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पूर्व सैन्य अधिकारी बोले: सेना का मनोबल बनाए रखने के लिए चीन को सबक जरूरी

Fri, 19 Jun 2020 12:02 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Fri, 19 Jun 2020 12:02 AM IST
सार

पूर्व सैन्य अधिकारी ने कहा कि सरकार ऐसा फैसला ले जिससे दुनिया में संदेश जाए, हमसे जो टकराएगा, चूर चूर हो जाएगा।

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Ex-army officer said government should be strict steps against china
पूर्व सैन्य अधिकारी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हमारे सैनिक निहत्थे गए थे, उन पर चीन की सेना ने हमला किया। यह बर्दाश्त करने लायक नहीं है। चीन की हरकत कायराना है। इसका जवाब दिया जाना जरूरी है। हमारी सेनाएं सक्षम हैं चीन को सबक सिखाने के लिए। चीन हमें धोखा भी देता रहा है और हमारी जमीन पर कब्जे की कोशिश भी। 
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अब समय आ गया है कि जब उसे सबक सिखाया जाए। हमारी सेना का मनोबल ऊंचा रखने के लिए यह जरूरी भी है। यह कहना है आगरा के पूर्व सैन्य अधिकारियों का। वे चाहते हैं कि सरकार ऐसा फैसला ले जिससे दुनिया में संदेश जाए, हमसे जो टकराएगा, चूर चूर हो जाएगा।
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'चीन ने धोखा दिया, उसे सबक सिखाना जरूरी'

कर्नल (रिटायर्ड) ए मनोहर नायडू ने कहा कि चीन ने धोखा दिया। यह उसकी फितरत है। हमारे निहत्थे सैनिकों पर हमला किया। एक तरफ बातचीत चल रही थी, दूसरी ओर यह कायराना हरकत। इसका जवाब दिया जाना चाहिए ताकि सेना का मनोबल ऊंचा बना रहे। 
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उन्होंने कहा कि अगर हम चुप रहे तो चीन इसे हमारी कमजोरी समझेगा और अपनी विस्तारवादी नीति के तहत हमारी जमीन पर कब्जे की कोशिश करता रहेगा। इस समय चीन की हालत खराब है, दुनिया के ज्यादातर देश उससे नाराज हैं। यह सही समय है उसे सबक सिखाने का।

पर्वतीय क्षेत्रों के लिए विशेष सैन्य बल तैयार किया जाए

कर्नल (रिटायर्ड) जीएम खान ने कहा कि जैसे जल, थल और वायु के लिए अलग अलग सेना हैं, वैसे ही अब समय आ गया है कि पर्वतीय क्षेत्रों के लिए सेना की स्पेशल कोर हो। माउंटेन स्ट्राइक कोर गठित की जानी चाहिए जो पर्वतीय क्षेत्रों में ही तैनात रहे। ऐसे मौकों पर वो बेहद कारगर होगी जब पर्वतीय क्षेत्र में दुश्मन से मुकाबला करना होगा। 

उन्होंने कहा कि हमारी सेना रणनीति में, साहस में, युद्ध के अनुभव में चीन से आगे है। 1962 में भी हमारी सेना ने बहादुरी दिखाई। अगर हमारे पास बेहतर संसाधन होते तो नतीजा कुछ और होता। चीन के लिए अलग से रणनीति तैयार करने का समय आ गया है। 

'कूटनीतिक स्तर पर भी किए जाएं प्रयास'

स्क्वैड्रन लीडर (रिटायर्ड) एके सिंह ने कहा कि हमारे सैनिक शहीद हुए, यह बहुत दुखद है। वीर जवानों ने दुश्मन के दांत खट्टे किए, चीन के सैनिक भी हताहत हुए हैं। चीन पर पूरे देश में गुस्सा है, लेकिन यह ऐसा वक्त है जब संयम और धैर्य की भी जरूरत है। 

हमें कूटनीतिक स्तर पर प्रयास जारी रखने चाहिए। युद्ध के बाद भी नतीजा बातचीत से ही निकलता है। यह ऐसा वक्त है जब न चीन युद्ध की स्थिति में है और न ही भारत। हमें ऐसा रास्ता निकालना चाहिए जिससे कड़ा संदेश भी जाए और देश युद्ध से बच जाए।

चीन को सबक सिखाने का वक्त आ गया 

कर्नल ( रिटायर्ड ) एसके भाटिया ने कहा कि चीन ने यह हरकत पहली बार नहीं की है। हमारी जमीन पर आना, कब्जे की कोशिश करना, टेंट लगाना ... चीन की सेना यह लंबे समय से कर रही है। अब वक्त आ गया है जब चीन को सबक सिखाया जाए। अब तीन मोर्चे खुल गए हैं। 

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान पहले से शत्रु है, चीन धोखेबाज है, मुंह में राम, बगल में छुरी वाली कहानी है। नेपाल को भी उसने भड़का कर तीसरा मोर्चा बनाया है। हमें तीनों पर जूझना है। अगर चीन को सबक सिखा दिया तो पाकिस्तान और नेपाल को भी कड़ा संदेश मिल जाएगा। सैनिकों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाना चाहिए। बदला कैसे लेना है, कब लेना है, यह सरकार और भारतीय सेना तय करे। 


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