वर्तमान पीढ़ी आश्चर्य में पड़ जाती है।
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क्रांति की गवाह रही हैं ये होलियां
कमतरी निवासी होली गायक राजबहादुर शर्मा ने बताया कि हथकांत की होलियों की कहानी बीहड़ के गांव की चौपालों पर आज भी सुनी जाती हैं। ऐतिहासिक गांव की होली आजादी के आंदोलन से भी जुड़ी रही हैं। कभी क्रांति का अचूक हथियार बनी थी यह होली। उन दिनों की यादें युवकों में देश भक्ति का जोश भर देती है।