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Agra News: आगरा काॅलेज के पूर्व प्राचार्य डाॅ. अनुराग शुक्ला की मुश्किल बढ़ी, पुलिस ने दर्ज की एफआईआर
Tue, 25 Nov 2025 11:57 PM IST
अरुन पाराशर
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Published by: अरुन पाराशर
Updated Tue, 25 Nov 2025 11:57 PM IST
सार
कोर्ट के आदेश पर आगरा काॅलेज के प्राचार्य डाॅ. सीके गाैतम ने पूर्व प्राचार्य पर एफआईआर दर्ज कराई है। इसमें जानबूझकर प्रभार हस्तांतरण न करने, चार्ज हैंड ओवर में बाधा उत्पन्न करने, शासकीय आदेशों की अवहेलना करने जैसे आरोप लगाए गए हैं।
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- फोटो : फाइल फोटो
विस्तार
आगरा के थाना लोहामंडी में आगरा काॅलेज के प्राचार्य डाॅ. सीके गाैतम ने कोर्ट के आदेश पर मुकदमा दर्ज कराया है। इसमें पूर्व प्राचार्य डाॅ. अनुराग शुक्ला पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कहा है कि पूर्व प्राचार्य ने पद से हटने के बाद हस्तांतरण की प्रक्रिया का पालन नहीं किया। दस्तावेजों का गबन कर लिया। सरकारी अलमारियों की चाबियां नहीं उपलब्ध कराईं। समिति की जांच के बाद भी सहयोग नहीं किया। पुलिस से शिकायत करने पर सुनवाई नहीं हुई। मामले में पुलिस का कहना है कि साक्ष्य संकलन किया जा रहा है। इसके आधार पर ही कार्रवाई की जाएगी।
डाॅ. सीके गाैतम ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया था। इसमें कहा कि वर्ष 2021 में डॉ. अनुराग शुक्ला प्राचार्य थे। मगर शिक्षा सेवा और चयन आयोग ने उनका चयन शून्य घोषित कर दिया था। उन पर कूटरचित दस्तावेज से पद पाने के आरोप लगे थे। 29 नवंबर 2024 को निदेशक, उच्च शिक्षा प्रयागराज ने उन्हें पदमुक्त करने की संस्तुति की थी। कॉलेज प्रबंधन ने वरिष्ठता के आधार पर पहले डॉ. आरके श्रीवास्तव को कार्यवाहक प्राचार्य नियुक्त किया। 21 मार्च 2025 को चयनित प्राचार्य के रूप में उन्हें (डॉ. सीके गौतम) नियुक्त किया।
प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि मुक्त होने के बावजूद डॉ. अनुराग शुक्ला ने प्रभार हस्तांतरण में सहयोग नहीं किया। समिति के निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि कार्यालयों की कई अलमारियों, रिकॉर्ड, प्रत्याभूतियों का प्रभार व प्राचार्य आवास का प्रभार उन्हें नहीं प्रदान किया। इससे प्रशासकीय कार्यों में बाधा उत्पन्न हो रही थी। इस पर मंडलायुक्त एवं प्रबंध समिति के अध्यक्ष ने एक समिति का गठन किया। इसके बाद सभी कार्रवाई पूरी कराई गई।
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डाॅ. अनुराग शुक्ला की निजी सामग्रियों को आवास से खाली कराते हुए रिसीवर नियुक्त कर दिया गया। पूर्व प्राचार्य डाॅ. अनुराग शुक्ला के प्रतापगढ़ स्थित आवास पर पत्र भी भेजे गए। मगर पत्र, ईमेल और पुलिस को सूचित कर प्रभार दिलाए जाने का अनुरोध किया। मगर वो नहीं आए। थाना लोहामंडी पुलिस ने भी कोई कार्रवाई नहीं की। मामले में कोर्ट के आदेश पर मंगलवार को थाना लोहामंडी में प्राथमिकी दर्ज की गई।
डीसीपी सिटी अली अब्बास ने बताया कि जानबूझकर प्रभार हस्तांतरण न करने, चार्ज हैंड ओवर में बाधा उत्पन्न करने, शासकीय आदेशों की अवहेलना करने, विश्वास का आपराधिक उल्लंघन करने, लोकसेवक के रूप में संपत्ति का गबन, अलमारियों को तोड़ने सहित अन्य आरोप लगाए गए हैं। मामले में साक्ष्य संकलन किया जाएगा। इसके बाद कार्रवाई होगी। इस संबंध में डाॅ. अनुराग शुक्ला से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन उनका मोबाइल स्विच ऑफ आया।
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डाॅ. सीके गाैतम ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया था। इसमें कहा कि वर्ष 2021 में डॉ. अनुराग शुक्ला प्राचार्य थे। मगर शिक्षा सेवा और चयन आयोग ने उनका चयन शून्य घोषित कर दिया था। उन पर कूटरचित दस्तावेज से पद पाने के आरोप लगे थे। 29 नवंबर 2024 को निदेशक, उच्च शिक्षा प्रयागराज ने उन्हें पदमुक्त करने की संस्तुति की थी। कॉलेज प्रबंधन ने वरिष्ठता के आधार पर पहले डॉ. आरके श्रीवास्तव को कार्यवाहक प्राचार्य नियुक्त किया। 21 मार्च 2025 को चयनित प्राचार्य के रूप में उन्हें (डॉ. सीके गौतम) नियुक्त किया।
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प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि मुक्त होने के बावजूद डॉ. अनुराग शुक्ला ने प्रभार हस्तांतरण में सहयोग नहीं किया। समिति के निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि कार्यालयों की कई अलमारियों, रिकॉर्ड, प्रत्याभूतियों का प्रभार व प्राचार्य आवास का प्रभार उन्हें नहीं प्रदान किया। इससे प्रशासकीय कार्यों में बाधा उत्पन्न हो रही थी। इस पर मंडलायुक्त एवं प्रबंध समिति के अध्यक्ष ने एक समिति का गठन किया। इसके बाद सभी कार्रवाई पूरी कराई गई।
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डाॅ. अनुराग शुक्ला की निजी सामग्रियों को आवास से खाली कराते हुए रिसीवर नियुक्त कर दिया गया। पूर्व प्राचार्य डाॅ. अनुराग शुक्ला के प्रतापगढ़ स्थित आवास पर पत्र भी भेजे गए। मगर पत्र, ईमेल और पुलिस को सूचित कर प्रभार दिलाए जाने का अनुरोध किया। मगर वो नहीं आए। थाना लोहामंडी पुलिस ने भी कोई कार्रवाई नहीं की। मामले में कोर्ट के आदेश पर मंगलवार को थाना लोहामंडी में प्राथमिकी दर्ज की गई।
डीसीपी सिटी अली अब्बास ने बताया कि जानबूझकर प्रभार हस्तांतरण न करने, चार्ज हैंड ओवर में बाधा उत्पन्न करने, शासकीय आदेशों की अवहेलना करने, विश्वास का आपराधिक उल्लंघन करने, लोकसेवक के रूप में संपत्ति का गबन, अलमारियों को तोड़ने सहित अन्य आरोप लगाए गए हैं। मामले में साक्ष्य संकलन किया जाएगा। इसके बाद कार्रवाई होगी। इस संबंध में डाॅ. अनुराग शुक्ला से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन उनका मोबाइल स्विच ऑफ आया।