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लाठी चार्ज से उबले किसान, आरपार की लड़ाई का ऐलान

Tue, 01 Sep 2015 01:59 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा Updated Tue, 01 Sep 2015 01:59 AM IST
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?farmers angered on lathicharg
शमसाबाद रोड स्थित पॉवर ग्रिड कारपोरेशन पर धरना-प्रदर्शन के दौरान पुलिस के लाठी चार्ज से किसानों में उबाल है। आरोप है कि भूमि अधिग्रहण होने से किसान बर्बाद हो गए हैं। शेष खेत भी सिंचाई योग्य नहीं हैं। पानी लगाने पर करंट दौड़ने लगता है। जमीन के बदले उन्हें मुआवजा ऊंट के मुंह में जीरे के बराबर दिया गया। हक मांगने पर लाठियां बरसाई गईं। उन्होंने ऐलान किया है कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जाती, किसी अधिकारी और कर्मचारी को अपने खेतों में नहीं घुसने देंगे। आरपार की लड़ाई ही क्यों न लड़नी पड़े।
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किसानों के अनुसार, पॉवर ग्रिड कारपोरेशन ने वर्ष 2010 में 14 गांवों की भूमि का अधिग्रहण किया था। तकरीबन 1500 बीघा जमीन पर प्लांट बनाया गया। किसानों को एक बीघा जमीन के दस, 20 और 50 हजार रुपये ही मुआवजा दिया गया, जबकि अब जमीन की कीमत लाखों मेें है। 2013 में टावर और लाइन डालने के लिए जमीन अधिग्रहण किया गया। एक बीघा में एक टावर लगाया गया, जिसमें एक से पांच हजार तक ही मुआवजा दिया गया। एक टावर लगने से एक बिस्वा जमीन खराब हो जाती है। लाइन चालू होने के बाद खेतों में पानी डालने में करंट फैल जाता है। फसल की पैदावार भी कम होने लगी है। तकरीबन चार हजार किसान प्रभावित हुए हैं। एक बीघा जमीन के लिए एक करोड़ दिए जाने चाहिए थे। जमीन खेती योग्य न बचने से किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा है।
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किसानों ने ऐलान किया कि अगर किसी कर्मचारी ने जबरन खेतों में घुसने की कोशिश की तो ईंट से ईंट बजा देंगे। सुनवाई नहीं होती है तो टावरों को गिरा देंगे।
दिल्ली में एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर ने दिया था आश्वासन
भाकियू जिलाध्यक्ष श्याम सिंह चाहर ने बताया कि किसानों ने 14 अगस्त को एडीएम सिटी से वार्ता की थी। अपनी मांगें रखी थीं। एडीएम सिटी ने अधिकारियों से वार्ता का आश्वासन दिया था। इस पर पॉवर ग्रिड कारपोरेशन के अधिकारी 19 अगस्त को उन्हेें दिल्ली लेकर गए थे। यहां पर एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर (ईडी) ने आश्वासन दिया था कि किसानों को निशुल्क बिजली दी जाएगी। जिन लोगों को बिजली के कनेक्शन दिए जाने थे उनकी लिस्ट भी मांगी थी। इसके बाद जीएम को लिस्ट दे दी गई। 26 अगस्त को यूनियन के प्रदेश प्रवक्ता अनिल तालान आए थे। उन्होंने जीएम से वार्ता की। सोमवार को एक लाइन के उद्घाटन के लिए ईडी के आने की जानकारी पर ही ग्रामीणों ने कारपोरेशन स्टेशन का घेराव किया।
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रिहा होने से किया इंकार
धरने के दौरान किसानों ने निर्णय लिया था कि प्रत्येक गांव के तकरीबन 15-15 ग्रामीण गिरफ्तारी देंगे। इसके बाद ही पुलिस ने कार्रवाई की। पुलिस लाइन लाने के बाद किसानों ने जेल जाने की तैयारी कर ली। उन्होंने मुचलके पर रिहा होने से इंकार कर दिया।
इनको किया गया गिरफ्तार
भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष श्याम सिंह चाहर, संगठन मंत्री कमलेश कुमार, जिला उपाध्यक्ष राजेंद्र सिंह तोमर, भीमसेन तोमर, दिनेश कुमार, शिशुपाल सिंह, बनवारी लाल प्रधान, वीरेंद्र सिंह, दाताराम, रनवीर सिंह तोमर सहित अन्य ग्रामीण।
लाठीचार्ज में ये हुए घायल
गांव बहैटा के देवदत्त, राजकुमार, बच्चू सिंह, दिगनेर के विनोद, इस्लामपुर के कोमल सिंह, सुजगई के निरौती लाल, पवावली के विनोद, जहान सिंह की गढ़ी के चंद्रभान घायल हुए हैं।
