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पुराने पन्नों से: परिवार नियोजन और फिर आपातकाल...कांग्रेस के वो फैसले, जिसकी वजह से गंवानी पड़ी सत्ता
Tue, 23 Apr 2024 05:34 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
अशोक सिंह, आगरा
अशोक सिंह, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Tue, 23 Apr 2024 05:34 PM IST
सार
ये बात है 1977 की, जब इंदिरा गांधी सरकार द्वारा कुछ ऐसे फैसले लिए गए, जिनकी वजह से सत्ता ही हाथ से चली गई। इसमें मुख्य फैसला जनसंख्या पर काबू पाने के लिए सरकार द्वारा शुरू किया गया अभियान बना।
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पुराने पन्नों से
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
परिवार नियोजन को लेकर सरकार के फैसलों और आपातकाल में बरती सख्ती की वजह से कांग्रेस को सत्ता से हटना पड़ा था। 1977 के आम चुनाव से ठीक पहले बढ़ती जनसंख्या पर काबू पाने के लिए सरकार का एक बड़ा अभियान शुरू हुआ था। सरकार ने लोगों से कहा था कि वे बेटी की शादी 23 साल की होने के बाद करें। इसके पीछे सरकार का तर्क था कि लड़कियां 15 से 23 साल के बीच ही सबसे ज्यादा बच्चे पैदा करती हैं। सरकार का मानना था कि लड़कियों के लिए विवाह की न्यूनतम आयु
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23 वर्ष करने से परिवार नियोजन कार्यक्रम में मदद मिलेगी। अभियान में लोगों से यह भी कहा गया था कि लड़कों की शादी 27 वर्ष के बाद करें। कांग्रेस सरकार के इसी तरह के फैसले चुनाव में भारी पड़ गए। अमर उजाला के 8 जनवरी 1977 के अंक में प्रकाशित समाचार के अनुसार केंद्रीय स्वास्थ्य उपमंत्री एकेएम इशाक ने कोलकाता में पत्रकारों को इस योजना की जानकारी दी थी।
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उन्होंने कहा था कि सरकार देश में लड़कियों के विवाह की न्यूनतम आयु 23 वर्ष करने का जोरदार अभियान चला रही है। सरकार ऐसा इसलिए चाहती है क्योंकि लड़कियां 15 से 23 वर्ष की आयु के बीच अधिक बच्चे पैदा करती हैं। लड़कियों की शादी की उम्र बढ़ाने से परिवार नियोजन कार्यक्रम में मदद मिलेगी। कांग्रेस सरकार का यह फैसला आज के परिदृश्य में भले ही अच्छा था, लेकिन जोर जबरदस्ती ठीक नहीं थी।
इशाक ने कहा कि केंद्र सरकार राज्यों को इस बारे में पत्र लिख चुकी है। राज्य सरकारों से कहा गया है कि वे इस अभियान में केंद्र की मदद करें। सरकार के मंत्री देहातों का दौरा कर जनता को इस बारे में जानकारी दें। उन्होंने कहा कि इस दिशा में अच्छी प्रारंभिक सफलता मिली है। उन्होंने दावा किया कि शिक्षित परिवार सरकार के इस अभियान को स्वीकार कर रहे हैं। अत्यंत पिछड़े लोग भी इसे ठीक मान रहे हैं। उन्होंने कहा कि नसबंदी पर भी सरकार का जोर है। वित्तीय वर्ष के अंत तक सरकार को बड़ी संख्या में नसबंदी होने की उम्मीद है। अक्टूबर तक ही देश में 43 लाख लोगों की नसबंदी हो चुकी थी।