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निरस्त हो सकती हैं 5332 बीएड की फर्जी मार्कशीट
अमर उजाला आगरा
Updated Sun, 07 Aug 2016 12:24 AM IST
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अंबेडकर विवि
- फोटो : अमर उजाला ब्यूूराो
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डा. बीआरए यूनीवर्सिटी ने पहली बार 2004-05 सत्र की 5332 बीएड की फर्जी मार्कशीट पर सख्त रुख अपनाया है। शनिवार को खंदारी कैंपस स्थित कुलपति आवास पर हुई कार्य परिषद की बैठक में यह मुद्दा छाया रहा। कार्य परिषद ने फर्जीवाड़े को विश्वविद्यालय की साख के लिए बट्टा बताया। सदस्यों ने तर्क दिया कि फर्जीवाडे़ पर कार्रवाई नहीं हुई तो शैक्षणिक मूल्यों का ह्रास होगा। मामले की गंभीरता को देखते हुए परिषद ने इस पर कठोर कार्रवाई की जरूरत बताई।
परिषद ने कुलपति प्रो. मोहम्मद मुजम्मिल के नेतृत्व में तीन सदस्यीय उपसमिति बनाने का निर्देश दिया है। समिति इन फर्जी मार्कशीट पर निर्णय लेकर परिषद में प्रस्तुत करेगी। संभावना जताई जा रही है कि मार्कशीट के निरस्त होने के साथ ही लाभार्थियों पर कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। कुलसचिव केएन सिंह ने बताया कि फर्जी मार्कशीट के लिए नई उपसमिति बनेगी, जिसके प्रभारी कुलपति होंगे। उनके निर्णय के बाद कार्रवाई होगी।
यह है मामला
बीएड सत्र 2004-05 में फर्जी मार्कशीट प्रकरण की जांच लखनऊ की स्पेशल इन्वेस्टीगेशन टीम (एर्सआईटी) कर रही है। सुनील कुमार बनाम विश्वविद्यालय केस की सुनवाई करते हुए जांच हाईकोर्ट की निगरानी में चल रही है। एसआइटी की जांच में विश्वविद्यालय की ओर से जारी की गई 8000 मार्कशीट में से 5332 फर्जी पाई गईं। इनका रिकार्ड कालेजों की फाइल में नहीं मिला। 2000 लाभार्थियों के अंक चार्ट और उत्तर पुस्तिकाओं में अलग-अलग मिले। चार्ट में नंबर बढ़ा दिए गए थे। एसआईटी ने विश्वविद्यालय को रिपोर्ट भेजते हुए इन मार्कशीट को निरस्त करने की संस्तुति की थी। इस रिपोर्ट को एसआईटी 11 अगस्त को हाईकोर्ट में पेश करेगी।
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फर्जी मार्कशीट से बन गए 2500 शिक्षक
फर्जी मार्कशीट में लाभार्थियों के 80 फीसदी से अधिक अंक हैं। बेहतर मेरिट के चलते शिक्षकों की भर्ती में वह कामयाब हो गए। इनकी संख्या करीब 2500 के आसपास है। हैरत की बात है कि विश्वविद्यालय से इनका सरकारी सत्यापन भी हो गया। शिक्षक के अलावा सैकड़ों प्राइवेट जॉब में भी हैं, दो लाभार्थी तो विदेशों में नौकरी कर रहे हैं। फर्जीवाड़े की परत दर परत खुलते देख एसआइटी की जांच की जद में 2009 सत्र आ गया है।
नहीं होगा एलएलबी का दोबारा मूल्यांकन
परिषद ने परीक्षा समिति के उस निर्णय को निरस्त कर दिया, जिसमें एलएलबी के दोबारा मूल्यांकन की संस्तुति की थी। परिषद का तर्क था कि विश्वविद्यालय की नियमावली में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। दो कालेजों के लिए ऐसा किया तो यहां नई परंपरा शुरू हो जाएगी। जिनके नंबर कम हैं, वह री-एग्जाम दे सकते हैं। बता दें कि आगरा कालेज और एएम कालेज छाता के छात्रों ने दोबारा मूल्यांकन की मांग की थी। विवि के पीआरओ डा. गिरिजा शंकर शर्मा ने बताया कि परिषद ने परीक्षा समिति के अन्य फैसलों पर मुहर लगा दी है।
राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों का दो साल कार्यकाल बढ़ा
