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गंगा के जलस्तर में और आई 15 सेंटीमीटर की कमी बनने लगी राहत की उम्मीद
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कासगंज के नगला मोहन में उतरता बाढ़ का पानी
- फोटो : KASGANJ
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कासगंज । तीन दिन से लगातार गंगा के जलस्तर में कमी आ रही है। बृहस्पतिवार को जलस्तर 15 सेंटीमीटर और कम होकर 163.35 हो गया है। इससे अब ग्रामीणों को बाढ़ से राहत की उम्मीद लग रही है, लेकिन स्थिति सामान्य होने में अभी कुछ दिन और लग सकते हैं। क्योंकि निचले इलाकों और खेतों में पानी भरा है।
खेतों और बस्तियों के निचले इलाकों में पानी ना निकलने के कारण किसान परेशान हैं। पशुओं के लिए हरे चारे की परेशानी लगातार बनी हुई है। खेतों में पानी होने के कारण हरा चारा पशुओं को नहीं मिल पा रहा। किसान जगह-जगह खेतों में खंदी बनाकर निचले इलाके की ओर पानी निकालने की कोशिशों में भी जुटे हैं। लेकिन हर जगह पानी की निकासी के लिए रास्ते नहीं मिल पा रहे।
अभी पानी की निकासी होने में और समय लग सकता है। लगातार खेतों में पानी भरा होने के कारण मक्का बाजरा सहित अन्य फसलें बर्बाद हो चुकी है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में संक्रामक रोगों का खतरा भी बढ़ रहा है लोगों को खांसी बुखार आदि की समस्या भी हो रही है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार जांच कर रही हैं। ग्रामीणों को सबसे ज्यादा चिंता फसलों की बर्बादी को लेकर है।
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जब बाढ़ का पानी निकलेगा उसके बाद ही क्षति का आकलन शुरू होगा और किसानों को आर्थिक मुआवजा मिल सकेगा। ग्रामीण सूबेदार ने बताया कि गंगा की बाढ़ जब से आई है तब से कुछ भी कामकाज नहीं हो पा रहा खेत में पानी भरने से फसल बर्बाद हो गई है। शासन प्रशासन को शीघ्र ही पीड़ित किसानों को मुआवजा देना चाहिए जिससे वह अपना गुजारा कर सके।
जलस्तर का लेखा जोखा
-71400 क्यूसेक पानी हरिद्वार बैराज से छोड़ा गया।
- 74773 क्यूसेक पानी बिजनौर से छोड़ा गया।
- 90858 क्यूसेक पानी नरौरा से छोड़ा गया।
- गंगा के जलस्तर में लगातार कमी आ रही है। बृहस्पतिवार को 15 सेंटीमीटर जलस्तर और कम हुआ है हालात सामान्य होते जा रहे हैं जिन गांव की आबादी में पानी भरा था वहां से पानी की निकासी भी होने लगी है जल्दी राहत लौट आएगी। पानी निकलने के बाद फसलों की क्षति का आकलन कराया जाएगा और नियमानुसार आर्थिक मदद की जाएगी। - अजय कुमार श्रीवास्तव, अपर जिलाधिकारी।
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खेतों और बस्तियों के निचले इलाकों में पानी ना निकलने के कारण किसान परेशान हैं। पशुओं के लिए हरे चारे की परेशानी लगातार बनी हुई है। खेतों में पानी होने के कारण हरा चारा पशुओं को नहीं मिल पा रहा। किसान जगह-जगह खेतों में खंदी बनाकर निचले इलाके की ओर पानी निकालने की कोशिशों में भी जुटे हैं। लेकिन हर जगह पानी की निकासी के लिए रास्ते नहीं मिल पा रहे।
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अभी पानी की निकासी होने में और समय लग सकता है। लगातार खेतों में पानी भरा होने के कारण मक्का बाजरा सहित अन्य फसलें बर्बाद हो चुकी है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में संक्रामक रोगों का खतरा भी बढ़ रहा है लोगों को खांसी बुखार आदि की समस्या भी हो रही है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार जांच कर रही हैं। ग्रामीणों को सबसे ज्यादा चिंता फसलों की बर्बादी को लेकर है।
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जब बाढ़ का पानी निकलेगा उसके बाद ही क्षति का आकलन शुरू होगा और किसानों को आर्थिक मुआवजा मिल सकेगा। ग्रामीण सूबेदार ने बताया कि गंगा की बाढ़ जब से आई है तब से कुछ भी कामकाज नहीं हो पा रहा खेत में पानी भरने से फसल बर्बाद हो गई है। शासन प्रशासन को शीघ्र ही पीड़ित किसानों को मुआवजा देना चाहिए जिससे वह अपना गुजारा कर सके।
जलस्तर का लेखा जोखा
-71400 क्यूसेक पानी हरिद्वार बैराज से छोड़ा गया।
- 74773 क्यूसेक पानी बिजनौर से छोड़ा गया।
- 90858 क्यूसेक पानी नरौरा से छोड़ा गया।
- गंगा के जलस्तर में लगातार कमी आ रही है। बृहस्पतिवार को 15 सेंटीमीटर जलस्तर और कम हुआ है हालात सामान्य होते जा रहे हैं जिन गांव की आबादी में पानी भरा था वहां से पानी की निकासी भी होने लगी है जल्दी राहत लौट आएगी। पानी निकलने के बाद फसलों की क्षति का आकलन कराया जाएगा और नियमानुसार आर्थिक मदद की जाएगी। - अजय कुमार श्रीवास्तव, अपर जिलाधिकारी।