{"_id":"5cf0ecc5bdec22073a5fe33b","slug":"fodder-scam-on-name-of-gauvansh-in-agra","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"गोवंश के चारे का पैसा ठिकाने लगा रहे पशुपालन विभाग के कर्मचारी, ऐसे हो रहा 'खेल'","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गोवंश के चारे का पैसा ठिकाने लगा रहे पशुपालन विभाग के कर्मचारी, ऐसे हो रहा 'खेल'
Fri, 31 May 2019 02:28 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Fri, 31 May 2019 02:28 PM IST
विज्ञापन
गाय के कान पर लगा पशुपालन विभाग का टैग
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तर प्रदेश सरकार खुले में घूमने वाले गोवंश के संवर्धन और संरक्षण के लिए करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रही है, लेकिन पशु पालन विभाग सरकार की मंशा पर पानी फेरने में लगा हुआ है।
घुमंतू गायों की टैगिंग करने के बाद उन्हें गोशाला के रिकार्ड में दर्शाया जाता है, लेकिन कुछ दिनों बाद ही शहर में फिर से छोड़ दिया जा रहा है। गोशाला से छोड़ी गईं कई गायें शहर में देखी जा रही हैं।
आगरा में गोवंश के लिए नए आश्रय स्थल बनाए जा रहे हैं। जिले की सबसे बड़ी गोशाला खेरागढ़ में बनाई जा रही है। इसके अलावा पशु पालन विभाग द्वारा संचालित आधा दर्जन से अधिक गोशालाएं हैं।
विज्ञापन
सिकंदरा के गांव बाईंपुर में नंदीशाला में सांड़ों को रखा जा रहा है, जबकि कान्हा गोशाला में 200 से अधिक गायें हैं। यहां तीसरी गोशाला बनाने का काम तेज गति से चल रहा है।
विज्ञापन
घुमंतू गायों की टैगिंग करने के बाद उन्हें गोशाला के रिकार्ड में दर्शाया जाता है, लेकिन कुछ दिनों बाद ही शहर में फिर से छोड़ दिया जा रहा है। गोशाला से छोड़ी गईं कई गायें शहर में देखी जा रही हैं।
विज्ञापन
आगरा में गोवंश के लिए नए आश्रय स्थल बनाए जा रहे हैं। जिले की सबसे बड़ी गोशाला खेरागढ़ में बनाई जा रही है। इसके अलावा पशु पालन विभाग द्वारा संचालित आधा दर्जन से अधिक गोशालाएं हैं।
विज्ञापन
सिकंदरा के गांव बाईंपुर में नंदीशाला में सांड़ों को रखा जा रहा है, जबकि कान्हा गोशाला में 200 से अधिक गायें हैं। यहां तीसरी गोशाला बनाने का काम तेज गति से चल रहा है।
एक गोवंश पर प्रतिदिन मिलती है 30 रुपये
गोवंश के लिए सरकार द्वारा प्रतिदिन 30 रुपये के हिसाब से चारे का भुगतान किया जा रहा है। स्वयंसेवी संगठन भी पशु पालन विभाग की मदद कर रहे हैं। इसके बावजूद पशु पालन विभाग के कर्मचारी खेल करने में लगे हुए हैं।
गायों को गोशाला में टैग नंबर डालकर कई दिन तक रखा जाता है। गोशाला के रिकार्ड में दर्ज करने के बाद उन्हें खुले में छोड़ दिया जाता है। न्यू राजा मंडी में पशु पालन विभाग के टैग लगी हुईं दो गायों को देखा गया।
इसी तरह मलपुरा के धनौली में भी टैग लगी हुई एक गाय को देखा गया था। इससे साफ है कि गोशालाओं में रखी जाने वाली गायों की देखभाल के नाम पर बजट को खपाने का खेल चल रहा है।
गो संरक्षण को हो रहे कार्य
- गायों के लिए हर ब्लाक में गोशालाएं बनाने का काम।
- गो आश्रय स्थलों में टिनशेड, पानी, चारे का इंतजाम।
- दो साल के भीतर घुमंतू गोवंश को निजी गोशालाओं में भी भेजा।
- कई मदों से गोशालाओं के लिए बजट जुटाया जा रहा है।
- गोशालाओं का अधिकारी नियमित निरीक्षण कर कर रहे हैं।
गायों को गोशाला में टैग नंबर डालकर कई दिन तक रखा जाता है। गोशाला के रिकार्ड में दर्ज करने के बाद उन्हें खुले में छोड़ दिया जाता है। न्यू राजा मंडी में पशु पालन विभाग के टैग लगी हुईं दो गायों को देखा गया।
इसी तरह मलपुरा के धनौली में भी टैग लगी हुई एक गाय को देखा गया था। इससे साफ है कि गोशालाओं में रखी जाने वाली गायों की देखभाल के नाम पर बजट को खपाने का खेल चल रहा है।
गो संरक्षण को हो रहे कार्य
- गायों के लिए हर ब्लाक में गोशालाएं बनाने का काम।
- गो आश्रय स्थलों में टिनशेड, पानी, चारे का इंतजाम।
- दो साल के भीतर घुमंतू गोवंश को निजी गोशालाओं में भी भेजा।
- कई मदों से गोशालाओं के लिए बजट जुटाया जा रहा है।
- गोशालाओं का अधिकारी नियमित निरीक्षण कर कर रहे हैं।