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Agra News: मुगल काल में होते थे फौजदार, अब जिम्मेदारी संभालेंगे पुलिस कमिश्नर, जानिए इतिहास

Sat, 26 Nov 2022 07:19 PM IST
मुकेश कुमार अमित कुलश्रेष्ठ, अमर उजाला आगरा
अमित कुलश्रेष्ठ, अमर उजाला आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Sat, 26 Nov 2022 07:19 PM IST
सार

 वर्ष 1579 में मुगल शहंशाह अकबर ने 12 सूबों में बांटकर फौजदार और कोतवाल तैनात किए थे।  कोतवाल पूरे नगर की सुरक्षा के लिए जवाबदेह थे।

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Faujdar was in Mughal era now police commissioner will take responsibility of law and order in Agra
मुगलकालीन पेटिंग - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

देश में आगरा से मुगल काल में पुलिस व्यवस्था को व्यवस्थित किया गया। मुगलिया राजधानी रहे आगरा में शहंशाह अकबर ने वर्ष 1579 में पूरी सल्तनत को 12 सूबों में बांटने के बाद कानून व्यवस्था और लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी फौजदार को सौंप दी। इन सूबों में जिलों यानी सरकार की जिम्मेदारी कोतवाल पर थी, जबकि गांव में चौकीदार लोगों की सुरक्षा के लिए जवाबदेह थे। अब आगरा में पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू होने जा रही है। 

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अपने नवरत्नों को प्रशासनिक और राजस्व सुधार की जिम्मेदारी देने के साथ ही मुगल शहंशाह अकबर ने कानून व्यवस्था के सुधार के लिए आगरा से ही व्यवस्था शुरू की। मुगल दरबार के नवरत्न अबुल फजल की किताब आईन-ए-अकबरी के अनुसार सेना के लिए सिपहसलार थे, जिन्हें बाद में सूबेदार बनाया गया। इन सूबों में कानून व्यवस्था के लिए आज के एसएसपी की तरह फौजदार नियुक्त किए गए। इनके मातहत शहरों में कोतवाल नियुक्त किए गए, जो पूरे नगर की सुरक्षा के लिए जवाबदेह थे।
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भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के पूर्व निदेशक पदमश्री से सम्मानित केके मुहम्मद के मुताबिक शहर कोतवाल की जिम्मेदारी थी कि सराय में रुकने वालों का रिकॉर्ड बनाए। शहर से हर आने-जाने वाले का ब्योरा, रात में शहर छोड़ने पर रोक, चोरी पर रोक, गुलाम बेचने पर रोक, बैल, घोड़ा आदि के काटने पर रोक के नियम का पालन कराए। रात में शहर में मशालें जलवा कर रोशनी की जिम्मेदारी भी थी।

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दिन में कोई लुटा तो फौजदार देते थे मुआवजा

मुगल शहंशाह शाहजहां ने पुलिस व्यवस्था में इस हद तक  सख्ती की कि अगर सड़कों पर दिन के समय किसी राहगीर के साथ लूट हो जाती तो उस सूबे के फौजदार को लूट का मुआवजा देना होता था। विवि के इतिहास विभाग के अध्यक्ष प्रो. सुगम आनंद के मुताबिक विविधताओं से भरे भारत में कोतवाल और पुलिस व्यवस्था पहले भी थी, पर मुगलकाल में यह व्यवस्थित की गई।

आगरा सूबे में थे 13 सरकार और 203 परगना

मुगल काल में आगरा की अहमियत ज्यादा थी। राजधानी होने के कारण यहां के कोतवाल बेहद ताकतवर समझे जाते थे। आगरा सूबा 13 सरकार यानी जिलों में बंटा था, जिसमें 203 परगना थे। घाटमपुर से पलवल और कन्नौज से चंदेरी तक फैले आगरा सूबे के पास मुगल काल में 50,681 घुड़सवार जवान, 5,77,570 पैदल सैनिक और 221 हाथी थे। सूबे में 2.78 करोड़ बीघा जमीन और 54 करोड़ रुपये की आय थी। 

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