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प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना- बजट के अभाव में लटकी किश्तें, परेशान हैं लाभार्थी
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कासगंज। बजट के अभाव में लाभार्थियों को प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना के तहत बीते पांच महीने से किश्तों का भुगतान नहीं हो पा रहा है। लाभार्थी परेशान हैं और किश्तों के लिए जिला नगरीय विकास अभिकरण (डूडा) कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं।
आवास योजना के तहत लाभार्थियों का चयन नगर निकायों द्वारा किया जाता है और फिर धनराशि डूडा कार्यालय के माध्यम से शासन स्वीकृत करता है। तीन किश्तों में आवास बनाने के लिए धनराशि का भुगतान होता है, लेकिन जिले में आवासीय योजना को झटका लग गया है। क्योंकि कोरोना काल में बजट का अभाव हो गया है। जून महीने से अब तक किसी भी लाभार्थी को योजना के तहत लाभ नहीं मिला है और किश्तों का भुगतान नहीं हो पा रहा है।
तो सत्यापन भी बढ़ा रहा उलझन
जहां एक ओर बजट के अभाव में किश्तें नहीं मिल पा रहीं हैं वहीं दूसरी तरफ तमाम अभ्यर्थियों के आवेदन सत्यापन में लटक गए हैं। कुछ स्थानीय स्तर पर सत्यापन लटका है तो कुछ सत्यापन लखनऊ से उलझे हुए हैं। आवेदक इधर उधर भटक रहे हैं।
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फैक्ट फाइल
- 347 लाभार्थियों की प्रथम किश्त ही लटकी।
- 268 लाभार्थियों की दूसरी किश्त नहीं मिल सकी।
- 1600 लाभार्थियों की तीसरी किश्त बजट के अभाव में लटकी।
- 5300 आवासों का इस साल तय है शासन से लक्ष्य।
- बजट का अभाव है जिस कारण किश्त नहीं पहुंच पा रही हैं। शासन से बजट आंवटित होने के बाद ही लाभार्थियों के खातों में किश्त स्वत: ही पहुंच जाएगी- विद्याशंकर पाल, पीओ, डूडा।
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आवास योजना के तहत लाभार्थियों का चयन नगर निकायों द्वारा किया जाता है और फिर धनराशि डूडा कार्यालय के माध्यम से शासन स्वीकृत करता है। तीन किश्तों में आवास बनाने के लिए धनराशि का भुगतान होता है, लेकिन जिले में आवासीय योजना को झटका लग गया है। क्योंकि कोरोना काल में बजट का अभाव हो गया है। जून महीने से अब तक किसी भी लाभार्थी को योजना के तहत लाभ नहीं मिला है और किश्तों का भुगतान नहीं हो पा रहा है।
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तो सत्यापन भी बढ़ा रहा उलझन
जहां एक ओर बजट के अभाव में किश्तें नहीं मिल पा रहीं हैं वहीं दूसरी तरफ तमाम अभ्यर्थियों के आवेदन सत्यापन में लटक गए हैं। कुछ स्थानीय स्तर पर सत्यापन लटका है तो कुछ सत्यापन लखनऊ से उलझे हुए हैं। आवेदक इधर उधर भटक रहे हैं।
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फैक्ट फाइल
- 347 लाभार्थियों की प्रथम किश्त ही लटकी।
- 268 लाभार्थियों की दूसरी किश्त नहीं मिल सकी।
- 1600 लाभार्थियों की तीसरी किश्त बजट के अभाव में लटकी।
- 5300 आवासों का इस साल तय है शासन से लक्ष्य।
- बजट का अभाव है जिस कारण किश्त नहीं पहुंच पा रही हैं। शासन से बजट आंवटित होने के बाद ही लाभार्थियों के खातों में किश्त स्वत: ही पहुंच जाएगी- विद्याशंकर पाल, पीओ, डूडा।