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टेंडर में अटका पाठ्य पुस्तकों का वितरण
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कासगंज। कोरोना संकट के चलते बाधित हुई बच्चों की पढ़ाई को ढर्रे पर लाने के लिए एक जुलाई से वितरित होने वाली पाठ्यपुस्तके टेंडर में उलझ कर रह गईं। दो बार टेंडर होनेे के बाद भी मानक पूरे नहीं हो सके। अब तीसरी बार टेंडर की तैयारी की जा रही है, इसके लिए अनुमति मांगी जा रही है।
शासन से कक्षा एक से आठ तक के बेसिक शिक्षा परिषद एवं माध्यमिक शिक्षा परिषद के अधीन संचालित शासकीय एवं सहायता प्राप्त विद्यालयों में शिक्षारत बच्चों को निशुल्क पाठ्य पुस्तक योजना के तहत पुस्तकें उपलब्ध कराई जाती हैं। जिले के इन विद्यालयों में 154992 छात्र-छात्राएं शिक्षारत हैं। कोरोना संकट के चलते इस बार पढ़ाई पर काफी असर पड़ा है।
बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई कराई जा रही है। पाठ्यपुस्तकों के अभाव में पढ़ाई सही ढंग से नहीं हो पा रही है। स्कूल न खुलने पर शासन ने बच्चों के अभिभावकों को स्कूल बुलाकर पुस्तक वितरण कराने की व्यवस्था निर्धारित की। विभाग को जून माह के पहले पखवाड़े से ही पुस्तकों की उपलब्धता होने लगी। आवश्यकता अनुसार 60 प्रतिशत प्राप्त भी हो चुकी हैं। पुस्तकों को प्राप्त हुए एक माह से अधिक का समय हो चुका है, लेकिन अभी तक स्कूलों तक पुस्तकें नहीं पहुंच सकी हैं, जिससे बच्चों को इनका वितरण नहीं हो पा रहा।
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बतातें हैं कि स्कूलों तक पुस्तक पहुंचाने के लिए वाहन की व्यवस्था की जाती है। इसके लिए विभाग टेंडर कराता है। दो बार टेंडर कराए भी गए। जिसमें सात लोगों ने अपने आवेदन किए, लेकिन इनमें से दो ही आवेदन मानक को पूरा कर रहे थे। टेंडर खोलने के लिए कम से कम तीन आवेदनों का होना आवश्यक होता है, जिससे प्रक्रिया लटक गई।
- पुस्तकों का वितरण करने के लिए दो बार टेंडर कराए गए, लेकिन मानक पूरे नहीं हुए। अब तीसरी बार टेंडर कराया जाएगा। इसके लिए अनुमति मांगी जा रही है। अन्य माध्यमों से बीआरसी पर पुस्तकें पहुंचाई भी जा रही हैं। -अंजली अग्रवाल, बेसिक शिक्षा अधिकारी
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शासन से कक्षा एक से आठ तक के बेसिक शिक्षा परिषद एवं माध्यमिक शिक्षा परिषद के अधीन संचालित शासकीय एवं सहायता प्राप्त विद्यालयों में शिक्षारत बच्चों को निशुल्क पाठ्य पुस्तक योजना के तहत पुस्तकें उपलब्ध कराई जाती हैं। जिले के इन विद्यालयों में 154992 छात्र-छात्राएं शिक्षारत हैं। कोरोना संकट के चलते इस बार पढ़ाई पर काफी असर पड़ा है।
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बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई कराई जा रही है। पाठ्यपुस्तकों के अभाव में पढ़ाई सही ढंग से नहीं हो पा रही है। स्कूल न खुलने पर शासन ने बच्चों के अभिभावकों को स्कूल बुलाकर पुस्तक वितरण कराने की व्यवस्था निर्धारित की। विभाग को जून माह के पहले पखवाड़े से ही पुस्तकों की उपलब्धता होने लगी। आवश्यकता अनुसार 60 प्रतिशत प्राप्त भी हो चुकी हैं। पुस्तकों को प्राप्त हुए एक माह से अधिक का समय हो चुका है, लेकिन अभी तक स्कूलों तक पुस्तकें नहीं पहुंच सकी हैं, जिससे बच्चों को इनका वितरण नहीं हो पा रहा।
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बतातें हैं कि स्कूलों तक पुस्तक पहुंचाने के लिए वाहन की व्यवस्था की जाती है। इसके लिए विभाग टेंडर कराता है। दो बार टेंडर कराए भी गए। जिसमें सात लोगों ने अपने आवेदन किए, लेकिन इनमें से दो ही आवेदन मानक को पूरा कर रहे थे। टेंडर खोलने के लिए कम से कम तीन आवेदनों का होना आवश्यक होता है, जिससे प्रक्रिया लटक गई।
- पुस्तकों का वितरण करने के लिए दो बार टेंडर कराए गए, लेकिन मानक पूरे नहीं हुए। अब तीसरी बार टेंडर कराया जाएगा। इसके लिए अनुमति मांगी जा रही है। अन्य माध्यमों से बीआरसी पर पुस्तकें पहुंचाई भी जा रही हैं। -अंजली अग्रवाल, बेसिक शिक्षा अधिकारी