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सट्टेबाजी केस में पुलिस की जांच पर उठे सवाल: साक्ष्य-गवाही कमजोर, आईपीएल सट्टे के पांच आरोपी बरी

Tue, 06 Oct 2026 02:20 PM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Tue, 06 Oct 2026 02:20 PM IST
सार

आईपीएल सट्टेबाजी और फर्जी आधार कार्ड से जुड़े मामले में ठोस साक्ष्य और मजबूत गवाही नहीं मिलने पर सीजेएम शारिब अली ने पांच आरोपियों को बरी कर दिया। अदालत ने पुलिस की विवेचना में कई खामियां भी दर्ज कीं।
 

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Five Acquitted in IPL Betting Case as Court Finds Weak Evidence and Investigation Lapses
court new - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आईपीएल मैचों में सट्टे की खाई-बाड़ी और फर्जी आधार कार्ड सहित अन्य आरोपों का मामला अदालत में टिक नहीं सका। ठोस साक्ष्य न होने और कमजोर गवाही की वजह से सीजेएम शारिब अली ने पांच आरोपियों को बरी करने के आदेश दिए।
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बरी किए गए आरोपी संजय जैन उर्फ संजय कालिया, टोनी सिंधी उर्फ हरीश कुमार, मनीष मयानी उर्फ पंकज चावला, राजीव चोपड़ा और संदीप गुलाटी हैं। थाना सिकंदरा में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार 7 अप्रैल, 2023 को तत्कालीन थाना प्रभारी आनंद कुमार साही ने तहरीर दी थी। बताया कि उनकी टीम ने शास्त्रीपुरम स्थित राजीव चोपड़ा के मकान में छापा मारा, वहां राजीव चोपड़ा, संदीप गुलाटी को हिरासत में लिया गया।
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आरोपियों के कब्जे से नकदी, मोबाइल, सट्टे से संबंधित लेखा-जोखा और आधार कार्ड बरामद किया गया। उनसे पूछताछ के बाद तीन अन्य आरोपी नामजद किए गए। अभियोजन पक्ष की तरफ से अदालत में तत्कालीन थाना प्रभारी सहित पांच पुलिसकर्मी गवाही के लिए पेश किए गए। अदालत ने माना कि गिरफ्तारी व बरामदगी के समय कोई स्वतंत्र गवाह मौजूद नहीं था। विवेचक आधार कार्ड के संबंध में भी ठोस साक्ष्य संकलित नहीं कर सका।
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अदालत में बरामदगी पर उठे सवाल
अदालत ने पाया कि बरामद आधार कार्ड को वैज्ञानिक अथवा दस्तावेजी सत्यापन के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला नहीं भेजा गया। सट्टा-पर्चियों का भी प्रयोगशाला परीक्षण नहीं कराया गया। बरामदगी की वीडियोग्राफी या फोटोग्राफी नहीं कराई। यहां तक कि घटनास्थल का नक्शा नजरी भी कमरे के अंदर जाकर तैयार नहीं की गई। संजय जैन, टोनी सिंधी और मनीष मयानी घटनास्थल से गिरफ्तार नहीं हुए थे। अदालत ने कहा कि इनके खिलाफ कोई स्वतंत्र प्रत्यक्षदर्शी अथवा स्वतंत्र पुष्टिकारक साक्ष्य उपलब्ध नहीं है। इनके खिलाफ अभियोजन की कहानी मुख्य रूप से राजीव चोपड़ा और संदीप गुलाटी के पुलिस अभिरक्षा में दिए कथित बयानों पर आधारित है।
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