Mainpuri: कोल्ड डायरिया का प्रकोप, एक सप्ताह में दो बच्चों सहित पांच की मौत, हर दिन अस्पताल पहुंच रहे 30 मरीज
मैनपुरी में सर्दी के बीच कोल्ड डायरिया का प्रकोप बढ़ गया। दिन ब दिन इसके मरीज बढ़ रहे हैं। पिछले सात दिन के अंदर अलग-अलग इलाकों के पांच मरीजों की कोल्ड डायरिया की चपेट में आने से मौत हो चुकी है। इनमें दो बच्चे शामिल हैं।
विस्तार
जिले में एक सप्ताह से कोल्ड डायरिया के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। जिला अस्पताल के रिकार्ड के मुताबिक पिछले सात कार्य दिवसों में जिला अस्पताल में कोल्ड डायरिया से पीड़ित 170 मरीजों को प्राथमिक उपचार दिया गया। गंभीर हालत देखते हुए 30 मरीज भर्ती कराए गए। 11 मरीजों को गंभीर हालत में जिला अस्पताल से मेडिकल कॉलेज सैफई रेफर किया गया।
अस्पताल की ओपीडी के अनुसार प्रतिदिन 20 से 30 मरीज कोल्ड डायरिया की चपेट में आने के बाद जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं। इनमें बच्चों के साथ ही बुजुर्ग भी शामिल हैं। युवा भी कोल्ड डायरिया का शिकार हो रहे हैं। सरकारी अस्पतालों के साथ निजी अस्पतालों में भी कोल्ड डायरिया के मरीजों की तादाद बढ़ रही है।
क्या है कोल्ड डायरिया
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. डीके शाक्य बताते हैं कि इन दिनों बढ़ती ठंड के बीच बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक को कोल्ड डायरिया ने अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया है। आमतौर पर गर्मी के दिनों में होने वाले डायरिया जैसे ही इसके भी लक्षण होते हैं। इन दिनों बैक्टीरियल इंफेक्शन और खान-पान की लापरवाही के चलते कोल्ड डायरिया के मरीजों की संख्या बढ़ी है। जिला अस्पताल में कोल्ड डायरिया से पीड़ित मरीज आए दिन भर्ती हो रहे हैं।
ये हैं कारण
- घर से बाहर का खाना खाना।
- बासी भोजन खाना।
- ठंड के मौसम में कम पानी पीना।
- बैक्टीरियल इंफेक्शन।
- ठंड के मौसम में ऊनी कपड़े पहनने में लापरवाही।
ऐसे करें बचाव
- अच्छी तरह गर्म कपड़े पहनें।
- शरीर में पानी की कमी न होने दें।
- ठंडा पानी न पीएं।
- हल्के गुनगुने पानी का सेवन करें।
- बासी चीजें खाने से बचें।
- सर्दी-जुकाम या बुखार होने पर हैवी डोज की दवाइयां न लें।
सीएमओ डॉ. पीपी सिंह ने बताया कि सर्दी के बीच कोल्ड डायरिया के मरीज बढ़े हैं। मरीजों को कोल्ड डायरिया से बचाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। कोल्ड डायरिया से बचाव के लिए टीके भी लगाए जा रहे हैं। जो लोग समय से अस्पताल पहुंच जाते, उन्हें खतरे से बचाया जा रहा है। जो लोग अस्पताल नहीं पहुंचते, उनका जीवन ही संकट में है। इसलिए जरा भी लक्षण दिखने पर तुरंत उपचार लें।