साजिश का खुलासा: चुनावी रंजिश में विपक्षियों को फंसाने के लिए व्यापारी ने रची थी खुद के अपहरण की झूठी कहानी
व्यापारी बलराम ने घटनास्थल पर ही मोबाइल से सिम निकालकर फेंक दिया था। करनाल पहुंचकर उसने नया सिम कार्ड खरीदा और मोबाइल में डाल लिया। ईएमआई नंबर से मोबाइल को ट्रैस कर रही पुलिस को सिम एक्टिवेट होते ही व्यापारी की लोकेशन मिल गई।
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भतीजों साथ मिलकर अपहरण की योजना बनाई
पुलिस लाइन सभागार में एसपी ने प्रेसवार्ता कर बताया कि व्यापारी बलराम की गांव हुसैनपुर के प्रधान से चुनावी रंजिश थी। विपक्षियों के कारण व्यापारी की बेटी का रोजगार सेवक के पद पर भी चयन नहीं हो सका था। इसे लेकर नामजद लोगों से विवाद भी हुआ था। बदला लेने के उद्देश्य से बलराम ने भतीजे सुनील, पवन और कृष्णा के साथ मिलकर अपने अपहरण की योजना बनाई।
मुकदमा दर्ज किया
28 नवंबर को व्यापारी ने बाइक को बेवर-किशनी मार्ग पर लालपुर मोड़ के पास खड़ा किया और हेलमेट रखकर ई-रिक्शा में बैठकर बेवर चला गया। वहां से दिल्ली और फिर करनाल, जयपुर और वहां से अहमदाबाद चला गया था। एसपी ने बताया कि बलराम व उसके भतीजों पवन, सुनील और कृष्णा को गिरफ्तार कर लिया है। उनके खिलाफ झूठा मुकदमा दर्ज कराने, आपराधिक षड्यंत्र रचने सहित अन्य धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की गई है।
रविवार शाम व्यापारी के अपहरण की बात कही गई थी। इसके बाद व्यापारियों ने उप मंडी और बाजार बंद कर विरोध दर्ज कराया। एसपी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए व्यापारी की बरामदगी के लिए पांच टीमें गठित की थीं। जांच में पुलिस को अपहरण की कहानी झूठी होने का पता चला। शनिवार को सूचना पर सर्विलांस टीम प्रभारी जोगेंदर सिंह व प्रभारी निरीक्षक बेवर सुरेश चंद्र शर्मा ने पुलिस बल के साथ व्यापारी को बेवर रोड बाईपास पुल के पास से गिरफ्तार कर लिया।
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