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अच्छी रैंक होने पर ही बच पाएगी इंजीनियरों की कुर्सी
अच्छी रैंक होने पर ही बच पाएगी इंजीनियरों की कुर्सी
Updated Wed, 26 Oct 2016 12:54 AM IST
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नियाग्रा फाल
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आगरा विकास प्राधिकरण में इंजीनियरों के कामकाज को प्रभावशाली बनाने के लिए अब रैंकिंग सिस्टम लागू किया जा रहा है। इसके तहत इंजीनियरों के कामकाज की हर महीने समीक्षा होगी। उसके आधार पर उन्हें नंबर दिए जाएंगे। जिस इंजीनियर का काम उल्लेखनीय नहीं होगा, उसकी सीट बदल दी जाएगी। बोर्ड की बैठक में इस प्रस्ताव को हरी झंडी मिल चुकी है।
एडीए के इंजीनियरों के कामकाज को लेकर हमेशा सवाल उठते रहे हैं। विशेषकर प्रवर्तन विभाग निशाने पर रहा है। अवैध निर्माणों को लेकर इंजीनियर आरोपों के घेरे में रहते हैं। वहीं कुछ इंजीनियर ऐसे हैं, जो प्रवर्तन विभाग को छोड़ना नहीं चाहते हैं। कोई अधिकारी इनके तबादले की कोशिश करता है, तो अपनी पहुंच का इस्तेमाल कर फिर उसी सीट पर पहुंच जाते हैं। निर्माण विभाग में भी ऐसे कई इंजीनियर हैं जो वर्षों से एक ही कुर्सी पर हैं।
ऐसे इंजीनियरों पर शिकंजा कसने के लिए अधिकारियों ने रैंकिंग सिस्टम तैयार किया है। इसके दायरे में सबसे पहले प्रवर्तन विभाग है। इसके तहत देखा जाएगा कि किस इंजीनियर ने कितने अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई की और कितने निर्माणों को कंपाउंड कर शमन शुल्क वसूल किया है। गौरतलब है कि शहर में करीब 114 इमारतें हैं, जो कई महीनों से सील हैं। न तो उन्हें कंपाउंड किया जा रहा और न ही उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
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एडीए के इंजीनियरों के कामकाज को लेकर हमेशा सवाल उठते रहे हैं। विशेषकर प्रवर्तन विभाग निशाने पर रहा है। अवैध निर्माणों को लेकर इंजीनियर आरोपों के घेरे में रहते हैं। वहीं कुछ इंजीनियर ऐसे हैं, जो प्रवर्तन विभाग को छोड़ना नहीं चाहते हैं। कोई अधिकारी इनके तबादले की कोशिश करता है, तो अपनी पहुंच का इस्तेमाल कर फिर उसी सीट पर पहुंच जाते हैं। निर्माण विभाग में भी ऐसे कई इंजीनियर हैं जो वर्षों से एक ही कुर्सी पर हैं।
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ऐसे इंजीनियरों पर शिकंजा कसने के लिए अधिकारियों ने रैंकिंग सिस्टम तैयार किया है। इसके दायरे में सबसे पहले प्रवर्तन विभाग है। इसके तहत देखा जाएगा कि किस इंजीनियर ने कितने अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई की और कितने निर्माणों को कंपाउंड कर शमन शुल्क वसूल किया है। गौरतलब है कि शहर में करीब 114 इमारतें हैं, जो कई महीनों से सील हैं। न तो उन्हें कंपाउंड किया जा रहा और न ही उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
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