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रेलवे में नौकरी दिलाने के नाम पर 1.80 लाख ठगे
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कासगंज। रेलवे में नौकरी दिलाने के नाम पर दो युवकों ने 1.80 लाख रुपये की ठगी करके फर्जी नियुक्ति पत्र उपलब्ध करा दिए। कोर्ट ने कोतवाली पुलिस को दोनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच के आदेश दिए हैं।
राजेंद्र पुत्र बाबूलाल निवासी ठंडी सड़क के पुत्र राहुल कुमार व दीपक बेरोजगार हैं। प्रमोद कुमार व विनोद कुमार निवासी रामवली कॉलोनी से उनका पहले से ही परिचय है। प्रमोद व विनोद 13 जनवरी 2019 को राजेंद्र के घर पर पहुंचे। दोनों ने बताया कि उनकी रेलवे में अच्छी जान पहचान है। इज्जतनगर में नौकरी लगवा देंगे। इसके लिए 1.80 लाख रुपये खर्च होंगे। राजेंद्र उनके झांसे में आ गया।
उसने 15 अप्रैल 2019 को एक लाख रुपये तथा 5 मई 2019 को 80 हजार रुपये दे दिए। इसके बाद उसने डाक से फर्जी नियुक्ति पत्र उपलब्ध करा दिए। जब व लोग इज्जतनगर पहुंचे तो मामले का खुलासा हुआ। इसके बाद पीड़ित 15 अगस्त 2019 को आरोपियों के घर पर पहुंचा। उसने रुपये वापस मांगे। इस पर आरोपियों ने गाली-गलौज कर जान से मारने की धमकी दी।
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पीड़ित ने मामले की जानकारी कोतवाली पुलिस को दी, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद पुलिस अधीक्षक को डाक से शिकायत भेजी गई। तब भी किसी ने इस पर ध्यान नहीं दिया। इसके बाद पीड़ित ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय में वाद दायर कर दिया। कोर्ट ने पुलिस को मामला दर्ज कर जांच के आदेश जारी कर दिए।
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राजेंद्र पुत्र बाबूलाल निवासी ठंडी सड़क के पुत्र राहुल कुमार व दीपक बेरोजगार हैं। प्रमोद कुमार व विनोद कुमार निवासी रामवली कॉलोनी से उनका पहले से ही परिचय है। प्रमोद व विनोद 13 जनवरी 2019 को राजेंद्र के घर पर पहुंचे। दोनों ने बताया कि उनकी रेलवे में अच्छी जान पहचान है। इज्जतनगर में नौकरी लगवा देंगे। इसके लिए 1.80 लाख रुपये खर्च होंगे। राजेंद्र उनके झांसे में आ गया।
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उसने 15 अप्रैल 2019 को एक लाख रुपये तथा 5 मई 2019 को 80 हजार रुपये दे दिए। इसके बाद उसने डाक से फर्जी नियुक्ति पत्र उपलब्ध करा दिए। जब व लोग इज्जतनगर पहुंचे तो मामले का खुलासा हुआ। इसके बाद पीड़ित 15 अगस्त 2019 को आरोपियों के घर पर पहुंचा। उसने रुपये वापस मांगे। इस पर आरोपियों ने गाली-गलौज कर जान से मारने की धमकी दी।
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पीड़ित ने मामले की जानकारी कोतवाली पुलिस को दी, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद पुलिस अधीक्षक को डाक से शिकायत भेजी गई। तब भी किसी ने इस पर ध्यान नहीं दिया। इसके बाद पीड़ित ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय में वाद दायर कर दिया। कोर्ट ने पुलिस को मामला दर्ज कर जांच के आदेश जारी कर दिए।