ऐसे भी क्या बदले शहर के 'सरकार': नवीन आगरा हुआ प्राचीन..., फव्वारे, तिरंगी लाइटें बंद; गायब हुई रौनक
शहर की सरकार के मुखिया क्या बदले, आगरा की रौनक ही छिन गई। तिरंगी लाइटों से जगमग पोल अब अंधेरे में हैं। वहीं फव्वारे भी बंद हो गए है।
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आगरा नगर निगम चुनाव परिणाम के बाद अब नवीन आगरा, प्राचीन सा हो गया है। पांच साल तक यह ग्रीन आगरा-नवीन आगरा स्लोगन से ओतप्रोत रहा। नवीन आगरा के सभी काम फिलहाल नगर निगम ने बंद कर दिए हैं। शहर के चौराहों पर लगे फव्वारे बंद हैं, इन पर लाइटिंग भी खराब पड़ी है। एमजी रोड, फतेहाबाद रोड, वीआईपी रोड, सिकंदरा-बोदला रोड पर लगाई गई तिरंगी एलईडी लाइटें भी खराब होने से बंद हो चुकी हैं।
बता दें कि जी-20 प्रतिनिधियों के आने के समय फव्वारों, तिरंगी लाइटों आदि को ठीक कराया गया था। बंद तिरंगी लाइटों वाले खंभों पर कई जगह नगर निगम ने विज्ञापन बोर्ड लगा दिए हैं। गमलों में लगे पौधे गर्मी में सूख गए। पांच साल में नगर निगम ने जो काम किए, उन्हें अब सहेजा नहीं जा रहा है।
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883 पाेल पर लगी थीं तिरंगी लाइटें
देशभक्ति की भावना के साथ रात में जगमगाते शहर के लिए 21 अगस्त 2019 को तिरंगी एलईडी लाइटों का लोकार्पण किया गया था। शहर में डेढ़ करोड़ की लागत से 883 विद्युत पोलों पर तिरंगी लाइटें लगाई गईं, जिनकी कुल लंबाई 32,672 मीटर है। अब यह बंद पड़ी हैं।
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10 लाख रुपये के फव्वारे हो गए बंद
नगर निगम ने दीवानी चौराहे पर 3.60 लाख रुपये से, छीपीटोला चौराहे पर 2.34 लाख रुपये और वाटरवर्क्स चौराहे पर भी साढ़े तीन लाख रुपये की लागत से फव्वारे लगवाए थे, जो अब बंद पड़े हैं। निजी कंपनी को 5 साल तक इनके रखरखाव का जिम्मा भी सौंपा गया था, लेकिन लगने के बाद से ही रंगीन लाइटों वाले फव्वारे बंद पड़े हैं।
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फव्वारे और लाइटें चलने ही चाहिए
पार्षद बंटी माहौर ने बताया कि नगर निगम का पैसा खर्च हुआ है तो मेयर कोई भी हो, फव्वारे और लाइटें चलने ही चाहिए। शहर में रात में इनसे अलग ही नजारा दिखता था। यह जनता की गाढ़ी कमाई के काम हैं, उपयोग में आने चाहिए।
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कोई काम शुरू नहीं किया
पूर्व पार्षद शिरोमणि सिंह ने बताया कि नए बोर्ड ने अब तक कोई काम शुरू नहीं किया। नई मेयर को एक महीने में किसी ने ना नाला सफाई में देखा, ना किसी अन्य समस्या पर। जनता का जो पैसा खर्च हुआ है, उन कामों को तो बरकरार रखा जाए।