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UP: बीमा कंपनी से 19 साल की लड़ाई...बुजुर्ग महिला को मिली जीत, अब मिला दोगुनी रकम का चेक
Sat, 12 Oct 2024 09:50 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Sat, 12 Oct 2024 09:50 AM IST
सार
बीमा कंपनी से लड़ाई में बुजुर्ग महिला को 19 साल बाद जीत मिल ही गई। बीमा कंपनी द्वारा पीड़िता को दोगुनी रकम का चेक देना पड़ा।
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- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
आगरा में बीमा कंपनी से 19 साल तक लड़ाई लड़ने के बाद आखिरकार बुजुर्ग महिला ने जीत हासिल कर ली। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष सर्वेश कुमार ने एलआईसी से मिले 2.70 लाख रुपये का चेक सौंपा। इससे पहले 2007 में आयोग ने 1 लाख रुपये दिलाने के आदेश दिए थे। तब बीमा कंपनी ने रकम अदा नहीं की थी।
जगदीशपुरा थाना क्षेत्र के नगला गूलर निवासी रामवती ने उपभोक्ता आयोग में वाद दायर किया था। बताया कि उनके पति रामस्वरूप कुशवाह ने अपने जीवन काल में एलआईसी बीमा कंपनी से एक लाख रुपये की बीमा पॉलिसी ली थी। जिसकी नियमित किस्त अदा की। 29 सितंबर 2005 को पति की हृदयाघात से मौत हो गई।
सभी दस्तावेज पूरे कर कंपनी में क्लेम किया। 18 अप्रैल 2006 को बीमारी छिपाने का हवाला देकर क्लेम खारिज कर दिया गया। उपभोक्ता आयोग ने 16 अक्तूबर 2007 को वादिनी के हक में फैसला सुनाया। बीमा कंपनी से 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित एक लाख रुपये के साथ मानसिक कष्ट और वाद व्यय के रूप में 2500 रुपये भी दिलाने के आदेश दिए। कंपनी ने रकम जमा नहीं की। आयोग अध्यक्ष सर्वेश कुमार ने कई आदेश पारित कर एलआईसी से क्लेम की रकम जमा करवाकर वादिनी को चेक सौंपा।
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जगदीशपुरा थाना क्षेत्र के नगला गूलर निवासी रामवती ने उपभोक्ता आयोग में वाद दायर किया था। बताया कि उनके पति रामस्वरूप कुशवाह ने अपने जीवन काल में एलआईसी बीमा कंपनी से एक लाख रुपये की बीमा पॉलिसी ली थी। जिसकी नियमित किस्त अदा की। 29 सितंबर 2005 को पति की हृदयाघात से मौत हो गई।
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सभी दस्तावेज पूरे कर कंपनी में क्लेम किया। 18 अप्रैल 2006 को बीमारी छिपाने का हवाला देकर क्लेम खारिज कर दिया गया। उपभोक्ता आयोग ने 16 अक्तूबर 2007 को वादिनी के हक में फैसला सुनाया। बीमा कंपनी से 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित एक लाख रुपये के साथ मानसिक कष्ट और वाद व्यय के रूप में 2500 रुपये भी दिलाने के आदेश दिए। कंपनी ने रकम जमा नहीं की। आयोग अध्यक्ष सर्वेश कुमार ने कई आदेश पारित कर एलआईसी से क्लेम की रकम जमा करवाकर वादिनी को चेक सौंपा।
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