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किसान जरा ध्यान दें: कम लागत में करना है ज्यादा उत्पादन, कृषि विशेषज्ञ ने बताया ये छोटा सा उपाय
Thu, 18 May 2023 04:15 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Thu, 18 May 2023 04:15 PM IST
सार
रबी की फसल कटने के बाद किसान अपने खाली खेत की गहरी जुताई कर दें। खेत की गहरी जुताई खरीफ की फसल के लिए भी लाभदायक है।
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खेतों की जुताई
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
अगर आप किसान हैं, तो ये खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। किसान अपनी आमदनी बढ़ना चाहते हैं, या फिर कम लागत में ज्यादा उत्पादन लेने की सोच रहे हैं। इसे लेकर केवीके के मृदा विशेषज्ञ डॉ .संदीप ने कहा है कि किसान अपने खाली पड़े खेतों की ग्रीष्मकालीन गहरी जुताई करें।
आरबीएस कॉलेज कृषि विज्ञान केंद्र बिचपुरी के मृदा विशेषज्ञ डॉ संदीप सिंह ने बुधवार को बताया है कि रबी की फसल कटने के बाद किसान अपने खाली खेत की गहरी जुताई कर दें। खेत की गहरी जुताई खरीफ की फसल के लिए भी लाभदायक है। डॉ संदीप ने कहा है कि ग्रीष्मकालीन जुताई मई और जून में मानसून आने से पहले की जाती है। गहरी जुताई से मिट्टी में सुधार होता है और मिट्टी में पानी धारण करने की क्षमता बढ़ती है। जुताई से खेत में उगे खरपतवार और फसल अवशेष मिट्टी में दबकर सड़ जाते हैं। जिससे मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ की मात्रा बढ़ जाती है। डॉ सिंह ने कहा कि किसानों को सुबह के समय ही जुताई की कोशिश करनी चाहिए। क्योंकि इस समय कीटों के प्राकृतिक शत्रु परभक्षी पक्षी ज्यादा सक्रीय रहते हैं, जो कीटों और लार्वा को खा जाते हैं।
डॉ संदीप सिंह ने बताया है कि गहरी जुताई के बाद मिट्टी में छिपे हानिकारक कीड़े-मकोड़े, उनके अंडे और लार्वा सूर्य के संपर्क में आने से नष्ट हो जाते हैं। गर्मी में गहरी जुताई से मिट्टी में पाए जाने वाले हानिकारक जीवाणु, कवक आदि मर जाते हैं। जिससे फसलें रोगों से मुक्त होती हैं। मिट्टी में वायु का संचार बढ़ जाता है, जो लाभकारी सूक्ष्म जीवों की बढ़ोत्तरी में सहायक होते हैं।
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डॉ संदीप सिंह ने बताया है कि किसान एक निश्चित गहराई (6-7 इंच) पर जुताई करते हैं।जिससे पानी का प्रवाह अधिक होता है। गर्मियों में गहरी जुताई (लगभग 9 से 12 इंच गहरी होती है) में यह सख्त परत टूट जाती है। परिणाम स्वरूप बारिश के मौसम में ऐसे खेतों की जल धारण क्षमता बढ़ जाती है।
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आरबीएस कॉलेज कृषि विज्ञान केंद्र बिचपुरी के मृदा विशेषज्ञ डॉ संदीप सिंह ने बुधवार को बताया है कि रबी की फसल कटने के बाद किसान अपने खाली खेत की गहरी जुताई कर दें। खेत की गहरी जुताई खरीफ की फसल के लिए भी लाभदायक है। डॉ संदीप ने कहा है कि ग्रीष्मकालीन जुताई मई और जून में मानसून आने से पहले की जाती है। गहरी जुताई से मिट्टी में सुधार होता है और मिट्टी में पानी धारण करने की क्षमता बढ़ती है। जुताई से खेत में उगे खरपतवार और फसल अवशेष मिट्टी में दबकर सड़ जाते हैं। जिससे मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ की मात्रा बढ़ जाती है। डॉ सिंह ने कहा कि किसानों को सुबह के समय ही जुताई की कोशिश करनी चाहिए। क्योंकि इस समय कीटों के प्राकृतिक शत्रु परभक्षी पक्षी ज्यादा सक्रीय रहते हैं, जो कीटों और लार्वा को खा जाते हैं।
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रोग मुक्त होती हैं फसलें
डॉ संदीप सिंह ने बताया है कि गहरी जुताई के बाद मिट्टी में छिपे हानिकारक कीड़े-मकोड़े, उनके अंडे और लार्वा सूर्य के संपर्क में आने से नष्ट हो जाते हैं। गर्मी में गहरी जुताई से मिट्टी में पाए जाने वाले हानिकारक जीवाणु, कवक आदि मर जाते हैं। जिससे फसलें रोगों से मुक्त होती हैं। मिट्टी में वायु का संचार बढ़ जाता है, जो लाभकारी सूक्ष्म जीवों की बढ़ोत्तरी में सहायक होते हैं।
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