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नगर भ्रमण के साथ किया गया दुर्गा मूर्ति का विसर्जन
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टूंडला में दुर्गा मूर्तियों का विजर्सन से पूर्व नगर भ्रमण कराते भक्त।
- फोटो : TUNDLA
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टूंडला (फिरोजाबाद)। नगर में चल रहे तीन दिवसीय दुर्गा महोत्सव का मंगलवार को विशेष पूजा-अर्चना व विदाई कार्यक्रम के साथ समापन हो गया। दुर्गा मूर्तियों को शोभायात्रा के रूप में नगर भ्रमण करवाते हुए आयोजक प्रतिमाओं को विसर्जन के लिए गंगाजी व यमुनाजी लेकर गए। इस मौके पर लोगों ने जमकर फाग खेला और ढोल की थाप पर नृत्य किया। लोगों ने नम आंखों से अगले वर्ष पुन: मिलेंगे कह कर विदाई दी।
नगर का तीन दिवसीय दुर्गा महोत्सव मंगलवार को माता की विदाई के साथ समाप्त हो गया। इस मौके पर प्रात: हवन आदि का आयोजन किया गया। मातारानी की महाआरती के बाद देवी भक्तों ने दुर्गा माता को विदाई दी। महिलाओं ने एक दूसरे के सिंदूर लगाकर फाग खेला तो वहीं युवाओं ने भी गाजे-बाजे के साथ जमकर फाग खेला। दोपहर तक चले विशेष पूजा-अर्चना के उपरांत देवी की मूर्तियों को पंडाल से निकालकर झांकियों के रूप में सजाया।
इसके बाद शाम के समय सभी झांकियों को शोभायात्रा के रूप में नगर भ्रमण कराया गया। झांकियों के साथ हल्ला गाड़ियों पर लगे ध्वनि विस्तारण यंत्रों की तेज धुन पर युवा वर्ग थिरकता चल रहा था। वहीं बैंड व ढोल की थाप पर भी नृत्य हो रहा था। बीच-बीच में उत्साही युवा गुलाल को उड़ा वातावरण को रंगीन बना रहे थे। साथ ही माता रानी की मूर्ति विसर्जन के लिए साथ जा रहे लोग आपस में फाग खेल रहे थे। इसके साथ ही प्रसाद का वितरण भी किया जा रहा था। देर शाम तक माता की झांकियों से नगर शोभायमान हो रहा था। रात में झांकियों को मोहम्मदाबाद व अनवारा घाट यमुना में विसर्जन के लिए ले जाया गया। जहां मां अंबे, जय जगदंबे के स्वर गूंजते रहे।
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नगर का तीन दिवसीय दुर्गा महोत्सव मंगलवार को माता की विदाई के साथ समाप्त हो गया। इस मौके पर प्रात: हवन आदि का आयोजन किया गया। मातारानी की महाआरती के बाद देवी भक्तों ने दुर्गा माता को विदाई दी। महिलाओं ने एक दूसरे के सिंदूर लगाकर फाग खेला तो वहीं युवाओं ने भी गाजे-बाजे के साथ जमकर फाग खेला। दोपहर तक चले विशेष पूजा-अर्चना के उपरांत देवी की मूर्तियों को पंडाल से निकालकर झांकियों के रूप में सजाया।
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इसके बाद शाम के समय सभी झांकियों को शोभायात्रा के रूप में नगर भ्रमण कराया गया। झांकियों के साथ हल्ला गाड़ियों पर लगे ध्वनि विस्तारण यंत्रों की तेज धुन पर युवा वर्ग थिरकता चल रहा था। वहीं बैंड व ढोल की थाप पर भी नृत्य हो रहा था। बीच-बीच में उत्साही युवा गुलाल को उड़ा वातावरण को रंगीन बना रहे थे। साथ ही माता रानी की मूर्ति विसर्जन के लिए साथ जा रहे लोग आपस में फाग खेल रहे थे। इसके साथ ही प्रसाद का वितरण भी किया जा रहा था। देर शाम तक माता की झांकियों से नगर शोभायमान हो रहा था। रात में झांकियों को मोहम्मदाबाद व अनवारा घाट यमुना में विसर्जन के लिए ले जाया गया। जहां मां अंबे, जय जगदंबे के स्वर गूंजते रहे।
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