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फिरोजाबाद मेडिकल काॅलेज में बवाल: युवक की मौत पर हंगामा, डॉक्टर और तीमारदारों में मारपीट; हड़ताल का एलान
Wed, 30 Sep 2026 10:59 PM IST
Arun Parashar
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
Published by: Arun Parashar
Updated Wed, 30 Sep 2026 10:59 PM IST
सार
यूपी के फिरोजाबाद के सरकारी मेडिकल कॉलेज के ट्रॉमा सेंटर में बुधवार रात युवक की माैत पर बवाल हो गया। तीमारदार और परिजनों में जमकर मारपीट हुई। कई थानों का पुलिस फोर्स माैके पर पहुंच गया। गुस्साए डाॅक्टरों ने हड़ताल का ऐलान कर दिया।
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ट्राॅमा सेंटर में होती मारपीट।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
फिरोजाबाद के सरकारी मेडिकल कॉलेज के ट्रॉमा सेंटर में बुधवार देर रात एक 28 वर्षीय युवक की मौत हो गई। घटना के बाद परिजन और डॉक्टर में गाली गलौज के बाद मारपीट हो गई। मारपीट की घटना से गुस्साए डॉक्टर ने हड़ताल का एलान कर दिया। स्वास्थ्य सेवाएं छोड़कर ट्रॉमा सेंटर के बाहर आ गए। उत्तर सहित कई थानों का फोर्स तैनात किया गया। देर रात तक सीएमएस व मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल की ओर से डॉक्टर को समझने की कवायद जारी रही।
सविता नगर, थाना उत्तर निवासी 28 वर्षीय मोहन उर्फ मोनू पुत्र रुक्मपाल, जो पेशे से चूड़ी कारीगर था, उसको बुधवार रात करीब 8 बजे पेट दर्द और उल्टी की शिकायत पर परिजन ट्रॉमा सेंटर लेकर आए थे। मृतक के भाई योगेश का आरोप है कि अस्पताल के डॉक्टरों ने लगभग एक घंटे तक मरीज को हाथ तक नहीं लगाया। गंभीर हालत के बावजूद न तो इलाज शुरू किया गया और न ही ऑक्सीजन की कोई व्यवस्था की गई, जिसके चलते तड़प-तड़पकर मोहन की सांसें थम गईं। युवक की मौत होते ही परिजनों का सब्र टूट गया और उन्होंने डॉक्टरों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
देखते ही देखते तीमारदारों और डॉक्टरों के बीच तीखी बहस, गाली-गलौज और हाथापाई शुरू हो गई। इस दौरान गुस्साए परिजनों ने ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर मंगलम के साथ मारपीट कर दी। डॉक्टर के साथ मारपीट की खबर फैलते ही पूरा मेडिकल स्टाफ लामबंद हो गया। आक्रोशित स्वास्थ्यकर्मियों ने जवाबी कार्रवाई करते हुए तीमारदारों को भी पीट दिया। देर रात तक ट्रॉमा सेंटर में भारी उपद्रव और हंगामा चलता रहा। मृतक मोहन अपने पीछे पत्नी और दो छोटे बच्चों को रोता-बिलखता छोड़ गया है।
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कई थानों की पुलिस पहुंची, डॉक्टरों ने की हड़ताल की घोषणा
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए थाना उत्तर समेत कई थानों का भारी पुलिस बल मौके पर तैनात किया गया। पुलिस के पहुंचने के बाद भी परिजन देर रात तक शव रखकर प्रदर्शन करते रहे। दूसरी ओर, अपने साथी के साथ हुई मारपीट से आक्रोशित डॉक्टरों ने काम बंद कर हड़ताल का ऐलान कर दिया, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह ठप हो गईं। देर रात तक पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी डॉक्टरों को मनाने और स्थिति को संभालने की कवायद में जुटे रहे।
डीएम कार्यालय से सीएमओ तक घुमाते रहे फोन, नहीं मिली मदद
मोहन की मौत के मामले में उसके भाई योगेश ने आरोप लगाया कि जब ट्रॉमा सेंटर का स्टाफ मरीज को तड़पता छोड़ इलाज में लापरवाही बरत रहा था, तब उन्होंने मदद के लिए जिले के आलाधिकारियों के दरवाजे खटखटाए, लेकिन सिर्फ नंबरों का खेल चलता रहा। योगेश के मुताबिक, भाई की बिगड़ती हालत देख उन्होंने सबसे पहले डीएम कार्यालय के फोन नंबर पर संपर्क कर गुहार लगाई। लेकिन वहां से कोई त्वरित मदद भेजने की जगह उन्हें मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय का नंबर थमा दिया गया।
