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गजब का फर्जीवाड़ा: ईदगाह बस स्टैंड के सामने फर्जी पते पर खुल गया शराब ठेका; जांच रिपोर्ट का इंतजार
Wed, 10 Jun 2026 09:42 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Wed, 10 Jun 2026 09:42 AM IST
सार
ईदगाह बस स्टैंड के सामने शराब की कंपोजिट दुकान के आवंटन में फर्जी दस्तावेज और कूटरचित किरायानामे के आरोपों की जांच चार दिन बाद भी पूरी नहीं हो सकी है। शिकायतकर्ता ने आबकारी अधिकारियों और ठेकेदार पर मिलीभगत का आरोप लगाया है, जबकि प्रशासन जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की बात कह रहा है।
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शराब की कंपोजिट दुकान
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
आगरा के ईदगाह बस स्टैंड के सामने शराब की कंपोजिट दुकान के आवंटन में कूटरचित दस्तावेज की जांच चार दिन बाद भी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी है। ईदगाह बस स्टैंड के सामने खुली शराब की कंपोजिट दुकान का आवंटन नई आबकारी नीति के तहत हुआ था। ई-लॉटरी के माध्यम से डीएम की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने लाइसेंस जारी हुआ था।
बेलनगंज निवासी पदमचंद का आरोप है कि उसके किराएदार ने कूटरचित दस्तावेज, किरायानामा व गलत मकान नंबर से शराब ठेकेदार से अनुबंध किया। मामले में आबकारी अधिकारी, निरीक्षक व ठेकेदार पर मिलीभगत के आरोप लगाए। डीएम ने मामले की जांच के लिए मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में संयुक्त टीम बनाई थी।
टीम ने 24 घंटे में जांच के लिए मौका-मुआयना किया। नगर निगम सहित सभी संबंधित पक्षों के बयान लिए, लेकिन रिपोर्ट के आधार पर आगे कोई कार्रवाई नहीं हुई। डीएम मनीष बंसल का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। मामले में भूमि विवाद है। शिकायतकर्ता यदि संतुष्ट नहीं हैं तो न्यायालय जा सकते हैं।
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बेलनगंज निवासी पदमचंद का आरोप है कि उसके किराएदार ने कूटरचित दस्तावेज, किरायानामा व गलत मकान नंबर से शराब ठेकेदार से अनुबंध किया। मामले में आबकारी अधिकारी, निरीक्षक व ठेकेदार पर मिलीभगत के आरोप लगाए। डीएम ने मामले की जांच के लिए मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में संयुक्त टीम बनाई थी।
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टीम ने 24 घंटे में जांच के लिए मौका-मुआयना किया। नगर निगम सहित सभी संबंधित पक्षों के बयान लिए, लेकिन रिपोर्ट के आधार पर आगे कोई कार्रवाई नहीं हुई। डीएम मनीष बंसल का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। मामले में भूमि विवाद है। शिकायतकर्ता यदि संतुष्ट नहीं हैं तो न्यायालय जा सकते हैं।
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