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फर्जी शिक्षकों की मौज: नियुक्तियां रद्द, फिर भी मिल रही तनख्वाह; शिक्षा विभाग की जांच पांच महीने से ठप

Thu, 09 Jul 2026 09:55 AM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Thu, 09 Jul 2026 09:55 AM IST
सार

आगरा के अहमदिया हनीफिया इंटर कॉलेज में आठ शिक्षकों की कथित फर्जी नियुक्तियों की जांच 154 दिन बाद भी अधूरी है, क्योंकि प्रबंधन मूल दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा रहा है। आरोप है कि नियुक्तियां निरस्त होने के बावजूद हर महीने 9 से 10 लाख रुपये का वेतन जारी किया जा रहा है, जबकि कार्रवाई अब तक नहीं हुई है।

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Fake Teacher Recruitment Probe Stalled for 154 Days Management Withholds Records
शिक्षक सांकेतिक - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आगरा के ढोलीखार स्थित अहमदिया हनीफिया इंटर कॉलेज में आठ शिक्षकों की नियम विरुद्ध नियुक्ति और अवैध रूप से वेतन निकालने के मामले में जांच पूरी नहीं हो पा रही है। संयुक्त शिक्षा निदेशक (जेडी), आगरा मंडल ने विद्यालय के प्रबंधक और प्रधानाचार्य के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए थे लेकिन 154 दिन बीतने के बाद भी जिला विद्यालय निरीक्षक की हीलाहवाली के कारण जांच पूरी नहीं हो पा रही है। जांच को भटकाने के लिए प्रबंधन फाइलें दबाए बैठा है। जांच समिति को मूल पत्रावलियां तक उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं।
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शिकायतकर्ता मोहम्मद जुहैब ने संपूर्ण समाधान दिवस में जिलाधिकारी से शिकायत दर्ज कराई है। विद्यालय में बिना उचित वित्तीय स्वीकृति और नियमों को ताक पर रखकर आठ शिक्षकों की नियुक्ति की गई है, जबकि 16 मार्च, 2017 को ही इन पदों की चयन प्रक्रिया और साक्षात्कार पर रोक लगा दी गई थी। तत्कालीन डीआईओएस ने आरोपों की जांच के बाद 1 सितंबर, 2020 को नियुक्तियों को निरस्त भी कर दिया था। आरोप है कि भर्तियां निरस्त होने के बावजूद फर्जी तरीके से वेतन निकाला जा रहा है, जिससे सरकारी खजाने को हर महीने लगभग 9 से 10 लाख रुपये का नुकसान हो रहा है।
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लीपापोती में जुटे अधिकारी, जांच शून्य
मामले की जांच के लिए एक स्वतंत्र समिति गठित की गई थी। 28 जनवरी, 2026 को समिति ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि कई नोटिस के बावजूद विद्यालय प्रबंधन ने नियुक्ति संबंधी मूल पत्रावलियां नहीं दीं, जिससे जांच पूरी करना संभव नहीं है। नतीजा शून्य रहा। इस पर संज्ञान लेते हुए 2 फरवरी, 2026 को जेडी ने डीआईओएस को आदेश दिया था कि पत्रावली नहीं देने के दोषी प्रबंधन के खिलाफ वेतन वितरण अधिनियम 1971 और माध्यमिक शिक्षा अधिनियम 1921 के तहत तत्काल कार्रवाई की जाए लेकिन डीआईओएस ने कार्रवाई नहीं की।

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जिलाधिकारी से लगाई कार्रवाई की मांग
जेडी के आदेश के पांच महीने बाद भी डीआईओएस कार्यालय से मात्र चेतावनियों की खानापूर्ति की गई है। 6 जुलाई, 2026 को शिकायतकर्ता ने जिलाधिकारी को प्रार्थनापत्र देकर अवैध शिक्षकों से अब तक बंटे लाखों रुपये के वेतन की वसूली और मामले में संलिप्त शिक्षा विभाग के बाबुओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। जिलाधिकारी मनीष बंसल का कहना है कि इस संबंध में संबंधित से रिपोर्ट मांगी गई है। लापरवाही और आरोप सिद्ध होने पर कार्रवाई की जाएगी।

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