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UP: सर्कस की क्रूर बेड़ियों से मुक्त हुए छोटे हाथियों ने मनाया आजादी का जश्न, देखें तस्वीरें
Sat, 17 May 2025 09:49 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Sat, 17 May 2025 09:49 AM IST
सार
सर्कस की क्रूर बेड़ियों से मुक्त हुए छोटे हाथियों ने आजादी का जश्न मनाया। इन हाथियों को करतब दिखाने के लिए भूख-प्यासा रखा जाता था। बीमार होने पर भी प्रदर्शन कराया जाता था।
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हाथी
- फोटो : wildlife sos
विस्तार
कभी सर्कस की जंजीरों में जकड़े, करतब दिखाने को मजबूर चार छोटे हाथी कोकोनट, पीनट, वॉलनट और मैकडेमिया ने शुक्रवार को हाथी संरक्षण केंद्र में आजादी के एक दशक का जश्न मनाया। उनकी रिहाई की यह वर्षगांठ एक भावुक पल था, जो उनके मुश्किल अतीत और उज्ज्वल वर्तमान की याद दिलाता है।
साल 2015 में महाराष्ट्र के एक सर्कस से इन छोटे हाथियों को बचाया गया था। उस वक्त ये बहुत छोटे थे, जिन्हें मनोरंजन के नाम पर कठोर प्रशिक्षण दिया जाता था। भूखे-प्यासे, बीमार होने पर भी उन्हें लगातार प्रदर्शन करने के लिए मजबूर किया जाता था। वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक और सीईओ कार्तिक सत्यनारायण ने उन मुश्किल दिनों को याद करते हुए बताया कि बचाव के समय उनकी हालत बेहद नाजुक थी। आज ‘नट हर्ड‘ के नाम से मशहूर ये चारों हाथी न केवल स्वस्थ हैं, बल्कि दूसरों के लिए उम्मीद और जागरूकता का प्रतीक भी बन गए हैं।
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साल 2015 में महाराष्ट्र के एक सर्कस से इन छोटे हाथियों को बचाया गया था। उस वक्त ये बहुत छोटे थे, जिन्हें मनोरंजन के नाम पर कठोर प्रशिक्षण दिया जाता था। भूखे-प्यासे, बीमार होने पर भी उन्हें लगातार प्रदर्शन करने के लिए मजबूर किया जाता था। वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक और सीईओ कार्तिक सत्यनारायण ने उन मुश्किल दिनों को याद करते हुए बताया कि बचाव के समय उनकी हालत बेहद नाजुक थी। आज ‘नट हर्ड‘ के नाम से मशहूर ये चारों हाथी न केवल स्वस्थ हैं, बल्कि दूसरों के लिए उम्मीद और जागरूकता का प्रतीक भी बन गए हैं।
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हाथी
- फोटो : wildlife sos
उप निदेशक- पशु चिकित्सा सेवाएं डॉ. इलियाराजा बताते हैं कि प्यार से ‘नट’ कहे जाने वाले इन हाथियों की अपनी अलग पहचान और जरूरतें हैं। केंद्र में उनकी नियमित चिकित्सा जांच की जाती है, उनके लिए विशेष आहार तैयार किया जाता है, और उनके शारीरिक व भावनात्मक विकास के लिए कई गतिविधियां उनकी दिनचर्या का हिस्सा हैं।
वाइल्डलाइफ एसओएस की सह-संस्थापक और सचिव गीता शेषमणि ने भावुक होते हुए कहा कि दस साल पहले, नट हर्ड को तत्काल उपचार और प्यार की जरूरत थी। हाथी संरक्षण केंद्र पर मिली उचित देखभाल, स्नेह और प्राकृतिक वातावरण ने उन्हें अपने दुखद अतीत को भुलाने और एक नया जीवन जीने में मदद की है।
वाइल्डलाइफ एसओएस की सह-संस्थापक और सचिव गीता शेषमणि ने भावुक होते हुए कहा कि दस साल पहले, नट हर्ड को तत्काल उपचार और प्यार की जरूरत थी। हाथी संरक्षण केंद्र पर मिली उचित देखभाल, स्नेह और प्राकृतिक वातावरण ने उन्हें अपने दुखद अतीत को भुलाने और एक नया जीवन जीने में मदद की है।
हाथी
- फोटो : wildlife sos
इस विशेष अवसर को मनाने के लिए, वाइल्डलाइफ एसओएस ने नट हर्ड के लिए एक शानदार फलों की दावत (फ्रूट फीस्ट) का आयोजन किया। तरबूज, कद्दू, पपीता, केला और ककड़ी जैसे ताजे और रसीले फल उनके लिए सजाए गए थे। मैकडेमिया ने जहां ताजे फलों का आनंद लिया, वहीं वॉलनट और कोको के लिए दलिया, चावल और फलों से बना एक विशेष केक तैयार किया गया, जिसे उन्होंने बड़े चाव से खाया।