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श्याम बिहारी को भारी पड़ी आगरा एफएसएल की अनदेखी, यहीं से खुला 'पीईटीएन' का सच
ब्यूरो/अमर उजाला आगरा
Updated Thu, 21 Dec 2017 11:15 AM IST
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आगरा फोरेंसिक लैब
- फोटो : अमर उजाला
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लखनऊ की विधि विज्ञान प्रयोगशाला के निदेशक डाक्टर श्याम बिहारी उपाध्याय को सफेद पाउडर मामले में आगरा लैब की रिपोर्ट की अनदेखी करना भारी पड़ गया। उन्हें मंगलवार को अनिवार्य सेवानिृत्त्ति दी गई। विधानसभा में मिले सफेद पाउडर को उन्होंने खतरनाक विस्फोटक पीईटीएन बता दिया था जबकि आगरा लैब के विस्फोटक अनुभाग की जांच में यह पाउडर ही पाया गया था। यह रिपोर्ट उनके पास जा चुकी थी। इसके बावजूद वह झूठ को सच साबित करने में लगे रहे।
इस मामले की जांच एनआईए को दिए जाने की तैयारी थी। शासन की भी नजर इस पर लगी थी कि पाउडर आखिर है क्या? यूपी में विस्फोटक की जांच के लिए सिर्फ आगरा विधि विज्ञान प्रयोगशाला अधिकृत है। सफेद पाउडर का सैंपल यहां भी भेजा गया था। इसके बावजूद श्याम बिहारी उपाध्याय कहते रहे कि विस्फोटक की जांच लखनऊ लैब में भी हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि आगरा लैब में सैंपल भेजा ही नहीं गया है।
आगरा लैब के विस्फोटक अनुभाग में पांच वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने सैंपल की जांच की थी। इनमें लैब के ज्वाइंट डायरेक्टर डाक्टर अतुल कुमार मित्तल भी शामिल थे। लैब के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि उन्होंने शासन के साथ ही उपाध्याय को भी बता दिया था कि पाउडर में कोई विस्फोटक नहीं है। इसके बावजूद श्याम बिहारी उपाध्याय अपनी बात पर अड़े रहे। शासन ने पहले उन्हें निलंबित किया। अब 50 पार के 54 अधिकारियों की स्क्रीनिंग के बाद उन्हें सेवानिवृत्ति दे दी गई।
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इस मामले की जांच एनआईए को दिए जाने की तैयारी थी। शासन की भी नजर इस पर लगी थी कि पाउडर आखिर है क्या? यूपी में विस्फोटक की जांच के लिए सिर्फ आगरा विधि विज्ञान प्रयोगशाला अधिकृत है। सफेद पाउडर का सैंपल यहां भी भेजा गया था। इसके बावजूद श्याम बिहारी उपाध्याय कहते रहे कि विस्फोटक की जांच लखनऊ लैब में भी हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि आगरा लैब में सैंपल भेजा ही नहीं गया है।
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आगरा लैब के विस्फोटक अनुभाग में पांच वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने सैंपल की जांच की थी। इनमें लैब के ज्वाइंट डायरेक्टर डाक्टर अतुल कुमार मित्तल भी शामिल थे। लैब के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि उन्होंने शासन के साथ ही उपाध्याय को भी बता दिया था कि पाउडर में कोई विस्फोटक नहीं है। इसके बावजूद श्याम बिहारी उपाध्याय अपनी बात पर अड़े रहे। शासन ने पहले उन्हें निलंबित किया। अब 50 पार के 54 अधिकारियों की स्क्रीनिंग के बाद उन्हें सेवानिवृत्ति दे दी गई।
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स्टिंग में चर्चित हुए थे राघवेंद्र यादव
डाक्टर श्याम बिहारी उपाध्याय के साथ रिटायर किए गए वैज्ञानिक राघवेन्द्र यादव आगरा विधि विज्ञान प्रयोगशाला में तैनात रहे हैं। वह सात साल पहले एक स्टिंग आपरेशन में फंसे थे। इसमें कुल पांच लोगों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। इनमें तीन अधिकारी थे और दो कर्मचारी। दो अधिकारी बर्खास्त कर दिए गए थे। राघवेन्द्र यादव को निलंबित किया गया था। उनकी भूमिका की जांच की जा रही थी। तभी प्रदेश में सरकार बदल गई। सपा सरकार आने पर उन्हें बहाल कर दिया गया था।
उपकरण खरीद की भी हो सकती है जांच
विधि विज्ञान प्रयोगशाला के सूत्रों का कहना है कि सपा सरकार के दौरान श्याम बिहारी उपाध्याय ने प्रदेश के हर रेंज में नई लैब खोलने पर जोर दिया। कई जगह लैब कागजों में खोल दी गई। करोड़ों रुपये के उपकरण भी खरीदे गए थे। इनका कोई इस्तेमाल नहीं हो रहा है। इनमें से एक करोड़ के उपकरण आगरा लैब को भी भेजे गए थे। यहां डीएनए अनुभाग खोलने के लिए भी उपकरण खरीदे गए थे। योगी सरकार इसकी जांच करा सकती है।