पांच सितंबर को राष्ट्रीय अध्यक्ष देंगे गिरफ्तारी
भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष श्याम सिंह चाहार ने बताया कि किसानों पर लाठीचार्ज का मामला यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत तक पहुंच गया। राष्ट्रीय अध्यक्ष ने ऐलान किया है कि प्रदेश स्तर पर आंदोलन चलाया जाएगा। अगर, मांगे नहीं मानी गईं तो वह मथुरा में पांच अगस्त को गिरफ्तारी देंगे।
इन गांवों की जमीन का हुआ था अधिग्रहण
पॉवर ग्रिड के लिए शमसाबाद रोड के गांव के दिगनेर, नौफरी, बहेटा, सुजरई, गंगरौआ, गुतिला, हरचंद की गढ़ी, लोदई, पाववली, नगला नाथू, इसलाम पुर, बल्हेरा, गढ़ी हरतना, जहानसिंह की गढ़ी आदि की जमीनों का अधिग्रहण किया गया था।
ये हैं ग्रामीणों की मांगें
- सभी 14 गांवों को घरेलू और सिंचाई के लिए मुफ्त बिजली की आपूर्ति हो।
- जिन किसानों की जमीनें ली गई हैं उनके परिवार के एक सदस्य को नौकरी।
- सभी 14 गांवों का विकास हो, सड़क, पानी, स्कूल, अस्पताल आदि हों।
असंवैधानिक है किसानों का धरना : एडीएम सिटी
एडीएम सिटी राजेश कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि किसानों का धरना-प्रदर्शन असंवैधानिक है। देश के महत्वपूर्ण पावर स्टेशन की सुरक्षा को खतरा उत्पन्न हो गया था। ग्रामीणों ने एनटीपीसी के चार गेटों को बंद कर दिया और बाहर से ताले डाल दिए थे। मुख्य गेट के बाहर धरने पर बैठ गए। इस तरह पॉवर ग्रिड के कर्मचारियों और अधिकारियों को बंधक बनाना भी असंवैधानिक है। बावजूद इसके शांति पूर्ण तरीके से समझाने का कोशिश की गई थी, लेकिन उग्र किसानों ने पथराव कर दिया। तब पुलिस ने उन्हें खदेड़ा है।
पुलिस ने लाठी चार्ज नहीं किया है। वहां कुछ प्रदर्शनकारियों ने लाउड स्पीकर हटाना का विरोध करते हुए पत्थरबाजी कर दी थी।
किसान नेता सहित नौ को शांति भंग में जेल
पुलिस ने भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष श्याम सिंह चाहर सहित नौ लोगों को जेल भेज दिया। वहीं 144 किसानों को पुलिस लाइन से रिहा कर दिया गया। सीओ असीम चौधरी ने बताया कि श्याम सिंह चाहर, रनवीर सिंह, दिनेश, राजकुमार, देव प्रकाश, पुष्पेंद्र, भगवान सिंह, कमलेश और बनवारी लाल को शांति भंग में जेल भेजा गया है।
आज भैंटा गांव में महापंचायत
किसानों ने मंगलवार को भैंटा गांव में महापंचायत करने की घोषणा की है। किसान विष्णु कटारा ने बताया कि सुबह आठ बजे आसपास के सभी गांवों के किसान जुटेंगे। जिन लोगों को जेल भेजा है उन्हें छुड़ाने के लिए प्रशासन से वार्ता होगी। यदि प्रशासन नहीं माना तो किसान ईंट का जवाब पत्थर से देंगे और फिर गिरफ्तारी देंगे।
वीडियो बनाने की कोशिश पर जब्त किया मोबाइल
पुलिस की बर्बरता की जब लोगों ने वीडियो बनाने की कोशिश की तो पुलिस ने उन्हेें भी पकड़ लिया। आरोप है कि मोबाइल छीनने के बाद जमकर पीटा। इसके बाद मोबाइल की चिप अपने पास रख ली। मीडियाकर्मियों से भी अभद्रता की गई।

सात माह से आंदोलन कर रहे किसान
आगरा। भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के जिलाध्यक्ष श्याम सिंह चाहर के नेतृत्व में ग्रामीणों का यह आंदोलन करीब सात माह से चल रहा है। पहले पत्र व्यवहार चला, कोई सुनवाई नहीं होने के बाद जुलाई में किसानों ने सड़क पर उतरने का एलान कर दिया। पावर ग्रिड के गेट पर धरना प्रदर्शन किया गया था। तब प्रशासन, पावर ग्रिड के अधिकारियों के बीच जिलाधिकारी और एडीएम सिटी की अध्यक्षता में दो बार वार्ता हुई। पर आश्वासन ही मिला। फिर दौरे पर आए जीएम के समक्ष भी प्रदर्शन किया गया। इसके बाद प्रशासन ने मध्यस्थता की और जिलाधिकारी पंकज कुमार की अध्यक्षता में पावर ग्रिड के अधिकारियों और किसानों के बीच वार्ता हुई। ग्रिड के अफसर गांवों में विकास कार्य कराने पर सहमत थे, लेकिन नौकरी और मुफ्त बिजली डिमांड पर सहमति नहीं बन पा रही है। अब 21 अगस्त से लगातार धरना चल रहा था।
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