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Health: एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी के लक्षण...अंदर ही अंदर शरीर को खोखला करती है ये बीमारी, देती है भयानक मौत
Tue, 27 Jan 2026 09:31 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
धर्मेंद्र त्यागी, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
धर्मेंद्र त्यागी, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Tue, 27 Jan 2026 09:31 AM IST
सार
एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी अंदर ही अंदर शरीर को खोखला करती है। हैरानी की बात ये है कि लोग बीमारी से बेखबर रहते हैं। इसके कीटाणु आंत और बच्चेदानी तक पनप जाते हैं। आगरा में कई मामले इसके सामने आए हैं।
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टीबी का संक्रमण
- फोटो : Freepik.com
विस्तार
खांसी-बलगम नहीं, बुखार आने से वजन कम हो रहा था। लक्षणों को नजरअंदाज किया। कई बार खुद ही बुखार की दवा खाते रहे। स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची और जांच की तो दिमाग, आंत, बच्चेदानी, हड्डी, बगल में टीबी के कीटाणु पनप रहे थे। ये एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी है, जिसके बीते वर्षों के मुकाबले दोगुना मरीज मिले हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने बीते साल घर, ढाबों, बस स्टॉप समेत विभिन्न स्थानों से 7.51 लाख लोगों की टीबी की स्क्रीनिंग की। संदिग्ध मरीजों की जांच कराने पर 300936 (17433-पुरुष, 13503-महिलाएं) में टीबी की पुष्टि हुई। इनमें 2256 बच्चे हैं।
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स्वास्थ्य विभाग ने बीते साल घर, ढाबों, बस स्टॉप समेत विभिन्न स्थानों से 7.51 लाख लोगों की टीबी की स्क्रीनिंग की। संदिग्ध मरीजों की जांच कराने पर 300936 (17433-पुरुष, 13503-महिलाएं) में टीबी की पुष्टि हुई। इनमें 2256 बच्चे हैं।
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इसी तरह 18982 में फेफड़े की टीबी (पल्मोनरी) मिली। 10435 मरीजों में दिमाग, बच्चेदानी, रीढ़ की हड्डी, जोड़, गुप्तांग, आंख, गर्दन, बगल में टीबी पाई गई। सीएमओ डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि मरीजों की जांच में एक्स्ट्रा पल्मोनरी में खांसी-बलगम की दिक्कत नहीं बनती। बुखार, भूख कम लगना, वजन कम होने समेत अन्य लक्षण होते हैं। अधिकांश मरीज टीबी की जांच न कराते हुए बुखार का ही इलाज करा रहे थे। टीबी का इलाज देने पर 27159 मरीज ठीक हो चुके हैं।
टीबी मरीज पहचानने में आगरा अव्वल
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. सुखेश गुप्ता ने बताया कि टीबी मरीजों को चिह्नित करने में आगरा प्रदेश में अव्वल रहा है। 30 हजार से अधिक मरीज एक साल में चिह्नित किए हैं। टीबी में छह महीने और ड्रग रेजिस्टेंट टीबी का इलाज 9-11 महीने चलता है। एक्सडीआर टीबी के मरीजों की 18 से 20 महीने दवाएं चली।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. सुखेश गुप्ता ने बताया कि टीबी मरीजों को चिह्नित करने में आगरा प्रदेश में अव्वल रहा है। 30 हजार से अधिक मरीज एक साल में चिह्नित किए हैं। टीबी में छह महीने और ड्रग रेजिस्टेंट टीबी का इलाज 9-11 महीने चलता है। एक्सडीआर टीबी के मरीजों की 18 से 20 महीने दवाएं चली।
मधुमेह, किडनी-लिवर के मरीजों में ज्यादा खतरा
एसएन मेडिकल कॉलेज के वक्ष एवं क्षय रोग विभाग के डॉ. जीवी सिंह ने बताया मधुमेह, कैंसर, लिवर-किडनी मरीजों के अलावा बच्चों-बुजुर्गाे में एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी का खतरा अधिक है। ऐसे मरीजों की दर बढ़ी है। खांसी-बलगम नहीं है। बुखार, कमजोरी और वजन कम हो रहा है तो टीबी की जांच जरूर कराएं।
एसएन मेडिकल कॉलेज के वक्ष एवं क्षय रोग विभाग के डॉ. जीवी सिंह ने बताया मधुमेह, कैंसर, लिवर-किडनी मरीजों के अलावा बच्चों-बुजुर्गाे में एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी का खतरा अधिक है। ऐसे मरीजों की दर बढ़ी है। खांसी-बलगम नहीं है। बुखार, कमजोरी और वजन कम हो रहा है तो टीबी की जांच जरूर कराएं।
ये हैं टीबी के लक्षण
- दो सप्ताह से अधिक से खांसी-बलगम।
- बुखार, रात में पसीना आना, मुंह से खून आना।
- सीने में दर्द, सांस लेने में दिक्कत, वजन कम होना।
- भूख न लगना, थकान, गर्दन में गिल्टी/गांठे, बांझपन।
- दिमाग की टीबी में मिर्गी के दौरे आना।
- दो सप्ताह से अधिक से खांसी-बलगम।
- बुखार, रात में पसीना आना, मुंह से खून आना।
- सीने में दर्द, सांस लेने में दिक्कत, वजन कम होना।
- भूख न लगना, थकान, गर्दन में गिल्टी/गांठे, बांझपन।
- दिमाग की टीबी में मिर्गी के दौरे आना।