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कालीनदी में मरी हजारों की संख्या में मछलियां
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कासगंज की काली नदी में मरी मछलियां
- फोटो : KASGANJ
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कासगंज। काली नदी में प्रदूषण के चलते रविवार को हजारों की संख्या में मछलियां मर गईं। मृत मछलियों को देखकर नदी किनारे बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्रित हो गए। लोगों ने काली नदी में बढ़ते प्रदूषण को लेकर आक्रोश जताया। माना जा रहा है कि पानी में ऑक्सीजन की कमी के कारण मछलियों की मौत हुई।
मुजफ्फरनगर के अतवाड़ा से शुरू होने वाली काली नदी मेरठ, गाजियाबाद, बुलंदशहर, अलीगढ़, कासगंज होते हुए कन्नौज तक आती है। कन्नौज में आकर काली नदी गंगा में मिल जाती है। रविवार को जखेरा महेशपुर स्थित नदी में हजारों की संख्या मछलियां मृत हालत में बहती मिलीं। जानकारी पर जखेरा, महेशपुर, नरायनी, मुबारिकपुर सहित तमाम गांव के लोग मौके पर एकत्रित हो गए। ग्रामीणों ने मृत मछलियों को देखकर आक्रोश जताया।
इधर, शहर के समीपवर्ती गांव अहरौली में भी शनिवार शाम मृत मछलियों को लेकर लोगों को जानकारी मिली तो वे नदी की ओर पहुंचे। लोगों का कहना है कि मुजफ्फरनगर, मेरठ, गाजियाबाद, बुलंदशहर के इलाके में तमाम उद्योगों का रसायनयुक्त पानी नदी में गिरता है और तमाम शहरों का सीवेज भी नदी में आता है। इससे नदी का पानी प्रदूषण युक्त हो चुका है। मछलियां पीछे से ही मृत हालत में बहती आ रही हैं। माना जा रहा है कि रसायनयुक्त पानी के कारण नदी के पानी में ऑक्सीजन समाप्त हो गई और मछलियों की मौत हो गई। अहरौली की ग्राम प्रधान राजवती ने कहा कि नदी में काफी प्रदूषण है। हजारों मृत मछलियां पानी में बहती जा रही हैं।
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नदी के पानी में ऑक्सीजन शून्य
पूर्व में केंद्रीय भूजल बोर्ड की रिपोर्ट में भी नदी के पानी में ऑक्सीजन की मात्रा शून्य पाई गई थी। विभिन्न औद्योगिक इकाइयों का रसायनिक पानी नदी में गिरने के कारण पानी में पारा, मैग्नीज, लोहा, और तमाम तत्व पाए गए, जो जलीय जीवों के लिए खतरनाक हैं।
2018 में एनजीटी के निर्देश पर लिए थे सैंपल
सितंबर 2018 में एनजीटी के निर्देश पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने काली नदी के पानी के कई स्थान पर सैंपल लिए थे। जांच में पानी की गुणवत्ता काफी खराब मिली थी। नमामि गंगे योजना से नदी के दिन बहुरने की उम्मीद थी, लेकिन इस योजना के बाद भी काली नदी के दिन नहीं बहुर सके।
वर्जन-
- कालीनदी का पानी पहले से ही प्रदूषित है। बारिश न होने और गर्मी बढ़ने से पानी में ऑक्सीजन की मात्रा कम हो गई। इससे मछलियां मरी हैं। अरुण कुमार, अधिशासी अभियंता, सिंचाई।
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मुजफ्फरनगर के अतवाड़ा से शुरू होने वाली काली नदी मेरठ, गाजियाबाद, बुलंदशहर, अलीगढ़, कासगंज होते हुए कन्नौज तक आती है। कन्नौज में आकर काली नदी गंगा में मिल जाती है। रविवार को जखेरा महेशपुर स्थित नदी में हजारों की संख्या मछलियां मृत हालत में बहती मिलीं। जानकारी पर जखेरा, महेशपुर, नरायनी, मुबारिकपुर सहित तमाम गांव के लोग मौके पर एकत्रित हो गए। ग्रामीणों ने मृत मछलियों को देखकर आक्रोश जताया।
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इधर, शहर के समीपवर्ती गांव अहरौली में भी शनिवार शाम मृत मछलियों को लेकर लोगों को जानकारी मिली तो वे नदी की ओर पहुंचे। लोगों का कहना है कि मुजफ्फरनगर, मेरठ, गाजियाबाद, बुलंदशहर के इलाके में तमाम उद्योगों का रसायनयुक्त पानी नदी में गिरता है और तमाम शहरों का सीवेज भी नदी में आता है। इससे नदी का पानी प्रदूषण युक्त हो चुका है। मछलियां पीछे से ही मृत हालत में बहती आ रही हैं। माना जा रहा है कि रसायनयुक्त पानी के कारण नदी के पानी में ऑक्सीजन समाप्त हो गई और मछलियों की मौत हो गई। अहरौली की ग्राम प्रधान राजवती ने कहा कि नदी में काफी प्रदूषण है। हजारों मृत मछलियां पानी में बहती जा रही हैं।
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नदी के पानी में ऑक्सीजन शून्य
पूर्व में केंद्रीय भूजल बोर्ड की रिपोर्ट में भी नदी के पानी में ऑक्सीजन की मात्रा शून्य पाई गई थी। विभिन्न औद्योगिक इकाइयों का रसायनिक पानी नदी में गिरने के कारण पानी में पारा, मैग्नीज, लोहा, और तमाम तत्व पाए गए, जो जलीय जीवों के लिए खतरनाक हैं।
2018 में एनजीटी के निर्देश पर लिए थे सैंपल
सितंबर 2018 में एनजीटी के निर्देश पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने काली नदी के पानी के कई स्थान पर सैंपल लिए थे। जांच में पानी की गुणवत्ता काफी खराब मिली थी। नमामि गंगे योजना से नदी के दिन बहुरने की उम्मीद थी, लेकिन इस योजना के बाद भी काली नदी के दिन नहीं बहुर सके।
वर्जन-
- कालीनदी का पानी पहले से ही प्रदूषित है। बारिश न होने और गर्मी बढ़ने से पानी में ऑक्सीजन की मात्रा कम हो गई। इससे मछलियां मरी हैं। अरुण कुमार, अधिशासी अभियंता, सिंचाई।