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Agra News: ई-वाहनों की पांच साल में धूम, बाइक से कार बन रही पसंद; 37 हजार से ज्यादा इलेक्ट्रिक वाहन
Sat, 18 Apr 2026 10:27 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Sat, 18 Apr 2026 10:27 AM IST
सार
आगरा में इलेक्ट्रिक वाहनों का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है और शहर की सड़कों पर अब 37,771 से ज्यादा ई-वाहन दौड़ रहे हैं। कम खर्च, कम मेंटेनेंस और 35 से ज्यादा चार्जिंग स्टेशनों के कारण लोग पेट्रोल वाहनों की जगह ई-वाहन अपना रहे हैं।
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ई वाहन
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
दो या चार पहिया वाहन भी लोगों की शान बनते जा रहे हैं। हर कोई ऐसा वाहन लेने की चाहत रखता है जो लंबे समय तक साथ दे और खर्च भी कम हो। इस मामले में इलेक्ट्रिक वाहन (ई-वाहन) भी लोगों की पसंद बनते जा रहे हैं। वाहनों के बाजार में पेट्रोल और डीजल के साथ पिछले पांच साल में ई-वाहन अपना अलग स्थान बनाते जा रहे हैं। हर वर्ष पांच से आठ हजार ई-वाहनों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है।
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आगरा की सड़कों पर वर्ष 2019 से ई-वाहन आना शुरू हुए। पहले लोग ई-वाहन खरीदने से पीछे रहे क्योंकि बैटरी और मेंटेनेंस की समस्या का समाधान नहीं मिलता था। वर्ष 2022 में ई-वाहनों की बिक्री ने एकदम से रफ्तार पकड़ना शुरू किया। परिवहन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक सबसे अधिक तेजी से ई-रिक्शा की बिक्री हुई। इसके बाद बाइकों का नंबर आता है, जिसमें 25 सीसी की बाइक भी शामिल है। अप्रैल-2026 तक संभागीय परिवहन विभाग में ई-कॉमर्शियल वाहन 25412 और ई नॉन कॉमर्शियल वाहन 12359 का रजिस्ट्रेशन हुआ है। वर्तमान में कुल 37,771 ई-वाहन ताजनगरी की सड़कों पर दौड़ रहे हैं। ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों का मानना है कि दो और तीन पहिया सेगमेंट में ई-वाहनों ने अपनी पकड़ सबसे मजबूत की है। शहरों में डिलीवरी पार्टनर और मध्यम वर्गीय परिवार अब पेट्रोल स्कूटर के बजाय इलेक्ट्रिक स्कूटर को प्राथमिकता दे रहे हैं।
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मुख्य आकर्षण और लाभ
कम लागत: पेट्रोल की तुलना में इलेक्ट्रिक वाहन को चार्ज करने का खर्च लगभग 80% तक कम आता है।
सरकारी सब्सिडी: ग्राहकों को भारी कर छूट और सब्सिडी मिल रही है।
रखरखाव: इंजन और जटिल गियर सिस्टम न होने के कारण इनका मेंटेनेंस खर्च बहुत मामूली है।
पर्यावरण अनुकूल: शून्य टेलपाइप उत्सर्जन के कारण ये शहरों के बढ़ते प्रदूषण को कम करने में मददगार साबित हो रहे हैं।
कम लागत: पेट्रोल की तुलना में इलेक्ट्रिक वाहन को चार्ज करने का खर्च लगभग 80% तक कम आता है।
सरकारी सब्सिडी: ग्राहकों को भारी कर छूट और सब्सिडी मिल रही है।
रखरखाव: इंजन और जटिल गियर सिस्टम न होने के कारण इनका मेंटेनेंस खर्च बहुत मामूली है।
पर्यावरण अनुकूल: शून्य टेलपाइप उत्सर्जन के कारण ये शहरों के बढ़ते प्रदूषण को कम करने में मददगार साबित हो रहे हैं।
35 से अधिक चार्जिंग स्टेशन
ई-वाहनों की बिक्री बढ़ने के साथ चार्जिंग स्टेशन की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। वर्तमान में 35 से अधिक चार्जिंग स्टेशन शहर के अंदर स्थापित हो चुके हैं। फतेहाबाद सड़क, संजय प्लेस और नेशनल हाईवे-टू पर स्टेशन बने हुए हैं। इससे लोगों को वाहनों के चार्ज करने की समस्या से काफी हद तक राहत मिली है। इस वजह से अब लोग बड़े ई-वाहन भी खरीद रहे हैं। वैसे सरकार की तरफ से हर पेट्रोल पंप पर ई-वाहनों के लिए चार्जिंग के लिए स्टेशन बनाने का निर्देश है।
ई-वाहनों की बिक्री बढ़ने के साथ चार्जिंग स्टेशन की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। वर्तमान में 35 से अधिक चार्जिंग स्टेशन शहर के अंदर स्थापित हो चुके हैं। फतेहाबाद सड़क, संजय प्लेस और नेशनल हाईवे-टू पर स्टेशन बने हुए हैं। इससे लोगों को वाहनों के चार्ज करने की समस्या से काफी हद तक राहत मिली है। इस वजह से अब लोग बड़े ई-वाहन भी खरीद रहे हैं। वैसे सरकार की तरफ से हर पेट्रोल पंप पर ई-वाहनों के लिए चार्जिंग के लिए स्टेशन बनाने का निर्देश है।
ई-वाहनों की स्थिति
ऑटो-9975
बाइक-11582
ई-रिक्शा- 15336
कार-663
बस-101
ऑटो-9975
बाइक-11582
ई-रिक्शा- 15336
कार-663
बस-101
ई-बसों की संख्या में भी इजाफा
एमजी सड़क और अन्य मार्गों पर पहले डीजल की बसों का संचालन किया जाता था। अब इनका स्थान पर ई-बसों ने ले लिया है। शहर में स्थानीय मार्गों पर ई-बसों का संचालन किया जा रहा है। वहीं परिवहन विभाग के बेड़े में भी ई-बसों को शामिल किया जा रहा है। अभी हाल ही में 30 ई-बसों का संचालन शुरू किया गया है। जबकि विभाग के पास 80 से अधिक ई-बसें उपलब्ध हैं।
एमजी सड़क और अन्य मार्गों पर पहले डीजल की बसों का संचालन किया जाता था। अब इनका स्थान पर ई-बसों ने ले लिया है। शहर में स्थानीय मार्गों पर ई-बसों का संचालन किया जा रहा है। वहीं परिवहन विभाग के बेड़े में भी ई-बसों को शामिल किया जा रहा है। अभी हाल ही में 30 ई-बसों का संचालन शुरू किया गया है। जबकि विभाग के पास 80 से अधिक ई-बसें उपलब्ध हैं।