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UP: रजिस्ट्री कार्यालय में फर्जीवाड़ा...40 साल की जिल्दों में छिपा राज, जांच में फंस सकती है कई की गर्दन

Sun, 26 Jan 2025 11:20 AM IST
अरुन पाराशर अमर उजाला नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला नेटवर्क, आगरा Published by: अरुन पाराशर Updated Sun, 26 Jan 2025 11:20 AM IST
सार

फटे हुए पन्नों में गहरी साजिश का राज है। 1972 से 2012 तक जिल्द बही का ऑडिट हो जाए तो 300 से अधिक फर्जी बैनामों की कलई खुल सकती है।
 

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Fraud in registry office SIT obtained copies of eight deeds
रजिस्ट्री कार्यालय। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

आगरा में रजिस्ट्री दफ्तर के रिकाॅर्ड रूम पर ताला लटक सकता है। जिन आठ बैनामों के फर्जी होने का शक है, उनकी नकल एसआईटी को मिल गई है। छेड़छाड़, कूटरचना व कागज की अदला-बदली की जांच के लिए इन बैनामों की जिल्द सील होंगी। रिकाॅर्ड को फॉरेंसिक लैब भेजा जाएगा।
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सदर तहसील में निबंधन भवन है। जहां पांच रजिस्ट्री दफ्तर हैं। इनके केंद्रीय अभिलेखागार में रिकाॅर्ड से छेड़छाड़ हो गई। जिल्द से पन्ने फट गए। मूल बैनामे को बदलकर नकली दस्तावेज चस्पा हो गए। आठ बैनामों में शिकायत के आधार पर एसआईटी जांच शुरू है। शुक्रवार को एसआईटी ने दो घंटे तक रजिस्ट्री दफ्तर में रिकाॅर्ड खंगाला था। उन्होंने सभी आठ बैनामों से संबंधित दस्तावेज की नकल प्राप्त कर ली है। इन बैनामों की जिल्द भी सील होंगी। 

 
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इनके अलावा रिकाॅर्ड रूम में 10 हजार से अधिक जिल्द हैं। जिनमें 1972 से लेकर 2012 तक 150 से अधिक जिल्दों में 300 से अधिक पन्ने फटे हो सकते हैं। जांच का दायरा बढ़ने पर फटी जिल्दों की जांच होगी। जिसके बाद ऐसे नाम भी सामने आ सकते हैं जो अभी छिपे हुए हैं।

 
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40 साल की जिल्दों में साजिश के राज
एक तरफ एसआईटी आठ फर्जी बैनामों की जांच के लिए रिकाॅर्ड जुटा रही है। दूसरी तरफ 1972 से लेकर 2012 तक 40 साल की जिल्द बही में पन्ने फटे हुए हैं। फटे हुए पन्नों में गहरी साजिश का राज है। 1972 से 2012 तक जिल्द बही का ऑडिट हो जाए तो 300 से अधिक फर्जी बैनामों की कलई खुल सकती है। 40 साल में हुए बैनामों में फर्जीवाड़े की जांच के लिए एसआईटी इंडेक्स, स्याहा से लेकर रजिस्टर तक जब्त कर सकती है।

 

जिला निबंधक से सब रजिस्ट्रार तक जिम्मेदार
 केंद्रीय रिकाॅर्ड रूम का नोडल अधिकारी जिला निबंधक होता है। जिला निबंधक को नियमानुसार एक निश्चित अंतराल पर रिकॉर्ड का भौतिक सत्यापन करना होता है। रिकाॅर्ड के रखरखाव की व्यवस्था से लेकर सुरक्षा तक जिला निबंधक की जिम्मेदारी है। एक सब रजिस्ट्रार भी नियुक्त होता है। इनके अलावा केंद्रीय रिकाॅर्ड रूम में लिपिक, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी रहते हैं। ऐसे में जिल्द से रिकाॅर्ड गायब हो गया और अफसर इस मामले को दबाए रहे। जिला निबंधक से लेकर सब रजिस्ट्रार तक की लापरवाही सामने आई है।

 

फोटोस्टेट दुकानों पर पड़ी रहती थी जिल्द
रजिस्ट्री दफ्तर के रिकाॅर्ड रूम में जिल्द बैनामा, वसीयत व अन्य दस्तावेजों की नकल के लिए फोटोस्टेट दुकानों पर पड़ी रहती थीं। रिकाॅर्ड रूम में प्राइवेट कर्मचारी नकल के लिए जिल्द की फोटोस्टेट कराने जाते थे। रिकाॅर्ड रूम के पास ही तहसील परिसर में तीन फोटोस्टेट दुकानें हैं। जहां जिल्द से फोटोस्टेट होती थीं। फिर मुहर लगाकर फोटोस्टेट को सत्यापित किया जाता था। रिकाॅर्ड रूम में फोटोस्टेट मशीन तक नहीं है।
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