मथुरा में रथयात्रा महोत्सव: कृष्ण नगरी में रथ पर विराजमान होकर निकले भगवान जगन्नाथ, भक्ति में सराबोर होकर झूमे भक्त
श्रीकृष्ण की जन्मभूमि भगवान जगन्नाथ के जयकारों से गुंजायमान हो उठी। सोमवार को मथुरा और वृंदावन में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकाली गई। इस दौरान भक्त भक्ति में सराबोर दिखे।
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श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा सोमवार को भगवान जगन्नाथ के जयकारों से गुंजायमान हो गई। श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकाली गई। कीर्तन और आरती के साथ भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र ने सुंदर रथ में विराजमान होकर मंदिर परिसर में भ्रमण किया। दिव्य रथ में विराजमान भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए श्रद्धालु पहुंचे। मंदिर परिसर में संकीर्तन और नृत्य करते हुए भक्तों की टोली आनंदमय नजर आ रही थी। इस बार कोरोना संक्रमण को देखते हुए रथयात्रा का आयोजन मंदिर परिसर में ही किया गया।
उधर, श्रीबांकेबिहारी की नगरी में सोमवार को भगवान जगन्नाथ रथ पर सवार होकर भ्रमण को निकले। भ्राता बलभद्र और बहन सुभद्रा भी उनके साथ रहे। वृंदावन के प्रमुख देवालयों के ठाकुरजी ने भी इस दौरान भगवान जगन्नाथ के साथ भ्रमण किया। नगर में भ्रमण करते ठाकुरजी के दर्शन पाकर वृंदावनवासी आनंदित हो झूम उठे। विदेशी भक्तों के झुंड भी मग्न होकर नाचने लगे। आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वितीय तिथि को धर्मनगरी में भगवान जगन्नाथ का रथोत्सव उत्साह पूर्वक मनाया गया।
मंदिर की परंपरा के तहत यमुना किनारे स्थित जगन्नाथ मंदिर में प्रात:काल भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा व बलभद्रजी के श्री विग्रह का महाभिषेक दुग्ध, दही, शर्करा, मधु, इत्र, घृत, गंगाजल इत्यादि से मंत्रोच्चार के साथ किया गया। ठाकुरजी को छप्पन भोग निवेदित कर सुसज्जित भव्य फूलबंगला में विराजमान कराया गया। इस दौरान ठाकुरजी के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में भक्तजन मंदिर पहुंचे।
सायंकाल वैदिक रीति से श्रीविग्रह को तीन रथों पर विराजमान कराया गया। पूजन अर्चन के बाद भगवान जगन्नाथ, भ्राता बलभद्र और बहन सुभद्रा के रथ नगर भ्रमण के लिए निकले। ठाकुरजी के दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। बैंडबाजों व ढोल मृदंग की धुन पर भक्तजन झूमते चल रहे थे। नगर के अनेक मार्गों पर ठाकुरजी पर पुष्प वर्षा की गई।
इस दौरान वृंदावनवासियों के साथ विदेशी भक्त भी ठाकुरजी के दर्शन कर झूम उठे। विभिन्न मार्गों से गुजरते हुए रथयात्रा मंदिर परिसर पहुंची। प्राचीन चार संप्रदाय आश्रम, श्री राधामदनमोहन जी सहित कई प्रमुख मंदिरों के ठाकुरजी रथ पर सवार होकर यात्रा में शामिल होते हुए प्राचीन ज्ञानगुदड़ी की परिक्रमा कर पुन: मंदिर पहुंचे। यहां आतिशबाजी की गई।