राष्ट्रीय और विशिष्ट सम्मान पाने वाले शिक्षकों का दो साल के लिए कार्यकाल बढ़ा दिया है। अब यह 64 साल तक की आयु तक सेवाएं दे सकेंगे। यह निर्णय शासनादेश के तहत लिया गया। वहीं तृतीय-चतुर्थ संविदा कर्मचारियों की छह महीने तक सेवाएं बढ़ा दी हैं। दैनिक मजदूरी पर कार्य करने वालों को 140 से बढ़ाकर 190 रुपये किया गया है। पेंशन फंड का बजट भी बढ़ाने पर मुहर लगा दी।
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परिषद ने कुलपति प्रो. मोहम्मद मुजम्मिल के नेतृत्व में तीन सदस्यीय उपसमिति बनाने का निर्देश दिया है। समिति इन फर्जी मार्कशीट पर निर्णय लेकर परिषद में प्रस्तुत करेगी। संभावना जताई जा रही है कि मार्कशीट के निरस्त होने के साथ ही लाभार्थियों पर कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। कुलसचिव केएन सिंह ने बताया कि फर्जी मार्कशीट के लिए नई उपसमिति बनेगी, जिसके प्रभारी कुलपति होंगे। उनके निर्णय के बाद कार्रवाई होगी।
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यह है मामला
बीएड सत्र 2004-05 में फर्जी मार्कशीट प्रकरण की जांच लखनऊ की स्पेशल इन्वेस्टीगेशन टीम (एर्सआईटी) कर रही है। सुनील कुमार बनाम विश्वविद्यालय केस की सुनवाई करते हुए जांच हाईकोर्ट की निगरानी में चल रही है। एसआइटी की जांच में विश्वविद्यालय की ओर से जारी की गई 8000 मार्कशीट में से 5332 फर्जी पाई गईं। इनका रिकार्ड कालेजों की फाइल में नहीं मिला। 2000 लाभार्थियों के अंक चार्ट और उत्तर पुस्तिकाओं में अलग-अलग मिले। चार्ट में नंबर बढ़ा दिए गए थे। एसआईटी ने विश्वविद्यालय को रिपोर्ट भेजते हुए इन मार्कशीट को निरस्त करने की संस्तुति की थी। इस रिपोर्ट को एसआईटी 11 अगस्त को हाईकोर्ट में पेश करेगी।
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फर्जी मार्कशीट से बन गए 2500 शिक्षक
फर्जी मार्कशीट में लाभार्थियों के 80 फीसदी से अधिक अंक हैं। बेहतर मेरिट के चलते शिक्षकों की भर्ती में वह कामयाब हो गए। इनकी संख्या करीब 2500 के आसपास है। हैरत की बात है कि विश्वविद्यालय से इनका सरकारी सत्यापन भी हो गया। शिक्षक के अलावा सैकड़ों प्राइवेट जॉब में भी हैं, दो लाभार्थी तो विदेशों में नौकरी कर रहे हैं। फर्जीवाड़े की परत दर परत खुलते देख एसआइटी की जांच की जद में 2009 सत्र आ गया है।
नहीं होगा एलएलबी का दोबारा मूल्यांकन
परिषद ने परीक्षा समिति के उस निर्णय को निरस्त कर दिया, जिसमें एलएलबी के दोबारा मूल्यांकन की संस्तुति की थी। परिषद का तर्क था कि विश्वविद्यालय की नियमावली में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। दो कालेजों के लिए ऐसा किया तो यहां नई परंपरा शुरू हो जाएगी। जिनके नंबर कम हैं, वह री-एग्जाम दे सकते हैं। बता दें कि आगरा कालेज और एएम कालेज छाता के छात्रों ने दोबारा मूल्यांकन की मांग की थी। विवि के पीआरओ डा. गिरिजा शंकर शर्मा ने बताया कि परिषद ने परीक्षा समिति के अन्य फैसलों पर मुहर लगा दी है।
राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों का दो साल कार्यकाल बढ़ा
राष्ट्रीय और विशिष्ट सम्मान पाने वाले शिक्षकों का दो साल के लिए कार्यकाल बढ़ा दिया है। अब यह 64 साल तक की आयु तक सेवाएं दे सकेंगे। यह निर्णय शासनादेश के तहत लिया गया। वहीं तृतीय-चतुर्थ संविदा कर्मचारियों की छह महीने तक सेवाएं बढ़ा दी हैं। दैनिक मजदूरी पर कार्य करने वालों को 140 से बढ़ाकर 190 रुपये किया गया है। पेंशन फंड का बजट भी बढ़ाने पर मुहर लगा दी।