फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   Fir Will Lodge Against University Contrat Clerck In Case Of Fires Marksheets

डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालयः अंकतालिकाएं जलाने में कर्मचारी के खिलाफ केस दर्ज, बड़े रैकेट की आशंका

Thu, 07 Jan 2021 01:30 PM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: Abhishek Saxena Updated Thu, 07 Jan 2021 01:30 PM IST
विज्ञापन
Fir Will Lodge Against University Contrat Clerck In Case Of Fires Marksheets
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय - फोटो : अमर उजाला
आगरा डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय परिसर में संविदा कर्मचारी ने साजिश के तहत अंकतालिकाओं सहित अन्य दस्तावेजों को जलाया था। जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में कर्मचारी को दोषी पाया है। उसके फर्जी अंकतालिका रैकेट से जुड़े होने की बात कही गई है। इस मामले में एसएसपी बबलू कुमार को मुकदमा दर्ज कराने के लिए तहरीर दी गई थी। एसएसपी के आदेश पर थाना हरीपर्वत में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।  
विज्ञापन



(ले. कर्नल) अंजनी कुमार मिश्र (से. नि.) ने एसएसपी बबलू कुमार को तहरीर दी। विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग में संविदा पर तृतीय श्रेणी कर्मचारी वीरेश कुमार कार्यरत हैं। 12 दिसंबर 2020 को दोपहर तकरीबन डेढ़ बजे इतिहास विभाग के पीछे एवं आईएसएस पुस्तकालय के बीच में बड़ी संख्या में अंकतालिकाएं, सरकारी एवं अन्य गोपनीय अभिलेखों को जलाते हुए वीरेश कुमार को अन्य शिक्षकों ने पकड़ लिया। 
विज्ञापन



इस पर विश्वविद्यालय प्रशासन के अधिकारी पहुंच गए। उन्होंने अधजली अंकतालिकाएं, एक मूल उपाधि, 66 रिक्त अंकतालिकाएं, फोटो कॉपी अंकतालिकाएं, चालान का बंडल, लैपटॉप, चार्जर और खराब स्थिति में बैग बरामद किया था। आरोप है कि वीरेश कुमार ने साजिश के तहत छात्रों की अंकतालिकाएं और अन्य दस्तावेजों को जलाया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

थाना हरीपर्वत के प्रभारी निरीक्षक अजय कौशल ने बताया कि मामले में सरकारी दस्तावेज नष्ट करने, दुरुपयोग और धोखाधड़ी, साजिश की धारा में मुकदमा दर्ज किया गया है। मामले में विवेचना शुरू कर दी गई। विवि. के फर्जी अंकपत्र बनाने वाला रैकेट लंबे समय से सक्रिय है। इस रैकेट ने 2004-05 सत्र की बीएड की 4000 से ज्यादा फर्जी अंकतालिकाएं बनाईं थीं। 


जांच समिति ने भी पाया था दोषी
इस प्रकरण की जांच विश्वविद्यालय की जांच समिति ने की थी। जांच समिति ने 12 दिसंबर 2020 को अपनी रिपोर्ट दी र्थी। इसमें कर्मचारी को दोषी पाया गया है। उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी की जा रही है। 

फर्जी बनाने के लिए रखी गई थी अंकतालिकाएं 
विश्वविद्यालय प्रशासन ने जांच में माना है कि 66 रिक्त अमुद्रित अंकतालिकाएं मिली थीं। कर्मचारी के पास से यह मिलना गंभीर अपराध है। वह फर्जी अंकतालिकाएं और कूटरचित अभिलेखों को तैयार करने वाले किसी रैकेट से जुड़ा हुआ है। खाली अंकतालिकाएं रखने के लिए कर्मचारी को कभी अधिकृत भी नहीं किया गया था। यह भी आशंका है कि स्टोर मुद्रण स्थल से उसके अंकतालिकाओं को मिलीभगत करके फर्जी अंकतालिकाएं तैयार करने के उद्देश्य से धोखाधड़ी करके प्राप्त की गई हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed