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'सुनिए वित्त मंत्री जी' एटा से कासगंज का रेलवे ट्रैक जुड़े तो जिले के विकास को मिले रफ्तार
Sun, 24 Jan 2021 01:29 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, एटा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, एटा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Sun, 24 Jan 2021 01:29 PM IST
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एटा की रेलवे लाइन
- फोटो : अमर उजाला
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उत्तर मध्य रेलवे का एटा स्टेशन केवल नाम का रेलवे स्टेशन है। यहां आगरा के बरहन से एक मात्र पैसेंजर ट्रेन आती है और जाती है। हालांकि लॉकडाउन से यह ट्रेन भी बंद पड़ी है। लोगों की मांग है यदि एटा को कासगंज रेलवे स्टेशन से जोड़ दिया जाए तो जिले का विकास रफ्तार पकड़ सकता है। यहां से लंबी दूरी की ट्रेनें चलने से व्यापार फलेगा-फूलेगा।
वर्ष 1959 में तत्कालीन भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने एटा रेलवे स्टेशन का उद्घाटन किया था। हालांकि उद्घाटन के 70 साल बाद भी रेलवे स्टेशन का विकास नहीं हो सका। यहां एकमात्र सवारी गाड़ी के अलावा केवल मालगाड़ियां आती हैं। लोगों की मांग है यदि एटा रेलवे स्टेशन को कासगंज रेलवे स्टेशन से जोड़ दिया जाए तो वाया टूंडला, एटा, कासगंज होते हुए लंबी दूरी की ट्रेनें यहां से गुजरेंगी तो आवागमन के साधन सुलभ होंगे और जिले का विकास रफ्तार पकड़ेगा।
लंबे संघर्ष से चल सकी ट्रेन
एटा से आगरा तक बंद पड़ी ट्रेन को चालू कराने के लिए लोगों को लंबा संघर्ष करना पड़ा। आंदोलन के दौरान समाजसेवी लोगों ने अपनी जेब से टिकट खरीदीं, जिससे रेलवे की आय बढ़े तो सवारी गाड़ी बदस्तूर चलती रहे। - मेघावृत शास्त्री, समाजसेवी
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वर्ष 1959 में तत्कालीन भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने एटा रेलवे स्टेशन का उद्घाटन किया था। हालांकि उद्घाटन के 70 साल बाद भी रेलवे स्टेशन का विकास नहीं हो सका। यहां एकमात्र सवारी गाड़ी के अलावा केवल मालगाड़ियां आती हैं। लोगों की मांग है यदि एटा रेलवे स्टेशन को कासगंज रेलवे स्टेशन से जोड़ दिया जाए तो वाया टूंडला, एटा, कासगंज होते हुए लंबी दूरी की ट्रेनें यहां से गुजरेंगी तो आवागमन के साधन सुलभ होंगे और जिले का विकास रफ्तार पकड़ेगा।
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लंबे संघर्ष से चल सकी ट्रेन
एटा से आगरा तक बंद पड़ी ट्रेन को चालू कराने के लिए लोगों को लंबा संघर्ष करना पड़ा। आंदोलन के दौरान समाजसेवी लोगों ने अपनी जेब से टिकट खरीदीं, जिससे रेलवे की आय बढ़े तो सवारी गाड़ी बदस्तूर चलती रहे। - मेघावृत शास्त्री, समाजसेवी
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एटा से जोड़ा जाए कासगंज
एटा से कासगंज की दूरी मात्र 35 से 40 किलोमीटर है। इतनी दूरी तक ट्रैक बिछाकर दोनों जिलों को आपस में जोड़ दिया जाए तो यहां से सीधी ट्रेन कासगंज होते हुए लखनऊ और बरेली तक जा सकेंगी। सत्य प्रवीन गुप्ता, मुख्य सलाहकार, लक्ष्य
गरीब किसानों को होगा फायदा
एटा-कासगंज रेलवे ट्रैक जुड़ने से सबसे ज्यादा फायदा गांव के गरीब किसानों को होगा। वह अपने-अपने हॉल्ट स्टेशनों से कम रुपयों में जिला मुख्यालय तक की यात्रा कर सकेंगे। जिले के लोगों कासगंज में गंगा स्नान का लाभ मिलेगा। - ओम प्रकाश, नेता भारतीय किसान यूनियन
कम रुपयों में होगा सुहाना सफर
जलेसर, अवागढ़ से बड़ी संख्या में लोग यात्री ट्रेन के माध्यम से एटा तक आते हैं। यदि यह रूट कासगंज तक जुड़ जाए तो यहां के लोग गंगा स्नान के साथ लखनऊ तक की यात्रा कम पैसों में कर सकते हैं। - संजीव वार्ष्णेय, उद्यमी और समाजसेवी
एटा से कासगंज की दूरी मात्र 35 से 40 किलोमीटर है। इतनी दूरी तक ट्रैक बिछाकर दोनों जिलों को आपस में जोड़ दिया जाए तो यहां से सीधी ट्रेन कासगंज होते हुए लखनऊ और बरेली तक जा सकेंगी। सत्य प्रवीन गुप्ता, मुख्य सलाहकार, लक्ष्य
गरीब किसानों को होगा फायदा
एटा-कासगंज रेलवे ट्रैक जुड़ने से सबसे ज्यादा फायदा गांव के गरीब किसानों को होगा। वह अपने-अपने हॉल्ट स्टेशनों से कम रुपयों में जिला मुख्यालय तक की यात्रा कर सकेंगे। जिले के लोगों कासगंज में गंगा स्नान का लाभ मिलेगा। - ओम प्रकाश, नेता भारतीय किसान यूनियन
कम रुपयों में होगा सुहाना सफर
जलेसर, अवागढ़ से बड़ी संख्या में लोग यात्री ट्रेन के माध्यम से एटा तक आते हैं। यदि यह रूट कासगंज तक जुड़ जाए तो यहां के लोग गंगा स्नान के साथ लखनऊ तक की यात्रा कम पैसों में कर सकते हैं। - संजीव वार्ष्णेय, उद्यमी और समाजसेवी