सीएमओ कार्यालय में फोन मिलाया, तो वहां से भी निराशा ही हाथ लगी। अफसरों ने मौके पर किसी जिम्मेदार को भेजने या मरीज को त्वरित इलाज दिलाने के बजाय वापस मेडिकल कॉलेज के ही उसी स्टाफ का नंबर देकर पल्ला झाड़ लिया, जिसकी शिकायत लेकर परिजन फोन कर रहे थे।
शव को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी में रखवा दिया है। दोनों पक्षों के आरोपी की जांच की जा रही है। पुलिस ने पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया। -संतोष कुमार सिंह, सीओ सिटी
हम इस पूरे घटनाक्रम की जांच कराएंगे। डॉक्टर के साथ मारपीट करना गलत है। - डॉ. नवीन जैन, सीएमएस ट्रॉमा सेंटर
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सविता नगर, थाना उत्तर निवासी 28 वर्षीय मोहन उर्फ मोनू पुत्र रुक्मपाल, जो पेशे से चूड़ी कारीगर था, उसको बुधवार रात करीब 8 बजे पेट दर्द और उल्टी की शिकायत पर परिजन ट्रॉमा सेंटर लेकर आए थे। मृतक के भाई योगेश का आरोप है कि अस्पताल के डॉक्टरों ने लगभग एक घंटे तक मरीज को हाथ तक नहीं लगाया। गंभीर हालत के बावजूद न तो इलाज शुरू किया गया और न ही ऑक्सीजन की कोई व्यवस्था की गई, जिसके चलते तड़प-तड़पकर मोहन की सांसें थम गईं। युवक की मौत होते ही परिजनों का सब्र टूट गया और उन्होंने डॉक्टरों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
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देखते ही देखते तीमारदारों और डॉक्टरों के बीच तीखी बहस, गाली-गलौज और हाथापाई शुरू हो गई। इस दौरान गुस्साए परिजनों ने ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर मंगलम के साथ मारपीट कर दी। डॉक्टर के साथ मारपीट की खबर फैलते ही पूरा मेडिकल स्टाफ लामबंद हो गया। आक्रोशित स्वास्थ्यकर्मियों ने जवाबी कार्रवाई करते हुए तीमारदारों को भी पीट दिया। देर रात तक ट्रॉमा सेंटर में भारी उपद्रव और हंगामा चलता रहा। मृतक मोहन अपने पीछे पत्नी और दो छोटे बच्चों को रोता-बिलखता छोड़ गया है।
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कई थानों की पुलिस पहुंची, डॉक्टरों ने की हड़ताल की घोषणा
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए थाना उत्तर समेत कई थानों का भारी पुलिस बल मौके पर तैनात किया गया। पुलिस के पहुंचने के बाद भी परिजन देर रात तक शव रखकर प्रदर्शन करते रहे। दूसरी ओर, अपने साथी के साथ हुई मारपीट से आक्रोशित डॉक्टरों ने काम बंद कर हड़ताल का ऐलान कर दिया, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह ठप हो गईं। देर रात तक पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी डॉक्टरों को मनाने और स्थिति को संभालने की कवायद में जुटे रहे।
डीएम कार्यालय से सीएमओ तक घुमाते रहे फोन, नहीं मिली मदद
मोहन की मौत के मामले में उसके भाई योगेश ने आरोप लगाया कि जब ट्रॉमा सेंटर का स्टाफ मरीज को तड़पता छोड़ इलाज में लापरवाही बरत रहा था, तब उन्होंने मदद के लिए जिले के आलाधिकारियों के दरवाजे खटखटाए, लेकिन सिर्फ नंबरों का खेल चलता रहा। योगेश के मुताबिक, भाई की बिगड़ती हालत देख उन्होंने सबसे पहले डीएम कार्यालय के फोन नंबर पर संपर्क कर गुहार लगाई। लेकिन वहां से कोई त्वरित मदद भेजने की जगह उन्हें मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय का नंबर थमा दिया गया।
सीएमओ कार्यालय में फोन मिलाया, तो वहां से भी निराशा ही हाथ लगी। अफसरों ने मौके पर किसी जिम्मेदार को भेजने या मरीज को त्वरित इलाज दिलाने के बजाय वापस मेडिकल कॉलेज के ही उसी स्टाफ का नंबर देकर पल्ला झाड़ लिया, जिसकी शिकायत लेकर परिजन फोन कर रहे थे।
शव को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी में रखवा दिया है। दोनों पक्षों के आरोपी की जांच की जा रही है। पुलिस ने पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया। -संतोष कुमार सिंह, सीओ सिटी
हम इस पूरे घटनाक्रम की जांच कराएंगे। डॉक्टर के साथ मारपीट करना गलत है। - डॉ. नवीन जैन, सीएमएस ट्रॉमा सेंटर