कारोबारी की हत्या कर डकैती केस: नहीं बदल रहा आगरा पुलिस का ढर्रा, पोस्टमार्टम रिपोर्ट के लिए 16 दिन भटके परिजन
हरीपर्वत क्षेत्र में हत्या कर डकैती का मामला हुआ है। अधिकारियों के संज्ञान में मामला आने के बाद 17वें दिन पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट पहुंचाई।
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उत्तर प्रदेश के आगरा में पुलिस आयुक्त जे रविंदर गौड़ ने सिटीजन चार्टर के तहत मुकदमे की प्रति और पोस्टमार्टम रिपोर्ट पीड़ित के घर पहुंचाने की व्यवस्था की है। मगर, थानों की पुलिस इस व्यवस्था को सफल नहीं बना पा रही है। हरीपर्वत क्षेत्र में केमिकल कारोबारी दिलीप गुप्ता की हत्या और डकैती की वारदात हुई थी। घटना के बाद परिजन पोस्टमार्टम रिपोर्ट लेने के लिए 16 दिन तक परेशान रहे। 17वें दिन अधिकारियों के संज्ञान में आने के बाद पुलिस घर पहुंची। रिपोर्ट देकर आई। इससे परिवार में आक्रोश है।
1 अप्रैल को विजय नगर पुलिस चौकी से 100 मीटर की दूरी पर वारदात हुई थी। नौकर लोकेश ने वारदात कराई थी। वह शाहगंज के बदमाश कासिम के साथ आया था। कारोबारी की हत्या कर दी थी। पत्नी लता गुप्ता को लहूलुहान कर दिया था। घर से 20 लाख और 30 लाख के जेवरात लूटने का दावा पीडि़त परिवार ने किया। पुलिस ने लोकेश, कासिम सहित 5 बदमाश गिरफ्तार किए थे।
कारोबारी के बेटे सुमित ने बताया कि वह अंतिम संस्कार के बाद पारिवारिक कार्य में व्यस्त थे। इस कारण पुलिस से संपर्क नहीं कर सके। पुलिस ने उन्हें पिता की पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं दी थी। इस पर वो 11 अप्रैल को पोस्टमार्टम गृह पर गए थे। इस पर कर्मचारियों ने 16 अप्रैल को आने के लिए बोल दिया। मां लता गुप्ता मंगलवार को टांके कटवाने के लिए अस्पताल गई थीं। वहां से पोस्टमार्टम गृह पहुंची।
मगर, कर्मचारियों से रिपोर्ट देने से मना कर दिया। बताया कि वह पुलिस संपर्क करें। पुलिस ही रिपोर्ट देती है। इस पर वो घर लौट आईं। बुधवार को थाना हरीपर्वत पुलिस को जानकारी हुई। इस पर रात 9 बजे चौकी प्रभारी विजय नगर योगेश कुमार परिवार को पोस्टमार्टम रिपोर्ट की प्रति देकर आए। पुलिस ने तर्क दिया कि वारदात के बाद पुलिस व्यस्त थी। इस कारण रिपोर्ट देने में देरी हुई।
मुकदमे की प्रति और पोस्टमार्टम रिपोर्ट घर पहुंचाने की है व्यवस्था
पुलिस आयुक्त ने सिटीजन चार्टर के तहत मुकदमे की प्रति और पोस्टमार्टम रिपोर्ट पीडि़त के घर पहुंचाने की व्यवस्था की है, जिससे लोगों को थाने चौकियों पर भटकना नहीं पड़े। इसकी जिम्मेदारी भी बीपीओ और चौकी प्रभारी पर होती है। मगर, कई मामलों में मुकदमे की प्रति से लेकर पोस्टमार्टम रिपोर्ट के लिए लोगों को भटकना पड़ रहा है।